Inspiring Teachers in India: भारत के वो 21 महान शिक्षक कौन हैं, जिन्होंने शिक्षा की परिभाषा बदल दी? जानिए उन शिक्षकों की कहानी, जिन्होंने समाज और देश की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाई।
Best Teachers in India: हर साल 5 सितंबर को भारत में Teachers Day मनाया जाता है। यह दिन भारत के महान शिक्षक, दार्शनिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के मौके पर मनाया जाता है। 1962 से उनके जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई। लेकिन भारत में कुछ शिक्षक ऐसे भी रहे हैं, जिनका काम सिर्फ बच्चों को किताबें पढ़ाने तक सीमित नहीं रहा। किसी ने बेटियों की पढ़ाई के लिए समाज से लड़ाई लड़ी, किसी ने गरीब बच्चों को फ्री पढ़ाया, किसी ने गांव के स्कूल की तस्वीर बदल दी तो किसी ने पढ़ाई को साइंस और टेक्नोनॉजी से जोड़ दिया। आइए जानते हैं ऐसे ही 21 फेमस टीचरों और शिक्षा सुधारकों के बारे में... नीचे देखें वीडियो-

1. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन
भारत के महान दार्शनिक और शिक्षक राधाकृष्णन देश के दूसरे राष्ट्रपति बने। वे ऑक्सफोर्ड और भारतीय यूनिवर्सिटी में पढ़ाते रहे। उन्हें 1954 में भारत रत्न मिला। उनके जन्मदिन 5 सितंबर को ही टीचर्स डे मनाया जाता है।
2. सावित्रीबाई फुले
सावित्रीबाई ने उस समय लड़कियों को पढ़ाने का बीड़ा उठाया, जब महिलाओं की शिक्षा को लेकर समाज में काफी विरोध था। 1848 में उन्होंने ज्योतिबा फुले के साथ पुणे में लड़कियों के लिए स्कूल शुरू किया।
3. ज्योतिबा फुले
ज्योतिबा फुले ने शिक्षा को सामाजिक बराबरी का हथियार बनाया। उन्होंने सावित्रीबाई के साथ मिलकर लड़कियों और वंचित वर्गों के लिए शिक्षा के दरवाजे खोले।
4. डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम
भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक कलाम खुद को सबसे पहले एक शिक्षक मानते थे। वे युवाओं के बीच जाकर उन्हें विज्ञान, सपने और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करते थे। उन्हें 1997 में भारत रत्न मिला।
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5. आनंद कुमार
पटना के आनंद कुमार ने आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए Super 30 शुरू किया। उनका टारगेट ऐसे छात्रों को IIT जैसी संस्थाओं तक पहुंचाना था, जिनके पास महंगी कोचिंग के पैसे नहीं थे। उन्हें 2023 में पद्म श्री मिला।
6. रंजीतसिंह डिसाले
महाराष्ट्र के सरकारी स्कूल शिक्षक रंजीतसिंह डिसाले ने लड़कियों की शिक्षा और तकनीक के इस्तेमाल पर बड़ा काम किया। उन्होंने स्थानीय भाषा में किताबें तैयार कर उनमें QR Code जोड़े। 2020 में उन्हें ग्लोबल टीचर प्राइज मिला।
7. सोनम वांगचुक
लद्दाख के इंजीनियर और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने SECMOL के जरिए वहां की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की कोशिश की। उनका जोर बच्चों को किताबों के साथ व्यावहारिक ज्ञान देने पर रहा। उन्हें 2018 में रमन मैग्सेसे पुरस्कार मिला।
8. अरविंद गुप्ता
अरविंद गुप्ता ने बच्चों को साइंस सिखाने के लिए कबाड़ और रोजमर्रा की चीजों से खिलौने और मॉडल बनाने का तरीका लोकप्रिय किया। उन्होंने हजारों स्कूलों में जाकर साइंस को आसान बनाने का काम किया। उन्हें 2018 में पद्म श्री मिला।
9. शाहीन मिस्त्री
शाहीन मिस्त्री ने 1989 में Akanksha की शुरुआत की और बाद में 2008 में Teach For India की स्थापना की। उनका मकसद बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना और शिक्षा में असमानता कम करना रहा है। उन्हें 2019 में जमनालाल बजाज पुरस्कार मिला।
10. बाबर अली
पश्चिम बंगाल के बाबर अली ने सिर्फ 9 साल की उम्र में अपने घर के पीछे बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। धीरे-धीरे यही कोशिश स्कूल में बदल गई। उनकी कहानी गरीबी में रहने वाले बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने की मिसाल बन गई। उन्हें CNN-IBN Real Heroes Award 2009 समेत कई सम्मान मिले।
11. संदीप पांडे
