एक्टर दलपति विजय द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टी पर विवाद, बरेलवी धर्मगुरु ने जारी किया फतवा। पार्टी में शराबियों और जुआरियों को बुलाने पर भड़के मौलाना, मुस्लिम विरोधी बताया।

सुपरस्टार और राजनेता दलपति विजय के खिलाफ फतवा जारी हो गया है। उत्तर प्रदेश के बरेलवी धर्मगुरु, अखिल भारत मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने एक्टर के खिलाफ फतवा जारी किया है। मौलाना ने कहा कि दलपति विजय मुस्लिम विरोधी हैं और तमिलनाडु के मुसलमानों को उनसे दूरी बनानी चाहिए। दरअसल, दलपति विजय ने रमजान के मौके पर इफ्तार पार्टी रखी थी। इस दौरान उन्होंने रोज़ा रखा और रात में खाना खाया। उनकी इफ्तार पार्टी की तस्वीरें वायरल हो गईं। यही धर्मगुरु के गुस्से की वजह बनी।

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लेकिन, इफ्तार पार्टी रखना ही वजह नहीं है, बल्कि रोज़ा इफ्तार के वक्त शराबियों, जुआरियों और समाज विरोधी लोगों को बुलाना असली वजह है। ऐसे लोगों को बुलाना गैरकानूनी और पाप है। फतवे में मौलाना ने तमिलनाडु के मुसलमानों से कहा है कि ऐसे इंसान पर भरोसा ना करें और अपने प्रोग्राम में भी ना बुलाएँ।


विजय ने तमिलग वेट्री कलगम (टीवीके) नाम से एक पार्टी शुरू की है। इसलिए वो समाज से जुड़ने का काम कर रहे हैं। इसीलिए उन्होंने ये पार्टी रखी थी। लेकिन ये उल्टा पड़ गया। फतवे में कहा गया है कि दलपति विजय मुस्लिम विरोधी हैं। इसमें कहा गया है कि एक्टर का बैकग्राउंड और इतिहास भी इस्लाम विरोधी है। बरेलवी मौलाना ने कहा कि विजय फिल्मों से राजनीति में आने के लिए मुस्लिम भावनाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन उनका इतिहास मुस्लिम विरोधी भावनाओं से भरा है।

 इससे पहले विजय ने 'द बीस्ट' फिल्म में काम किया था। वो भी मुस्लिम विरोधी थी। और पूरे मुस्लिम समुदाय को आतंकवाद और उग्रवाद से जोड़ा गया था। इस फिल्म में विजय ने मुसलमानों को बुरा दिखाने की कोशिश की थी, यही गुस्से की वजह है। लेकिन, अब वो राजनीति में आ गए हैं, इसलिए उन्हें मुस्लिम वोट चाहिए, तो अब मुस्लिम तुष्टिकरण कर रहे हैं। धर्मगुरु ने कहा कि उन्होंने इस्लाम और मुसलमानों को निशाना बनाने वाली फिल्में भी की हैं। इफ्तार और रमजान की पवित्रता की अनदेखी की है। इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ काम करने वाले लोगों को इफ्तार में बुलाया गया है। वो रोज़ा नहीं रख रहे थे या इस्लामिक रीति-रिवाजों का पालन नहीं कर रहे थे। इस मामले में तमिलनाडु के सुन्नी मुसलमानों ने उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी।