UPTET 2026 की 2,3,4 जुलाई परीक्षा में अलग-अलग शिफ्ट का पेपर मिलेगा। ऐसे में सवाल है, क्या नॉर्मलाइजेशन लगेगा? जानिए जनरल और रिजर्व कैटेगरी का सेफ स्कोर…

UPTET 2026 Normalization and Safe Score: 2, 3 और 4 जुलाई को करीब 20 लाख कैंडिडेट्स यूपी टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (UPTET 2026) में शामिल होंगे। एग्जाम सिटी स्लिप जारी हो चुकी है और 30 जून को एडमिट कार्ड आएगा। सभी कैंडिडेट्स अपनी तैयारियों को फाइनल टच देने में जुटे हैं। लेकिन इस बीच तीन दिन, अलग-अलग शिफ्ट में होने वाली इस परीक्षा को लेकर हर किसी के मन में एक ही सवाल हर किसी के मन में घूम रहा है, 'मेरी शिफ्ट टफ निकली तो क्या मेरा नुकसान होगा?' चलिए आज इस कन्फ्यूजन को हमेशा के लिए खत्म कर देते हैं।

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यूपीटीईटी 2026 का पूरा शेड्यूल

तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने एग्जाम का पूरा कैलेंडर निकाल दिया है। 22 जून 2026 को सिटी स्लिप के साथ-साथ शिफ्ट की जानकारी भी सबको मिल गई। 2 जुलाई और 3 जुलाई को दो-दो शिफ्ट में परीक्षाएं होंगी और 4 जुलाई को सिर्फ एक शिफ्ट में एग्जाम है। सुबह वाली शिफ्ट 9:30 बजे से 12:00 बजे तक चलेगी और दोपहर वाली शिफ्ट 2:30 बजे से 5:00 बजे तक। कुल मिलाकर 955 सेंटर्स पर 60 जिलों में ये एग्जाम होगा। एडमिट कार्ड 30 जून को आएगा, तब आपको अपने एग्जाम सेंटर का पूरा पता चल जाएगा। इस बार करीब 4 साल बाद UPTET हो रहा है, इसलिए डिमांड बहुत ज्यादा है।

UPTET शिफ्ट अलग है तो पेपर भी अलग होगा?

जी हां, बिल्कुल। जब इतनी बड़ी तादाद में कैंडिडेट्स को बांटकर अलग-अलग शिफ्ट में बैठाया जाता है, तो हर शिफ्ट का क्वेश्चन पेपर अलग होता है। एक ही पेपर सब शिफ्ट में नहीं दिया जा सकता, वरना नकल और लीक का खतरा बढ़ जाता है। और जहां पेपर अलग है, वहां ये डर भी जायज है कि, 'मेरा पेपर टफ था, दूसरी शिफ्ट का पेपर आसान था, तो क्या उनको फायदा मिल जाएगा?' यहीं पर एक शब्द बहुत सुनने को मिलता है, नॉर्मलाइजेशन।

नॉर्मलाइजेशन क्या होता है?

मान लीजिए आपकी और आपके दोस्त का एग्जाम अलग-अलग दिन हुआ। आपका पेपर जरा मुश्किल आया और दोस्त का आसान। अगर सीधा मार्क्स से तुलना हो तो आपका नंबर कम दिखेगा, जबकि मेहनत आपने ज्यादा की। नॉर्मलाइजेशन इस गड़बड़ी को ठीक करने का एक तरीका है। इसमें कच्चे नंबर (Raw Marks) को सीधे ना देखकर, यह देखा जाता है कि आपने अपनी शिफ्ट के मुकाबले कैसा परफॉर्म किया। यानी आपका स्कोर 'पर्सेंटाइल' में बदल दिया जाता है, मतलब आप अपनी शिफ्ट में कितने लोगों से आगे रहे। ये तरीका UGC-NET और CUET जैसे एग्जाम में इस्तेमाल होता है, क्योंकि वहां हर शिफ्ट का स्कोर मिलाकर एक मेरिट लिस्ट और रैंक बनानी पड़ती है। लेकिन UPTET में असली स्टोरी थोड़ी अलग है।

UPTET 2026 में नॉर्मलाइजेशन होगा या नहीं?

