Meta में काम करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने जल्दी रिटायरमेंट के लिए कैसी लाइफस्टाइल अपनाई है? FIRE (Financial Independence, Retire Early) मूवमेंट क्या है और यह इंजीनियर उससे कैसे जुड़ा हुआ है? इस वायरल कहानी के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच किस तरह की बहस शुरू हो गई?

Meta Engineer News: Meta में काम करने वाले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कहानी इंटरनेट पर छाई हुई है। इस इंजीनियर की सालाना कमाई करीब 3 करोड़ रुपये है, लेकिन उसकी लाइफस्टाइल एकदम साधारण है। उसने जल्दी रिटायरमेंट लेने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया है। इतनी अच्छी सैलरी होने के बावजूद, वह जानबूझकर कार, टीवी, सोफा या घर जैसी महंगी चीज़ों से दूर रहता है।

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उसकी ये कहानी इसलिए वायरल हो गई है क्योंकि यह टेक कंपनियों में काम करने वाले उन लोगों से बिल्कुल अलग है, जो मोटी कमाई के बाद शानदार ज़िंदगी जीते हैं। आमतौर पर लोग महंगी गाड़ियां, आलीशान घर और महंगे गैजेट्स पर खर्च करते हैं। लेकिन यह इंजीनियर 'सोच-समझकर जीने' (intentional living) के सिद्धांत पर चलता है, जहां वह हर चीज़ खरीदने से पहले उसकी ज़रूरत और लंबे समय में उसके फायदे के बारे में सोचता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह ऐशो-आराम से ज़्यादा अपनी फाइनेंशियल आज़ादी को तवज्जो देता है। अपनी लाइफस्टाइल पर ज़्यादा खर्च करने के बजाय, वह अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बचाता है और उसे इन्वेस्ट करता है ताकि जल्दी रिटायर हो सके। उसका यह तरीका FIRE मूवमेंट से काफी मिलता-जुलता है। FIRE का मतलब है 'Financial Independence, Retire Early' (वित्तीय स्वतंत्रता, जल्दी रिटायरमेंट)। यह एक ग्लोबल ट्रेंड है, जिसमें लोग ज़्यादा से ज़्यादा बचत करके और खर्च घटाकर कम उम्र में ही फाइनेंशियल सिक्योरिटी हासिल करना चाहते हैं।

इस इंजीनियर का मानना है कि कम सामान होने से तनाव और ध्यान भटकने वाली चीज़ें कम होती हैं। घर या कार लोन जैसी बड़ी ज़िम्मेदारियों से बचकर, वह ज़्यादा फ्लेक्सिबल रहता है और उसके खर्चे भी कम रहते हैं। इससे उसे अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा सीधे इन्वेस्टमेंट में लगाने में मदद मिलती है।

उसकी कहानी ने सोशल मीडिया पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। कई लोग उसके फाइनेंशियल अनुशासन और अलग सोच की तारीफ कर रहे हैं। वे इसे एक स्मार्ट और भविष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई स्ट्रैटेजी बता रहे हैं। वहीं, कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या इतनी ज़्यादा सादगी में जीना आराम और मानसिक सुकून की कुर्बानी देना नहीं है, भले ही आपके पास पैसा क्यों न हो।

उसकी फिलॉसफी का सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाला पहलू यह है कि यह लाइफस्टाइल पूरी तरह से उसकी अपनी मर्ज़ी है। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि वह महंगी चीज़ें खरीद सकता है, लेकिन जानबूझकर नहीं खरीदता क्योंकि वे उसके पर्सनल गोल या खुशी की परिभाषा में फिट नहीं बैठतीं।

इस वायरल कहानी ने उपभोक्तावाद (consumerism), वर्क-लाइफ बैलेंस और आज की बदलती अर्थव्यवस्था में युवा प्रोफेशनल्स सफलता को कैसे देखते हैं, इस पर भी एक नई बहस शुरू कर दी है। कुछ लोगों के लिए दौलत का मतलब ज़्यादा चीज़ों का मालिक होना है, तो वहीं इस Meta इंजीनियर जैसे लोगों के लिए इसका मतलब कम चीज़ों की ज़रूरत होना है। (यह खबर लिखते समय तक, पब्लिश हुई रिपोर्ट्स के अलावा कोई ऑफिशियल ट्वीट या सीधा बयान उपलब्ध नहीं था।)