इंजीनियरिंग और उच्च शिक्षा के बाद संदीप पांडे ने पढ़ाने के साथ ग्रामीण और वंचित समुदायों के बीच शिक्षा व सामाजिक काम किया। उन्होंने Asha for Education से भी जुड़कर काम किया। 2002 में उन्हें रमन मैग्सेसे पुरस्कार मिला।
12. अब्दुल मलिक
केरल के शिक्षक अब्दुल मलिक की कहानी इसलिए खास है क्योंकि वे स्कूल पहुंचने के लिए सालों तक कदलुंडी नदी तैरकर पार करते रहे। सड़क से लंबा रास्ता तय करने के बजाय उन्होंने रोज नदी पार करके बच्चों को पढ़ाना चुना।
13. द्विती चंद्र साहू
ओडिशा के द्विती चंद्र साहू का बचपन बेहद मुश्किलों में गुजरा। मां ने मेहनत-मजदूरी करके उन्हें पढ़ाया और उन्होंने भी संघर्ष करते हुए पढ़ाई जारी रखी। टीचर बनने के बाद उन्होंने गेम, YouTube, द्विभाषी शिक्षा (Bilingual Education) और स्थानीय संसाधनों से पढ़ाई को आसान बनाया। उन्हें नेशनल टीचर्स अवार्ड 2024 मिला।
14. तनुश्री दास
पश्चिम बंगाल की तनुश्री दास ने ऐसे गांव के स्कूल को बदलने का काम किया जहां नामांकन कम और ड्रॉपआउट ज्यादा था। उन्होंने बच्चों के साथ अभिभावकों और समुदाय को भी जोड़ा। उनके प्रयासों से स्कूल में 2016 के बाद जीरो ड्रॉपआउट का टारगेट हासिल हुआ। उन्हें 2025 का नेशनल टीचर्स अवार्ड मिला।
15. डॉ. प्रज्ञा सिंह
डॉ. प्रज्ञा सिंह ने गणित की पढ़ाई को बच्चों के लिए आसान और रोचक बनाने के लिए मैथ लैब और मैथ पार्क जैसी पहल की। लड़कियों की शिक्षा और सामाजिक जागरूकता से जुड़े अभियानों में भी उनका योगदान रहा। उन्हें नेशनल टीचर्स अवार्ड 2025 के लिए चुना गया।
16. नांग एक्थानी मोंगलांग
अरुणाचल प्रदेश की नांग एक्थानी मोंगलांग ने अपने सरकारी स्कूल में पढ़ाई के स्तर को सुधारने के लिए लगातार काम किया। उनके प्रयासों से कक्षा 10 का परिणाम 2024 में 81.54% और 2025 में 100% तक पहुंचा। उन्हें नेशनल टीचर्स अवार्ड 2025 के लिए चुना गया।
17. दिलीप कुमार
बिहार के शिक्षक दिलीप कुमार का फोकस बच्चों में विज्ञान और STEM की रुचि पैदा करने पर रहा। उन्होंने एक्टिविटी बेस्ड पढ़ाई और तकनीक का इस्तेमाल करके बच्चों को साइंस से जोड़ा। उन्हें नेशनल टीचर्स अवार्ड 2025 मिला।
18. कुलदीप गुप्ता
जम्मू-कश्मीर के टीचर कुलदीप गुप्ता ने बच्चों को सेंटर में रखकर सीखने का मॉडल डेवलप किया। उन्होंने बाल विवाह रोकने और लड़कियों को दोबारा स्कूल लाने के लिए भी समाज के साथ काम किया। उन्हें नेशनल टीचर्स अवार्ड 2025 मिला।
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19. रेनू त्रिपाठी
63 साल की रेनू त्रिपाठी ने उम्र को कभी सीखने और सिखाने के रास्ते में नहीं आने दिया। उन्होंने स्कूल में साइंस पढ़ाने के साथ YouTube के जरिए भी बच्चों तक साइंस कंटेंट पहुंचाया और 12 किताबें लिखीं। उन्हें नेशनल टीचर्स अवार्ड के लिए चुना गया, जिसका सम्मान 5 सितंबर 2026 को राष्ट्रपति द्वारा किया जाना है।
20. सुमन गोयल
हरियाणा की सुमन गोयल ने अपनी पढ़ाई के खर्च के लिए कभी बच्चों को सिर्फ ₹60 रोज में पढ़ाया था। बाद में वे सरकारी टीचर बनीं और बच्चों को अपने परिवार का हिस्सा मानकर पढ़ाने लगीं। उन्हें 2022 में राज्य पुरस्कार मिला और 2026 के नेशनल टीचर्स अवार्ड के लिए चुना गया।
21. डॉ. बेंसी जॉय
अंडमान-निकोबार के टीचर डॉ. बेंसी जॉय ने मैथ क्लब, इको क्लब और बच्चों की काउंसलिंग जैसी पहल शुरू कीं। उनका प्रयास सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों में प्रकृति और सीखने के प्रति रुचि पैदा करने पर भी रहा। उन्हें नेशनल टीचर्स अवार्ड से सम्मानित किया गया।
शिक्षक सिर्फ पढ़ाता नहीं, भविष्य बनाता है
इन 21 नामों की कहानियां अलग-अलग हैं। किसी ने गरीबी देखी, किसी ने सामाजिक विरोध झेला, किसी ने दूर-दराज के गांवों में काम किया और किसी ने तकनीक को शिक्षा से जोड़ा। लेकिन इन सभी में एक बात समान है- उन्होंने शिक्षक की भूमिका को सिर्फ किताब और ब्लैकबोर्ड तक सीमित नहीं रखा। टीचर्स डे का असली मतलब भी यही है। एक अच्छा शिक्षक सिर्फ परीक्षा में नंबर नहीं बढ़ाता, बल्कि बच्चे को यह भरोसा देता है कि वह अपनी परिस्थितियों से आगे बढ़ सकता है।
