16 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्राइबल क्राफ्ट फेयर यानी आदि मोहत्सव का उद्घाटन किया। महोत्सव में आदिवासी समाज के द्वारा बनाई गई कई चीजों को रखा गया है। इसमें जो आकर्षण का केंद्र है वो चींटी की बनी चटनी है।

फूड डेस्क. आदि महोत्सव की शुरुआत हो चुकी है। 17 फरवरी से 27 फरवरी तक चलने वाले महोत्सव में आदिवासियों के बनाए गए चीजों को रखा गया है। 200 से ज्यादा आदिवासी स्टॉल लगाए गये हैं। जहां पर उनकी संस्कृति से जुड़ी चीजों को देखने का मौका लोगों को मिल रहा है। घर को सजाने के सामान से लेकर टेस्टी फूड तक के स्टॉल लगे हुए हैं। महोत्सव में छत्तीसगढ़ के बस्तर के आदिवासी द्वारा बनाकर बेची जा रही चींटी की चटनी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

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100 रुपए कप मिल रही है चींटी की चटनी

चींटी की चटनी का लोग खूब लुफ्त उठा रहे हैं। एक कप चटनी की कीमत 100 रुपए है। लोग इस कीमत पर भी चटनी ना सिर्फ खरीद रहे हैं, बल्कि मजे से इसे खा भी रहे हैं। कई आदिवासी समुदाय में चींटी की चटनी बनाया जाता है। बस्तर के आदिवासी समाज का तो यह पारंपरिक व्यंजन हैं। इसे लाल चींटी से बनाया जाता है। खाने में इसका स्वाद खट्टा लगता है। आइए बताते हैं कैसे चींटी की चटनी बनाई जाती है।

चींटी की चटनी कैसे बनाई जाती है

बस्तर में आदिवासी समुदाय के लोग जंगल जाते हैं और वहां से लाल चीटिंयों और उसके अंडे को जार में बंद करके लेकर आते हैं। फिर इसे अच्छे से साफ करके पीसा जाता है। इस पेस्ट में नमक, मिर्च, हल्दी, धनिया पत्ता मिलकर चटनी तैयार की जाती है। चींटी में फॉर्मिक एसिड होने के कारण चटनी चटपटी लगती है। लोग इसे रोटी या चावल के साथ खाते हैं।

चींटी की चटनी खाने के फायदे

चींटी की चटनी में फार्मिक एसिड पाया जाता है जो पेट को ठीक रखता है।

चींटी की चटनी में प्रोटीन, कैल्शियम और जिंक पाया जाता है। जो इम्युन सिस्टम को मजबूत करता है।

चींटी की चटनी खाने से बुखार कम होता है।

चींटी की चटनी मलेरिया और पीलिया में काफी फायदेमंद होते हैं।

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