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Uphaar कांड में ऐसा क्या था, जो लोगों ने कहा- बॉर्डर फिल्म में मारधाड़ के सीन नहीं होते तो शायद जान बच जाती
नई दिल्ली. उपहार कांड (Uphaar Case 1997) में सबूतों से छेड़छाड़ करने के आरोप में सुशील और गोपाल अंसल (Sushil and Gopal Ansal) को 7 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा 2.5-2.5 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है। 13 जून 1997 को दिल्ली के उपहार सिनेमा में हादसा हुआ था। उस वक्त सिनेमा हाल में बॉर्डर (Border) फिल्म चल रही थी। इसी दौरान आग लगी और 59 लोग जिंदा जल गए। उपहार कांड में कई परिवार उजड़ गए। जो लोग बच्चों को साथ फिल्म एन्जॉय करने गए थे। छुट्टी का मजा लेने गए थे। उनका परिवार खत्म हो गया। पीड़ित परिवारों पर कई कहानियां सामने आई हैं। कांड के पीड़ितों में एक परिवार नीलम कृष्णमूर्ति का था। वह दिन था जब मेरी पूरी दुनिया ही तबाह हो गई....

दोपहर के वक्त चल रही थी बॉर्डर फिल्म
दिल्ली के उपहार सिनेमा हॉल में दोपहर के वक्त बॉर्डर फिल्म चल रही थी। इसी दौरान वहां मौजूद ट्रांसफॉर्मर रूम में आग लग गई। लपटें तेजी से फैलने लगीं। हालांकि दर्शकों को कुछ देर तक इसकी जानकारी नहीं हुई। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि बॉर्डर मूवी में धमाके की आवाजों में आग की आवाज छिप गई। लेकिन कुछ ही देर में आग की लपटें हॉल के अंदर तक पहुंच गईं।
चारों तरफ से हॉल बंद था, लोग भाग नहीं पाए
हॉल चारों तरफ से बंद था। ऐसे में लोग भाग नहीं सके। कुछ लोग जिंदा जल गए तो कुछ भगदड़ में दब गए। कुल 59 लोगों की मौत हो गई और 103 लोग बुरी तरह से जख्मी हो गए। साल 2003 में पीड़ित के परिवारों को 25 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया गया। सिनेमाघर के मालिक सुशील गोपाल अंसल और 16 अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ।
पूरा कमरा स्ट्रेचर से भरा था, लाशे बिछी थीं
BBC हिंदी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के रहने वाले नीलम कृष्णमूर्ति के परिवार को फिल्म देखने का बहुत शौक था। वह भी उस दिन बॉर्डर फिल्म देखने के लिए गए थे। साथ में 17 साल और 13 साल के दो बच्चे थे। नीलम बताती हैं कि आखिरी बार उन्होंने अपने पति की बनाई चिकन करी खाई। जाने से पहले पति ने उनके गाल को चूमा था। करीब 4.55 बजे उपहार सिनेमा हॉल की पार्किंग में आग लग गई।
जान बचाने के लिए खिड़कियों से कूदे लोग
जो लोग ऊपर की मंजिल में थे वो खिड़कियों से बाहर कूदने लगे। इमरजेंसी की गाड़ियां ग्रीन पार्क में जाम में फंस गईं। हादसे की खबर मिलने के बाद नीलम एम्स हॉस्पिटल पहुंची। पूरा कमरा स्ट्रेचर से भरा पड़ा था। इन स्ट्रेचर के बीच उन्होंने अपने पति और बेटे के शव को पहचाना। वह दिन था। जब हमारी दुनिया खत्म हो गई।
उपहार कांड में केस चला और 17 अप्रैल 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने अंसल बंदुओं, पीड़ितों व सीबीआई की याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। फिर 5 मार्च 2014 को अंसल बंधुओं की सजा को बरकरार रखा गया।
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