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'फंसे' और 'छिपे' पर झगड़ने से पहले यह जान लीजिए, क्या सच में वैष्णों देवी में 400 श्रद्धालु जुटे हैं
नई दिल्ली. निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात के जलसे में 2 हजार से ज्यादा लोगों के रुके होने से कोरोना का खतरा बढ़ गया है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर तमाम तरह की बातें हो रही हैं। कुछ का कहना है कि निजामुद्दीन में लोग रुके हैं तो उन्हें कहा जा रहा है कि वह वहां पर "छिपे" हैं, लेकिन वहीं 400 लोग वैष्णों देवी में हैं उन्हें कहा जा रहा है कि वह वहां पर "फंसे" हैं। यानी मुसलमानों के लिए "छिपे" और हिंदुओं के लिए "फंसे" शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में बताते हैं कि आखिर क्या वाकई में वैष्णों देवी में 400 यात्री फंसे हुए हैं।
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वैष्णों देवी में 18 मार्च को ही यात्रा बंद कर दी गई थी - श्राइन बोर्ड के सीईओ रमेश कुमार ने इसका जवाब दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वैष्णों देवी में 400 लोगों के फंसे होने की खबर झूठी है। कटरा या वैष्णों देवी में कोई भी श्रद्धालु नहीं फंसा है। 24 मार्च को लॉकडाउन के पहले ही यात्रा 18 मार्च को बंद कर दी गई थी।
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कहां से शुरु हुआ "फंसे" और "छिपे" का विवाद?- दरअसल, 30 मार्च को खबर आई कि निजामुद्दीन के तब्लीगी जमात का जलसा हुआ था। 1 से 15 मार्च तक हुए जलसे में देश-दुनिया से करीब 5 हजार लोग आए थे, लेकिन कई लोग वापस लौट गए। करीब ढाई हजार लोग लॉकडाउन के दौरान वहां पर रुके थे। इसी दौरान दिल्ली में एक बुजुर्ग की मौत हुई, जो तब्लीगी जमात में शामिल था। जांच में पता चला कि वह कोरोना से मरा है। यहीं से खुलासा हुआ कि तब्लीगी जमात में कोरोना के कई संक्रमित हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर चला कि निजामुद्दीन में कोरोना के कई मरीज छिपे हुए हैं। कुछ लोगों ने छिपे शब्द पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि हिंदु है तो फंसा शब्द और मुस्लिम है तो छिपा शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है।
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मरकज से 2361 लोग निकाले गए- पुलिस के मुताबिक, मरकज को 1 अप्रैल की सुबह लगभग 3:30 बजे तक खाली कराया गया। इस जगह को खाली करने में 5 दिन लगे। दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा, 2361 लोगों को मरकज से निकाला गया, इनमें से 617 को अस्पताल ले जाया गया बाकी को क्वारंटाइन किया गया है। ये 617 वो लोग हैं जिनमें किसी तरह के लक्षण हैं। मनीष सिसोदिया ने कहा, सभी लोगों की लिस्ट बनाकर उनके फोन नंबर लेकर पुलिस को दे दिए गए हैं, पुलिस की साइबर सेल इन सब के नंबरों की जांच करेगी और देखेगी कि ये किस-किस से मिले हैं, किस से मिल रहे हैं।
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निजामुद्दीन मरकज को खाली कराने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत दोवाल ने मोहम्मद साद से मुलाकात की थी। यह मुलाकात 28 मार्च को हुई थी, तबलीगी जमात के प्रमुख मोहम्मद साद को मरकज खाली करने के लिए राजी किया था।
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दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज सभा में हिस्सा लेने के बाद पुंछ जिले में पहुंचे 10 लोगों की पहचान जिला प्रशासन द्वारा की गई है। इन सभी को क्वारंटाइन में रखा गया है।
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बिहार के डीजीपी ने कहा, बिहार के 86 और 57 विदेशी जो दिल्ली के मरकज सभा में शामिल हुए थे, उन सभी पर नजर रखी जा रही है। 48 लोगों को पहले से ही क्वारंटाइन में रखा जा चुका है। 86 बिहार में से कुछ राज्य में नहीं हैं, हम देश के अन्य राज्यों से पता लगा रहे हैं।
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निजामुद्दीन मरकज मामले में 6 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है। इनके नाम मौलाना साद, डॉक्टर जीशान, मुफ्ती शहजाद, एम सैफी, यूनुस और मोहम्मद सलमान है।
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लॉकडाउन का 8 वां दिन- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन करने का ऐलान किया था। 24 मार्च को रात 8 बजे देश को संबोधित करते हुए उन्होंने आधी रात से लॉकडाउन घोषित कर दिया था। आज लॉकडाउन का 8 वां दिन हैं।
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1 अप्रैल दोपहर 3 बजे तक भारत में कोरोना के आंकड़े- भारत में कोरोना के 1730 कोरोना पॉजिटिव मरीज हैं। इसमें 55 की मौत हो चुकी है। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 325, केरला में 241, तमिलनाडु में 124, दिल्ली में 121 और कर्नाटक में 105 केस सामने आए हैं। हिमाचल प्रदेश में 3, पुडुचेरी में 3, झारखंड में 1, मणिपुर में 1 और मिजोरम में सिर्फ 1 केस सामने आए हैं। यह वह 5 राज्य हैं जहां कोरोना के सबसे कम केस सामने आए हैं।
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