AI Diabetes Detection: वैज्ञानिकों ने एक ऐसा AI मॉडल बनाया है जो सिर्फ 20 सेकंड की आवाज सुनकर टाइप-2 डायबिटीज का खतरा भांप लेता है। हजारों आवाजों पर ट्रेन की गई यह तकनीक शुरुआती जांच में बहुत काम आ सकती है। हालांकि, यह ब्लड टेस्ट का विकल्प नहीं है और इस पर अभी और रिसर्च होनी है।

Type 2 Diabetes Voice Test: शुगर या डायबिटीज का पता लगाने के लिए हम आमतौर पर ब्लड टेस्ट करवाते हैं। लेकिन सोचिए, अगर आपकी सिर्फ 20 सेकंड की आवाज रिकॉर्ड करके शुरुआती जांच हो जाए तो? एक नए AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) मॉडल ने इस बात को सच कर दिखाया है।

रिसर्चर्स ने एक ऐसा AI सिस्टम तैयार किया है जो आपकी 20 सेकंड की आवाज का एनालिसिस करके टाइप-2 डायबिटीज के लक्षणों को पहचान लेता है। बोलते समय आपकी आवाज का भारीपन, सांसों का उतार-चढ़ाव और आवाज कंट्रोल करने के तरीके में होने वाले बारीक बदलावों को यह AI तुरंत पकड़ लेता है।

हजारों लोगों की आवाज पर हुई ट्रेनिंग

इस AI मॉडल को 21,129 लोगों की 63,283 वॉयस सैंपल्स (आवाज के नमूनों) पर ट्रेन किया गया है। इसके बाद, ब्रिटेन के 7,319 वयस्कों की आवाज पर इसका अलग से टेस्ट भी किया गया।

टेस्ट के दौरान कुछ लोगों ने लिखा हुआ टेक्स्ट पढ़ा, तो कुछ ने अपनी मर्जी से बात की। इसके बाद AI के नतीजों को डायबिटीज से जुड़े हेल्थ डेटा के साथ मैच किया गया।

ब्लड टेस्ट के नतीजों से भी हुआ मिलान

रिसर्चर्स ने 801 लोगों के ग्रुप के HbA1c ब्लड टेस्ट के नतीजों को भी चेक किया। आपको बता दें कि यह टेस्ट पिछले कुछ महीनों के औसत ब्लड शुगर लेवल की जानकारी देता है।

आवाज पर आधारित इस मॉडल ने डायबिटीज का खतरा पहचानने में अच्छी खासी क्षमता दिखाई है। हालांकि, यह ब्लड टेस्ट की जगह नहीं ले सकता। एक तय लिमिट में HbA1c लेवल वाले करीब 82% लोगों की इसने सही पहचान की, लेकिन इसमें 'फॉल्स पॉजिटिव' (गलत तरीके से बीमारी बताना) नतीजों की संख्या भी काफी ज्यादा थी।

ब्लड टेस्ट से पहले का 'पहला कदम'?

इस तकनीक का मकसद यह बताना बिल्कुल नहीं है कि आपको अभी डायबिटीज है। बल्कि, रिसर्चर्स इसे मोबाइल पर 20 सेकंड की आवाज रिकॉर्ड करके खतरे का अलर्ट देने वाले एक शुरुआती टूल (प्राइमरी स्क्रीनिंग) के रूप में देख रहे हैं।

अगर AI का रिजल्ट पॉजिटिव आता है, तो उस व्यक्ति को तुरंत ब्लड टेस्ट करवाने की सलाह दी जा सकती है। इससे उन लोगों को बहुत फायदा होगा जिनकी पहुंच रेगुलर मेडिकल चेकअप तक आसानी से नहीं होती।

अभी और रिसर्च की है जरूरत

यह तकनीक अभी अपने शुरुआती दौर में है। रिसर्चर्स ने देखा है कि कुछ खास हेल्थ कंडीशन में इसका परफॉर्मेंस थोड़ा कम हो जाता है। इसलिए अलग-अलग आबादी और स्वास्थ्य स्थितियों में इसकी और टेस्टिंग होना बाकी है।

सबसे अहम बात यह है कि यह रिसर्च अभी 'medRxiv' पर प्रीप्रिंट के तौर पर पब्लिश हुई है और इसका 'पीयर रिव्यू' (एक्सपर्ट्स द्वारा जांच) पूरा नहीं हुआ है। इसलिए, 20 सेकंड की वॉयस रिकॉर्डिंग को अभी डायबिटीज का पक्का टेस्ट नहीं माना जा सकता।

क्या भविष्य में बदल जाएगा डायबिटीज स्क्रीनिंग का तरीका?

अगर यह रिसर्च आगे चलकर पूरी तरह से कामयाब और प्रमाणित हो जाती है, तो स्मार्टफोन के जरिए घर बैठे बीमारियों का शुरुआती खतरा पहचानने का एक नया रास्ता खुल जाएगा। लेकिन फिलहाल, इसे ब्लड टेस्ट के विकल्प के तौर पर नहीं, बल्कि यह बताने वाले एक टूल के रूप में देखा जा रहा है कि आपको ब्लड टेस्ट की जरूरत है या नहीं।