UP Government Free Scooty Scheme Eligibility Criteria: यूपी में फ्री स्कूटी योजना में किन छात्राओं को फायदा होगा? योगी सरकार ने स्कूटी देने के लिए कौन से 2 बड़े नियम तय कर सकती है? किन छात्राओं को इस योजना से बाहर होना पड़ सकता है?

UP Rani Laxmibai Free Scooty Yojana Rules: अगर आप यूपी से हैं, कॉलेज जाती हैं, तो आपको जल्द ही फ्री में स्कूटी मिल सकती है। योगी सरकार अपने चुनावी वादे को पूरा करने के लिए 'रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना' को जमीन पर उतारने की तैयारी में है। करीब 50,000 से ज्यादा टॉपर बेटियों को मुफ्त स्कूटी देने का प्लान है, जिसके लिए सरकार ने ₹400 करोड़ का बजट भी तय कर दिया है। हालांकि, इस योजना में फ्री स्कूटी हर किसी को नहीं मिलेगी। सरकार ने इसके लिए 2 बेहद कड़े नियम बनाए हैं, जिससे तय होगा कि किसे यह तोहफा मिलेगा और किसका पत्ता कटेगा।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

यूपी में फ्री स्कूटी मिलने का नियम क्या है?

नियम नंबर 1: पढ़ाई का रिकॉर्ड

उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के अनुसार, सरकार इस समय दो मुख्य बातों पर फोकस कर रही है। अगर आप इसमें फिट बैठती हैं, तभी आपको स्कूटी की चाबी मिलेगी। सरकार के सामने लिस्ट तैयार करने के दो तरीके हैं, जिन पर अभी मंथन चल रहा है।

पहला- क्या यूपी बोर्ड, CBSE और ICSE की सिर्फ उन बेटियों को चुना जाए, जिन्होंने अपने बोर्ड में टॉप किया है।

दूसरा- या फिर कॉलेज में पढ़ने वाली यानी ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की उन सभी छात्राओं को मौका दिया जाए, जिनके 75% से ज्यादा नंबर आए हैं।

नियम नंबर 2: परिवार की कमाई

सरकार का पूरा फोकस इस बात पर है कि मुफ्त स्कूटी का फायदा उन परिवारों को मिले जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। इसके लिए एक इनकम लिमिट तय की जा रही है। जिसमें आने वाली फैमिली की बेटी को ये गिफ्ट दिया जाएगा।

यूपी स्कूटी स्कीम का फायदा किसे नहीं मिलेगा?

सरकार की तरफ से तय किए गए क्राइटेरिया में से जिन छात्राओं के नंबर कम होंगे या जो इस तय मेरिट लिस्ट में पीछे रह जाएंगी, उन्हें इस स्कीम का लाभ नहीं मिल पाएगा। इसके अलावा अमीर या बहुत साधन संपन्न परिवारों की बेटियों का नाम इस लिस्ट से कट सकता है, ताकि गरीब और मिडिल क्लास की टॉपर छात्राओं को प्रॉयरिटी दी जा सके।

चुनावी साल में क्यों आई तेजी?

इस योजना का वादा 2022 के चुनाव में हुआ था। इसके बाद बजट तो मंजूर हुआ, लेकिन गाइडलाइंस न बनने से स्कीम अटकी रही। अब जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव पास आ रहे हैं, तो सरकार इस काम को फटाफट पूरा करना चाहती है। इसके पीछे सरकार दूर तक सोच रखे हुए है। इस योजना के जरिए महिला वोटर्स पर फोकस है। सरकार फर्स्ट टाइम वोटर्स को अपने पाले में लाना चाहती है। इसके अलावा सरकार चुनाव में विपक्ष के हाथ वादे पूरे न करने का मुद्दा नहीं थमाना चाहती है।