NEET UG Re exam 2026 Aspirants Anxiety: NEET UG री-एग्जाम 2026 क्या छात्रों के लिए दूसरा मौका है या एक और मानसिक दबाव बन रहा है? क्या फिर से परीक्षा का दबाव छात्रों की मानसिक थकान और बर्नआउट का कारण बन रहा है? क्या पेरेंट्स और सिस्टम इस तनाव को समझ पा रहे हैं? राजस्थान के सीकर में एक और नीट छात्र के सुसाइड मामले के बीच जानिए क्या है सच्चाई?
NEET UG Re exam 2026 Stress: NEET UG री-एग्जाम 21 जून को होने वाला है और इसी बीच राजस्थान के सीकर से सामने आई घटनाओं ने मेडिकल एंट्रेंस की तैयारी कर रहे छात्रों के मानसिक दबाव पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में एक 22 वर्षीय NEET अभ्यर्थी की मौत की घटना और उससे पहले एक और छात्र से जुड़ी घटना ने यह दिखाया है कि दूसरा मौका कई बार उम्मीद के साथ-साथ भारी तनाव भी लेकर आता है।

नीट यूजी री-एग्जाम: मौका या छात्रों पर बढ़ता दबाव?
NEET जैसे बड़े एग्जाम में एक बार की असफलता के बाद री-एग्जाम या दोबारा तैयारी को अक्सर second chance कहा जाता है। लेकिन हकीकत यह है कि कई छात्रों के लिए यह मौका एक नई मानसिक लड़ाई बन जाता है। पहले से बनी थकान, लगातार पढ़ाई का प्रेशर और अबकी बार करना ही है जैसी सोच anxiety को और बढ़ा देती है। सीकर जैसे कोचिंग हब में यह दबाव और भी ज्यादा महसूस किया जाता है, जहां हर दिन हजारों छात्र एक ही लक्ष्य के लिए मेहनत करते हैं। ऐसे माहौल में तुलना, प्रतिस्पर्धा और अपेक्षाएं मानसिक बोझ को बढ़ा देती हैं।
क्या मैं फिर से कर पाऊंगा?- NEET UG छात्रों के मन में सबसे बड़ा सवाल
री-एग्जाम की घोषणा के बाद कई छात्रों के मन में एक ही सवाल घूमता है, क्या मैं दोबारा उतनी ही मेहनत कर पाऊंगा? क्या पिछली गलतियों को सुधार पाऊंगा? यह सेल्फ डाउट धीरे-धीरे मानसिक थकान और स्ट्रेस का रूप ले लेता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार तैयारी के बीच ब्रेक न मिलना, नींद की कमी और सोशल प्रेशर मिलकर स्टूडेंट्स को इमेाशनल बर्न आउट की स्थिति में पहुंचा सकते हैं।
NEET UG Re exam 2026: पेरेंट्स और सिस्टम की भूमिका
ऐसे समय में केवल छात्रों पर ही नहीं, बल्कि परिवार और पूरे एजुकेशन सिस्टम पर भी जिम्मेदारी आती है। पेरेंट्स का सपोर्ट, बिना तुलना किए एनकरेजमेंट और कोचिंग इंस्टीच्यूट्स में मेटल हेल्थ अवेयरनेस बेहद जरूरी हो जाता है। NEET जैसी परीक्षाओं में सिर्फ एकेडमिक तैयारी ही नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। NEET री-एग्जाम सिर्फ एक और परीक्षा नहीं है, बल्कि कई छात्रों के लिए यह भावनात्मक और मानसिक परीक्षा भी बन जाता है। जरूरत इस बात की है कि सेकंड चांस को सेकंड प्रेशर बनने से रोका जाए और छात्रों को सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि मानसिक सहारा भी दिया जाए।
अगर आप या आपका कोई जानने वाला मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो इन हेल्पलाइन्स पर मदद ली जा सकती है-
आसरा (मुंबई) 022-27546669, स्नेहा (चेन्नई) 044-24640050, सुमैत्री (दिल्ली) 011-23389090, कूज (गोवा) 0832-2252525, जीवन (जमशेदपुर) 0657-6453841, प्रतीक्षा (कोच्चि) 0484-2448830, मैत्री (कोच्चि) 0484-2540530, रोशनी (हैदराबाद) 040-66202000, लाइफलाइन (कोलकाता) 033-64643267।