यूपीटीईटी एक क्वालिफाइंग एग्जाम है, रैंकिंग एग्जाम नहीं। मतलब इसमें मेरिट लिस्ट या टॉप रैंक बनाने का मामला नहीं है। बस आपको एक फिक्स्ड कटऑफ पार करना होता है और आपको टीईटी सर्टिफिकेट मिल जाता है, जो लाइफटाइम वैलिड रहता है। जनरल कैटेगरी के लिए पुराने पैटर्न में ये कटऑफ 150 में से 90 नंबर (यानी 60%) के आसपास रहा है और रिजर्व कैटेगरी के लिए लगभग 82 नंबर (55%)। कई कोचिंग साइट्स अभी भी इसी बेंचमार्क का जिक्र कर रही हैं, हालांकि फाइनल और ऑफिशियल नोटिस का इंतजार बना रहता है। जब एग्जाम सिर्फ पास या फेल टाइप क्वालिफाइंग है, फिक्स्ड कटऑफ के साथ, तो शिफ्ट-टू-शिफ्ट नंबर बराबर करने वाली पर्सेंटाइल नॉर्मलाइजेशन की जरूरत वैसे नहीं पड़ती, जैसे CUET या NET में पड़ती है। UPESSC की तरफ से अभी तक ऐसा कोई ऑफिशियल ऐलान सामने नहीं आया कि UPTET 2026 में पर्सेंटाइल आधारित नॉर्मलाइजेशन लगाया जाएगा। तो डरने की बात नहीं है। आपका टारगेट सीधा और साफ है अपनी कैटेगरी का कटऑफ पार करना, चाहे शिफ्ट कोई भी मिले।

फिर भी हर शिफ्ट का पेपर अलग क्यों?

ये सवाल भी वाजिब है। एग्जाम बनाने वाली टीम कोशिश करती है कि सेलेबस, सेक्शन, डिफिकल्टी का बैलेंस मिलाकर हर शिफ्ट के पेपर का लेवल लगभग बराबर रहे। लेकिन थोड़ा फर्क रह ही जाता है। चूंकि कटऑफ फिक्स्ड है (ना कि पर्सेंटाइल आधारित), इस छोटे से फर्क से आपके पास या फेल होने पर सीधा असर नहीं पड़ता है। आपको सिर्फ अपने नंबर से कटऑफ पार करना है।

तो सेफ स्कोर क्या रखें, ताकि टेंशन फ्री रहें?

पुराने ट्रेंड और कोचिंग एक्सपर्ट्स की राय मिलाकर देखें तो जनरल कैटेगरी वालों के लिए 150 में से कम से कम 100 से 105 नंबर लाने की कोशिश रखें। इससे आप कटऑफ से काफी ऊपर रहेंगे और कोई गुंजाइश नहीं छूटेगी। OBC, SC, ST और अन्य रिजर्व कैटेगरी वालों के लिए 90 से 95 नंबर का टारगेट रखें। ये भी ऑफिशियल कटऑफ से ठीक ऊपर का सेफ जोन है।

यूपीटीईटी में एक फायदा जो आपको पता होना ही चाहिए

UPTET में नेगेटिव मार्किंग नहीं है। मतलब गलत जवाब देने पर एक भी नंबर नहीं कटेगा। अगर सवाल खाली छोड़ा तो जीरो मिलेगा और गलत जवाब दिया तब भी जीरो ही मिलेगा, तो नुकसान बराबर है। इसका मतलब साफ है एग्जाम हॉल में कोई सवाल खाली मत छोड़िए। जो भी आता है, भरते जाइए। अंदाजे से भी जवाब देंगे तो सही होने के चांस रहेंगे और गलत होने पर भी कुछ नहीं कटेगा। 150 सवाल और 150 मिनट का वक्त है, यानी एक सवाल के लिए औसतन एक मिनट। टाइम मैनेजमेंट यहां गेम-चेंजर साबित हो सकता है।