वेनेजुएला में तबाही वाले भूकंप के बीच चार्ल्स रिक्टर चर्चा में हैं। जानिए आसमान के तारों से रिक्टर स्केल बनाने वाले इस जीनियस की कहानी, जिसने भूकंप मापने का तरीका दिया।
Richter Scale Inventor: दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में दो ताकतवर भूकंप से तबाही मच गई है। बुधवार शाम बैक-टू-बैक दो भयंकर भूकंप आए हैं, जिनकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.2 और 7.5 मापी गई। इस तबाही ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। टीवी से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह सिर्फ एक ही शब्द सुनाई दे रहा है,'रिक्टर स्केल'। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर यह रिक्टर स्केल क्या है? इसे किसने बनाया था? इसका नाम रिक्टर ही क्यों पड़ा? आइए जानते हैं उस जीनियस का नाम, जिसने भूकंप को समझने का तरीका ही बदल दिया था।

चार्ल्स रिक्टर कौन थे?
चार्ल्स फ्रांसिस रिक्टर (Charles Francis Richter) एक अमेरिकी वैज्ञानिक थे। उनका जन्म 26 अप्रैल 1900 को अमेरिका के ओहायो राज्य में हुआ था। बचपन से ही उन्हें साइंस में दिलचस्पी थी। उन्होंने फिजिक्स की पढ़ाई की और बाद में भूकंपों पर रिसर्च शुरू की। उस समय वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह थी कि अलग-अलग भूकंपों की ताकत की तुलना कैसे की जाए। यहीं से चार्ल्स रिक्टर की सबसे बड़ी खोज की शुरुआत हुई।
रिक्टर स्केल क्या है?
आज जब भी किसी भूकंप की खबर आती है तो हम सुनते हैं कि उसकी तीव्रता 5, 6 या 7 रही। यह संख्या बताती है कि भूकंप कितना ताकतवर था। इसी माप सिस्टम को दुनिया रिक्टर स्केल के नाम से जानती है। चार्ल्स रिक्टर ने 1935 में अपने साथी वैज्ञानिक बेनो गुटेनबर्ग के साथ मिलकर यह स्केल तैयार किया था। इसका मकसद था दुनियाभर के भूकंपों को एक समान तरीके से मापना।
तारों से कैसे आया रिक्टर स्केल का आइडिया?
चार्ल्स रिक्टर को खगोल विज्ञान यानी तारों और ग्रहों की दुनिया में भी दिलचस्पी थी। उन्होंने देखा कि खगोल वैज्ञानिक तारों की चमक मापने के लिए मैग्नीट्यूड (Magnitude) शब्द का इस्तेमाल करते हैं। यहीं से उन्हें एक नया आइडिया मिला। उन्होंने सोचा कि अगर तारों की चमक को नंबरों में बताया जा सकता है, तो भूकंप की ताकत को भी एक पैमाने पर रखा जा सकता है। इसी सोच ने आगे चलकर रिक्टर स्केल को बनाया।
रिक्टर स्केल कैसे काम करता है?
बहुत से लोग सोचते हैं कि रिक्टर स्केल किसी थर्मामीटर की तरह सीधी स्केल होती है, लेकिन ऐसा नहीं है। यह एक गणितीय सिस्टम (Mathematical System) है। इसमें हर अगला नंबर पिछले नंबर से कई गुना ज्यादा ताकत दिखाता है। जैसे 5 तीव्रता का भूकंप, 4 तीव्रता वाले भूकंप से 32 गुना ज्यादा ताकतवर होता है। 7 तीव्रता का भूकंप, 6 तीव्रता वाले भूकंप से बहुत ज्यादा ऊर्जा छोड़ता है। यही वजह है कि 7.5 तीव्रता का भूकंप बेहद खतरनाक माना जाता है।
क्या आज भी उसी रिक्टर स्केल का इस्तेमाल होता है?
रिक्टर स्केल ने भूकंप विज्ञान में क्रांति ला दी थी, लेकिन समय के साथ वैज्ञानिकों ने और आधुनिक तरीके से बना लिए हैं। आज बड़े भूकंपों को मापने के लिए मुख्य रूप से 'मोमेंट मैग्नीट्यूड स्केल' का इस्तेमाल किया जाता है। फिर भी आम लोगों के बीच भूकंप की ताकत बताने के लिए 'रिक्टर स्केल' नाम आज भी सबसे ज्यादा पॉपुलर है।
धुन के पक्के और थोड़े अनोखे थे चार्ल्स
ड्राइंग रूम में मशीन
चार्ल्स रिक्टर सिर्फ लैब तक सीमित नहीं थे, वो अपनी धुन के पक्के इंसान थे। उनके बारे में कुछ बातें काफी दिलचस्प थी। चार्ल्स ने अपने घर के लिविंग रूम (बैठक) में ही एक सिस्मोमीटर (भूकंप नापने वाली मशीन) लगा रखी थी। वो रात हो या दिन, हर वक्त भूकंप की खबरों और रीड़िंग्स के लिए तैयार रहते थे।
प्रकृति प्रेमी
चार्ल्स स्वभाव से Naturist थे। वो और उनकी पत्नी प्रकृति के बीच समय बिताना पसंद करते थे और कई नग्न बस्तियों (Nudist Camps) की सफर भी करते थे।
जान बचाने वाले नियम
उन्होंने सिर्फ पैमाना नहीं बनाया, बल्कि सरकार पर दबाव डालकर भूकंप वाले इलाकों में मजबूत बिल्डिंग बनाने के कड़े नियम भी लागू करवाए। उनके नियमों की वजह से 1971 के लॉस एंजिल्स भूकंप में हजारों लोगों की जान बची थी.
1985 में दुनिया को अलविदा कहा
चार्ल्स रिक्टर का निधन 30 सितंबर 1985 को कैलिफोर्निया में हुआ था। लेकिन उनके बनाए सिस्टम आज भी दुनिया भर में भूकंप की चर्चा का हिस्सा है। जब भी कहीं धरती कांपती है और टीवी स्क्रीन पर भूकंप की तीव्रता दिखाई जाती है, तब कहीं न कहीं चार्ल्स रिक्टर का नाम भी याद किया जाता है।


