चीन में एक तीन महीने के बच्चे को उसके माता-पिता ने मिल्क पाउडर सब्जी के जूस में मिलाकर पिला दिया। उन्हें लगा कि यह ज़्यादा पौष्टिक होगा, लेकिन बच्चे को गंभीर नाइट्रेट पॉइज़निंग हो गई और उसकी जान खतरे में पड़ गई। जानिए बच्चों को फॉर्मूला मिल्क देते समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।
चीन से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां माता-पिता की एक गलती की वजह से तीन महीने के बच्चे की जान पर बन आई। उन्होंने बच्चे को दूध पिलाने के लिए मिल्क पाउडर को पानी की जगह सब्जी के जूस में मिला दिया, जिसके बाद बच्चे को गंभीर पॉइज़निंग हो गई।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे की हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे ICU में भर्ती कराना पड़ा। यह घटना दक्षिणी ग्वांगडोंग प्रांत के ज़ोंगशान महिला और बाल अस्पताल की है। माता-पिता ने बताया कि दूध पीने के तुरंत बाद बच्चे के होंठ नीले पड़ गए और उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी। उन्होंने माना कि उन्होंने ऐसा यह सोचकर किया था कि सादे पानी के बजाय सब्जी के जूस में दूध मिलाकर देने से बच्चे को ज़्यादा पोषण मिलेगा।
वजह बनी 'नाइट्रेट पॉइज़निंग'
डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि बच्चे को 'नाइट्राइट' पॉइज़निंग हुई है। करीब दो दिन तक ICU में इलाज के बाद जून के मध्य में बच्चे को अस्पताल से छुट्टी मिली। डॉक्टरों ने साफ किया कि सब्जियों को बहुत देर तक उबालकर बनाए गए जूस में भारी मात्रा में नाइट्राइट होता है। इस जूस में मिल्क पाउडर मिलाकर पिलाना बच्चों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक है।
तीन महीने के बच्चे का पाचन तंत्र और किडनी पूरी तरह से विकसित नहीं होते हैं। इसलिए, उनका शरीर नाइट्रेट की ज़्यादा मात्रा को झेल नहीं पाता। जब नाइट्राइट खून में मिलता है, तो यह शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने की खून की क्षमता को खत्म कर देता है। इसी वजह से बच्चे के होंठ, नाखून और त्वचा नीले या बैंगनी रंग के पड़ जाते हैं।
माता-पिता इन बातों का रखें ध्यान
- बच्चों के लिए फॉर्मूला मिल्क यानी मिल्क पाउडर हमेशा हल्के गुनगुने पानी में ही मिलाएं।
- पानी की जगह सब्जी का जूस, चावल का पानी (माड़), फलों का जूस या कोई और सूप बिल्कुल इस्तेमाल न करें।
- अगर बच्चे में नाइट्राइट पॉइज़निंग के लक्षण दिखें, तो तुरंत उसे अस्पताल ले जाएं। कुछ मिनट की देरी भी बच्चे की जान के लिए खतरा बन सकती है।
- अपनी समझ या सोशल मीडिया ट्रेंड्स को देखकर बच्चों की परवरिश करने की कोशिश न करें। यह ज़रूरी नहीं कि हर प्राकृतिक चीज़ छोटे बच्चों के लिए फायदेमंद हो।
चीन में पहले भी इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं। पिछले साल, हेनान प्रांत में 52 दिन के एक बच्चे को बोटुलिज़्म (Botulism) होने पर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। इसकी वजह यह थी कि बच्चे की दादी ने उसे पिलाने वाले पानी में शहद मिला दिया था।
