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Lakhimpur: जेल में कैसी बीती मंत्री के बेटे आशीष की पहली रात, क्या खाया-पिया..कहां गया 'शहजादे' का रुतबा
लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश). 3 अक्टूबर को किसानों लखीमपुर खीरी हिंसा मामले (Lakhimpur kheri Violence) में मुख्य आरोपी बनाए गए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा टेनी (union minister ajay mishra का बेटा आशीष मिश्रा (Ashish Mishra) को शनिवार देर रात पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। कभी आशीष का रुतबा किसी विधायक या बड़े नेता स कम नहीं था। लेकिन अब जले की हवा खानी पड़ेगी। आइए जानते हैं कैसी बीती मंत्री के बेटे की पहली रात

मीडिया में चल रहीं खबरों के मुताबिक, मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा का जेल की बैरक में पूरी रात नींद नहीं आई। वह सारी रात दाएं और बांए करवटें बदलते रहे, लेकिन आंख नहीं लगी। बताया जाता है कि मच्छर, गर्मी और उमस से आशीष का बरा हाल रहा।
जानकारी के अनुसार आशीष ने शनिवार रात को खाना भी नहीं खाया। संडे सुबह जब जेल पहरी उनके पास चाय-नास्ता लेकर पहुंचा तो आशीष ने सिर्फ एक कप चाय और एक पाव खाया। मंत्री के बेटे ने शायद ही कभी सपने में सोचा होगा कि उनको भी जेल जाना पड़ सकता है। क्योंकि उनके पिता अजय कुमार मिश्रा टेनी केंद्र में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जो बन गए हैं। लेकिन कानून से ऊपर कोई नहीं होता। वह लखीमपुर हिंसा में मुख्य आरोपी बनाए गए और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
कोर्ट ने आशीष मिश्रा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। हालांकि 11 अक्टूबर यानि सोमवार को कोर्ट में फिर आशीष पेश किया जाएगा। इसके बाद पता चलेगा की वह जेल जाते हैं या फिर बाहर आते हैं।
बता दें कि आशीष मिश्रा केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र टेनी के छोटे बेटे हैं। हालांकि उनको इलाके के लोग मोनू कहकर भी पुकारते हैं। वह पैतृक संपत्ति में पेट्रोल पंप और राइस मिल जैसे कई बिजनस को देखते हैं। साथ ही पिता के साथ राजनीति में भी एक्टिव रहते हैं। साल 2012 में पिता को लखीमपुर खीरी की निघासन सीट से विधायकी का टिकट मिलने के साथ ही वह राजनीति में ऐक्टिव हो गए थे। तभी से लेकर केंद्रीय मंत्री बनने तक पिता का पूरा चुनावी प्रचार-प्रसार आशीष मिश्रा ने संभालते हैं।
बता दें कि पिता के साथ-साथ बेटे की भी लोकप्रियता बढ़ती गई और उन्होंने भी चुनाव लड़के का मन बनाया। इसके लिए पिता अजय मिश्रा ने 2017 विधानसभा चुनाव में आशीष के लिए विधायक का टिकट मांगा, लेकिन बात नहीं बन पाई। इसके बाद भी वह पिता की विधानसभा सीट निघासन में लगातार सक्रिय रहे। उनको लगता था कि साल 2022 के चुनाव में उनको टिकट मिल जाएगा। लेकिन उससे पहले ही यह विवाद हो गया।
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