जानें अंतरिक्ष में एस्ट्रोनॉट्स की हेल्थ को कैसे मॉनिटर और मेंटेन किया जाता है। दिल की सेहत, मसल्स फिटनेस, तनाव प्रबंधन, और मेडिकल इमरजेंसी से जुड़े उपायों की विस्तृत जानकारी।

हेल्थ डेस्क: पृथ्वी और स्पेस का वातावरण बिल्कुल अलग होता है। ऐसे में एस्ट्रोनॉट्स के लिए स्पेस में जाना चुनौतियों से भरा होता है। लोगों के मन में एस्ट्रोनॉट के हेल्थ को लेकर बहुत सारे सवाल आते हैं। आईए जानते हैं आखिर कैसे एस्ट्रोनॉट्स स्पेस में स्वस्थ रहते हैं।

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सेंसर से पता चलता है दिल का हाल

कनेडियन स्पेस एजेंसी के स्पेस हेल्थ इंवेस्टिगेटर के हिसाब से बायो मॉनिटर सेंसर की मदद से एस्ट्रोनास्ट के पल्स रेट, ब्लड प्रेशर और ब्रीथिंग रेट की जानकारी मिलती है। माइक्रोग्रैविटी में कार्डियोवैस्कुलर डीकंडीशनिंग का पता लगाने के लिए ये तरीका अपनाया जाता है। इसी से भविष्य में भी एस्ट्रोनॉस्ट्स की हेल्थ कंडीशन की जानकारी मिलती है। रिपोर्ट की जानकारी की मानें तो ऐसी तकनीके पृथ्वी में भी इस्तेमाल हो सकती हैं और दिल का हाल बताने में मदद कर सकती हैं

मायोटोन्स से मसल्स फिटनेस की जानकारी

कॉम्पैक्ट मायोटोन्स की मदद से अंतरिक्ष में एस्ट्रोनाट्स की मसल्स की अकड़न मापने का काम किया जाता है। साथ मसल्स लॉस के बारे में भी पता चल जाता है। लॉन्ग ड्यूरेशन के मिशन में जब एस्ट्रोनॉस्ट्स को कोई दिक्कत होती है तो उसी के हिसाब से ट्रीटमेंट उपलब्ध कराया जाता है। रेजिस्टेंट एक्सरसाइज इक्विपमेंट, ट्रेडमिल, एर्गोमीटर, वैक्यूम सिलेंडर आदि की मदद से एस्ट्रोनॉस्ट एक्सरसाइज करते हैं और मसल्स हेल्थ बेहतर बनाते हैं।

एस्ट्रोनॉट्स का स्ट्रेस लेवल

लंबे मिशन पर जाने पर एस्ट्रोनॉट्स को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसमें तनाव से लेकर नींद और व्यवहार में परिवर्तन शामिल है। ISS पर की गए स्टडी से पता चलता है कि 6 महीने या उससे अधिक के समय के लिए मिशन पर जाने वाले एस्ट्रोनॉट्स में तनाव देखने को मिलता है। साथ ही मेमोरी पर भी प्रभाव पड़ता है। स्टैंडर्ड मेजर प्रोग्राम के तहत इन प्रभावों को स्थिर किया जाता है।एस्ट्रोनॉट्स के लिए नियमित रूप से साइकोलॉजिकल सेशंस होते हैं जो उनके तनाव को कम करने में मदद करते हैं।

एस्ट्रोनॉस्ट को दी जाती है मेडिकल ट्रेनिंग

एस्ट्रोनॉट्स को किसी भी मेडिकल इमरजेंसी में दिक्कत ना हो, इसके लिए पहले से ट्रेनिंग दी जाती है। उन्हें प्राथमिक उपचार के साथ ही मेडिकल किट भी दी जाती है ताकि जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके। वहीं जब स्थिति बहुत सीरियस होती है तो एस्ट्रोनॉट्स को पृथ्वी पर लाने की योजना भी बनाई जाती है।

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