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2 दिन पहले दीप सिद्धू-सिधाना आया था दिल्ली, फिर किसानों के साथ...जानें कैसे रची हिंसा की साजिश
नई दिल्ली. गैंगेस्टर से एक्टिविस्ट बने लक्खा सिधाना और अभिनेता दीप सिद्धू...ये दो नाम हैं जो लाल किला पर झंडा लगाने और हिंसा फैलाने में सामने आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन दोनों ने ही किसानों को भड़काया और दिल्ली में ले जाकर हिंसा की। किसान मजदूर संघर्ष समिति के जनरल सचिव सरवन सिंह पंधेर ने कहा, हमारा कार्यक्रम दिल्ली के आउटर रिंग रोड पर था वहां पर जाकर हम लोग वापस आ गए। हमारा न तो लाल किले का कार्यक्रम था, न ही झंडा फहराने का था। जिन लोगों ने ये काम किया हम उनकी निंदा करते हैं। जिसने भी ये काम किया वो दोषी है।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिद्धू और सिधाना दो दिन पहले दिल्ली आए और सिंघु सीमा पर प्रदर्शनकारियों को भड़काऊ भाषण दिया।
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सिद्धू ने 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के सनी देओल के लिए प्रचार किया था। सिधाना केखिलाफ 26 मामले दर्ज हैं।
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भारतीय किसान यूनियन (BKU) हरियाणा इकाई के प्रमुख गुरनाम सिंह चादुनी सहित कई किसान नेताओं ने गणतंत्र दिवस पर पत्थरबाजी की हिंसा से खुद को दूर किया और आरोप लगाया कि दीप सिद्धू ने प्रदर्शनकारियों को उकसाया और उन्हें लाल किले तक ले गए।
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स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने कहा, हिंसा के दौरान दीप सिद्धू लाल किले में मौजूद था। हम शुरू से ही उनके खिलाफ थे। दीप सिद्धू लाल किले में कैसे पहुंचे, इसकी जांच शुरू की जानी चाहिए।
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योगेंद्र यादव ने दावा किया कि उन्होंने ट्रैक्टर रैली से पहले रात को सिद्धू और सिधाना को भीड़ को भड़काने की कोशिश करने के बारे में पुलिस को सूचित किया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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योगेंद्र यादव ने कहा, वह (सिद्धू) भाजपा से जुड़ा हुआ है और सांसद सनी देओल के चुनाव के दौरान कार्यकर्ता था। हमने पुलिस को इस बारे में पहले ही सूचित कर दिया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। उसके बावजूद उसे गिरफ्तार नहीं किया गया।
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कांग्रेस के लोकसभा सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने भी दावा किया कि यह दीप सिद्धू ने लाल किला पर झंडा फहराया था। आरोप यह भी लगा कि सिद्धू प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) का सदस्य है।
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लाल किले की घटना के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में सिद्धू ने हिंदी में बोलते हुए कहा कि निशान साहब और किसान यूनियन के झंडे भावनाओं में आकर लगाए थे। उसने कहा, दीप सिद्धू इतनी भारी भीड़ को कैसे उकसा सकता है।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिद्धू की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं थीं और वह अपनी खुद की पार्टी बनाना चाहता था। किसान आंदोलन के दौरान सिद्धू और सिधाना दोनों बहुत सक्रिय रहे हैं। बाद में किसानों के एक वर्ग ने उन्हें हटा दिया। दोनों कुछ दिनों के लिए विरोध प्रदर्शन से गायब थे।
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बता दें कि दीप सिद्धू ने खुद फेसबुक पर आकर माना कि उसने निशान साहिब का झंडा लगाया, लेकिन भारतीय झंडे को नहीं हटाया। लेकिन विवाद यहीं पर खत्म नहीं होता, दीप सिद्धू पर आरोप है कि वह भाजपा समर्थक है। इस मामले में जब मीडिया के एक चैनल ने उनसे बात की तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वह भाजपा समर्थक नहीं हैं।
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