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Bal Thackeray:अंतिम यात्रा में 20 लाख लोग, ऐसा माहौल कि पुलिस कमिश्नर ने अपनी बेटी का रिसेप्शन रद्द किया था
मुंबई. एक कार्टूनिस्ट। लेकिन कद इतना बड़ा की मराठा शेर कहा गया। नाम था बाला साहेब ठाकरे (Balasaheb Thackeray) । 17 नवंबर 2012 को निधन हुआ (Balasaheb Thackeray Death Anniversary) तो अंतिम यात्रा के दौरान पूरी मुंबई (Mumbai) थम गई गई। लग रहा था मानों पूरी मुंबई बाला साहेब के अंतिम दर्शन करना चाहती हो। सड़कों पर चलने की जगह नहीं मिली तो सीवर और पाइपों के ऊपर से चढ़कर अंतिम संस्कार (Balasaheb Thackeray Funeral) में पहुंच रहे थे। ये बाला साहेब का कद ही था, जो खुद न कभी चुनाव लड़े न ही सरकार में किसी पद पर रहे, लेकिन हमेशा एक किंग मेकर की भूमिका निभाई। लोगों को बता दिया कि आखिर लोग उन्हें मराठा शेर क्यों कहते हैं। बाला साहेब ठाकरे की अंतिम यात्रा की 10 तस्वीरें, जो बताती हैं कि वे मुंबई और पूरे महाराष्ट्र के लिए क्या थे।

बाला साहेब ठाकरे का अंतिम संस्कार शिवाजी पार्क में हुआ था। तब मुंबई पुलिस की तरफ से उन्हें 21 तोपों की सलामी दी गई थी। राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अंतिम संस्कार में करीब 20 लाख लोग शामिल हुए थे।
अंतिम संस्कार में शामिल होने वालों की संख्या इतनी ज्यादा था कि सड़कों पर चलने के लिए जगह तक नहीं बची थी। इसलिए लोग गलियों या फिर बड़ी पाउपों के ऊपर चढ़कर शिवाजी पार्क पहुंच रहे थे।
लाखों लोगों की मौजूदगी में उद्धव ठाकरे ने बाला साहेब ठाकरे की चिता को मुखाग्नि दी थी। इस दौरान उनके चचेरे भाई राज ठाकरे भी वहां मौजूद थे। शिवाजी पार्क में करीब 20 हजार लोग मौजूद थे। कुछ पार्क के अंदर तो कुछ बाहर। कई लोग घरों की छतों से चढ़कर बाला साहेब को अंतिम विदाई दे रहे थे।
बाला साहेब ठाकरे की अंतिम यात्रा में मुंबई की तमाम बड़ी हस्तियां चाहें वे राजनीति से जुड़े हो, बॉलीवुड से हो या फिर बड़े बिजनेसमैन हो, सभी मौजूद थे। तस्वीर में संजय दत्त दिखाई दे रहे हैं।
अंतिम संस्कार में भीड़ को संभालने के लिए 20 हजार से अधिक पुलिसकर्मी, राज्य रिजर्व पुलिस बल की 15 कंपनियां और रैपिड एक्शन पोर्स की तीन टुकड़ियों को तैनात किया गया था।
बाला साहेब के निधन के बाद मुंबई पुलिस पर व्यवस्था को संभाले रखने का ऐसा दबाव था कि तब मुंबई पुलिस कमिश्नर रहे सत्यपाल सिंह ने अपनी बेटी की शादी का रिसेप्शन भी रद्द कर दिया था। एक लाख से अधिक ऑटोरिक्शा और करीब 60,000 काली और पीली टैक्सियां भी सड़कों से गायब थीं।
बाला साहेब के निधन पर मुंबई को लगभग बंद कर दिया गया था। बड़े-बड़े मॉल से लेकर छोटी चाय की दुकाने तक बंद थीं। यहां तक कि पान बीड़ी की दुकानों पर भी तालें लटक रहे थें। उनकी शव यात्रा के दौरान लौट आओ- लौट आओ बाला साहेब लौट आओ के नारे लग रहे थे।
अंतिम यात्रा के दौरान शरद पवार, नितिन गडकरी, लालकृष्ण आडवाणी, शिवराज सिंह चौहान सहित कई बड़े नेता मौजूद थे। बता दें कि बाला साहेब की अंतिम यात्रा मातोश्री से शुरू हुई थी। उस वक्त उनके बेटे उद्धव ठाकरे फूट फूटकर रोए थे।
मातोश्री से निकली अंतिम यात्रा शिवाजी पार्क तक जानी थी। दोनों के बीच करीब दस किलोमीटर की दूसरी है, लेकिन शव यात्रा को करीब 8 घंटे का समय लगा था। इस दौरान शव यात्रा कुछ वक्त तक शिवसेना भवन में भी रुकी थी।
अंतिम संस्कार करने से पहले स्टेज पर लाला तिलक और बाला साहेब का ट्रेडमार्क काला चश्मा रखा गया था। इस दौरान ठाकरे का सबसे प्रिय नौकर विजय थापा, उद्धव और राज वहां खड़े थे।
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