How to Relieve Constipation: कब्ज (Constipation) होना, जो अक्सर हर किसी को हो जाती है। अधिकतर लोग समझते हैं कि पेट साफ नहीं होने की वजह से कब्ज होती है। लेकिन ऐसा नहीं है, इसके पीछे और भी कई कारण होते हैं। तो आइए जानते हैं क्या होती कब्ज और इसे कैसे ठीक करें।

कब्ज (Constipation) सिर्फ पेट साफ ना होने की प्रॉब्लम नहीं है। यह हमारी डाइजेस्टिव सिस्टम (पाचन क्रिया) का अलार्म है कि बॉडी में कुछ गड़बड़ हो रही है। कई बार कम पानी पीने, फाइबर की कमी या लंबे समय तक बैठे रहने की वजह से यह समस्या होती है। कई बार किसी बीमारी या दवा का असर से भी यह दिक्कत होती है। ज्यादातर मामलों में सही खानपान और अच्छी लाइफ स्टाइल करके कब्ज से बचा जा सकता है।

कब्ज क्या होती है?

हर इंसान की मल त्याग (Bowel Movement) की हैबिट अलग होती है। कोई दिन में एक बार टॉयलेट जाता है, तो कोई एक दिन छोड़कर। इसलिए हर दिन शौच न जाना अक्सर कब्ज नहीं कहलाता। डॉक्टरों के अनुसार, अगर सप्ताह में 3 बार से कम मल त्याग हो, या शौच के समय बहुत जोर लगाना पड़े, मल बहुत सख्त हो या पेट पूरी तरह साफ न हो तो यह कब्ज का संकेत है।

कब्ज क्यों होती है?

1. फाइबर की कमी

फाइबर मल को नरम और भारी बनाता है, जिससे वह आसानी से बाहर निकलता है। अगर भोजन में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालें कम हों, तो कब्ज का खतरा बढ़ता है।

2. कम पानी पीना

पानी की कमी से बॉडी मल से भी पानी खींच लेता है। इससे मल सूखकर सख्त हो जाता है और उसे बाहर निकालना मुश्किल होता है।

3. लंबे समय तक बैठे रहना

जो लोग पूरे दिन ऑफिस में बैठकर काम करते हैं या बहुत कम फिजिकिल एक्टिविटी करते हैं, उनमें आंतों की गति (Bowel Movement) स्लो पड़ जाती है।

4. टॉयलेट की इच्छा को रोकना

अगर बार-बार टॉयलेट आने की इच्छा को नजरअंदाज किया जाए, तो धीरे-धीरे बॉडी का नेचुरल रिफ्लेक्स वीक हो जाता है और कब्ज की समस्या बढ़ जाती है।

5. कुछ दवाएं और बीमारियां

आयरन सप्लीमेंट, कुछ दर्द निवारक दवाएं, एंटीडिप्रेसेंट, थायरॉयड की बीमारी, डायबिटीज, पार्किंसन रोग और इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) जैसी कंडीशन भी कब्ज का कारण बनती हैं।

कब्ज के सामान्य लक्षण

- सप्ताह में 3 बार से कम टॉयलेट जाना - मल का बहुत सख्त या सूखा होना - टॉयलेट के समय जोर लगाना - पेट फूलना या भारीपन - पेट पूरी तरह साफ न होने का एहसास - गैस और पेट में असहजता

कब्ज से बचने के आसान तरीके

- फाइबर बढ़ाएं। रोजाना मौसमी फल, हरी सब्जियां, सलाद, दालें, ओट्स और साबुत अनाज खाएं। - दिनभर ज्यादा से ज्या पानी पिएं। गर्म मौसम या ज्यादा पसीना आने पर पानी की जरूरत और बढ़ जाती है। - रोज थोड़ा चलें। हर दिन कम से कम 30 मिनट की वॉक या हल्की एक्सरसाइज आंतों की स्पीड बेहतर बनाने में मदद करती है। - टॉयलेट की आदत बनाएं। हर दिन एक तय समय पर शौच जाने की कोशिश करें और इच्छा को कभी न रोकें। - बिना सलाह के बार-बार लैक्सेटिव न लें। बार-बार कब्ज की दवा लेने से आंतें उस पर डिपेंड हो सकती हैं। इसलिए लंबे समय तक ऐसी दवाओं का यूज करने से बचें।

कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?

अगर कब्ज कई हफ्तों तक बनी रहे, मल में खून आए, अचानक वजन कम होने लगे, तेज पेट दर्द हो या उम्र 50 साल से ज्यादा होने पर नई कब्ज शुरू हो जाए, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है।

कॉन्टेन्ट सोर्सः WHO, National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK), American College of Gastroenterology (ACG), Mayo Clinic, Cleveland Clinic, National Health Service (NHS), UK.