एक नई स्टडी के अनुसार, कीटनाशकों के लगातार संपर्क से कैंसर का खतरा 150% तक बढ़ सकता है। 'नेचर हेल्थ' में प्रकाशित यह शोध 31 कीटनाशकों के संयुक्त प्रभाव को दिखाता है। अधिक उपयोग वाले क्षेत्रों में कैंसर के मामले काफी ज़्यादा पाए गए।
नई दिल्लीः कीटनाशकों (Pesticides) के लगातार संपर्क में रहना कैंसर के खतरे को 150 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है। एक नई स्टडी में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है. यह स्टडी बताती है कि हमारे खाने, पानी और हवा के ज़रिए रोज़ाना कीटनाशकों के संपर्क में आने से कैंसर का खतरा जुड़ा हुआ है।
यह स्टडी कीटनाशकों के लंबे समय तक इस्तेमाल से सेहत पर पड़ने वाले असर को लेकर नई चिंताएं पैदा करती है. 'नेचर हेल्थ' जर्नल में छपी इस रिसर्च के मुताबिक, जिन इलाकों में कीटनाशकों का ज़्यादा इस्तेमाल होता है, वहां रहने वाले लोगों में कुछ खास तरह के कैंसर होने का खतरा 150% तक ज़्यादा होता है।
कीटनाशक हमारे खाने, पानी और हवा में पाए जाते हैं और रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुके हैं. हालांकि, इससे पहले हुई ज़्यादातर रिसर्च में सिर्फ एक-एक केमिकल की जांच की गई थी।
लेकिन इस स्टडी में एक अलग तरीका अपनाया गया. इसमें यह देखा गया कि कई कीटनाशक एक साथ मिलकर कैसे असर डालते हैं, जो असल ज़िंदगी के हालात को ज़्यादा सटीक तरीके से दिखाता है. वैज्ञानिकों ने देश भर में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले 31 कीटनाशकों का विश्लेषण किया. इनमें से किसी को भी फिलहाल विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कैंसर पैदा करने वाले पदार्थ (carcinogenic) के तौर पर क्लासीफाई नहीं किया है।
रिसर्च टीम ने एडवांस्ड मॉडलिंग का इस्तेमाल करके 2014 से 2019 के बीच इन केमिकल्स के फैलाव को ट्रैक किया. इसके बाद, उन्होंने इस डेटा की तुलना 2007 से 2020 के बीच 1,50,000 से ज़्यादा कैंसर मरीज़ों के हेल्थ रिकॉर्ड से की. नतीजों से साफ पता चलता है कि जिन इलाकों में कीटनाशकों का इस्तेमाल ज़्यादा था, वहां कैंसर के मामले भी काफी ज़्यादा थे।
इस स्टडी की सबसे चिंताजनक बातों में से एक यह है कि कीटनाशकों का असर कितनी जल्दी शुरू हो सकता है. रिसर्चर्स ने पाया कि ये केमिकल्स कैंसर बनने से बहुत पहले ही शरीर की सामान्य कोशिकाओं की प्रक्रिया में रुकावट डाल सकते हैं. स्टडी का कहना है कि असल हालातों में कीटनाशकों का इस्तेमाल कैंसर के खतरे को काफी हद तक बढ़ा सकता है।
