Chhattishgarh High court Verdict: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फैसला दिया है कि बिना उचित कारण पति का घर छोड़ने वाली पत्नी को मेंटेनेंस का हक नहीं मिलेगा। कोर्ट ने कहा कि धारा 125 CrPC के तहत भरण-पोषण का अधिकार आचरण और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। 

High Court Maintenance Verdict: महिलाओं के लिए कानून में कई सारे प्रावधान बनाए गए हैं। लेकिन कुछ महिलाएं इसका बेजा इस्तेमाल भी कर लेती हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इसी पर एक केस में लगाम लगाया है। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर पत्नी बिना कारण पति से अलग रहती है, तो भरण-पोषण (मेंटेनेंस) की हकदार नहीं होगी। अदालत ने साफ किया कि सिर्फ वैवाहिक संबंध होना ही भरण-पोषण का आधार नहीं है, बल्कि दोनों पक्षों के आचरण (conduct) को भी अहम माना जाएगा।

CrPC धारा 125 के तहत पत्नी ने मांगा था गुजारा-भत्ता

यह मामला एक महिला से जुड़ा था, जिसने शादी के महज 4 दिन बाद ही ससुराल छोड़ दिया। जबकि पति ऐसा नहीं चाहता था। उसने कोर्ट में दांपत्य अधिकारों की बहाली (Restitution of Conjugal Rights) के लिए याचिका दायर की थी, ताकि उसकी पत्नी उसके पास आ जाए। लेकिन महिला वापस नहीं लौटी। घर छोड़ने के वक्त उसने पति और ससुराल वालों पर दहेज प्रताड़ना, मानसिक और शारीरिक शोषण के आरोप लगाए थे। उसका कहना था कि ससुराल पक्ष ने कार और 10 लाख रुपये की मांग की थी। इसके बाद महिला ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की मांग की।

बिना कारण ससुराल छोड़ना उचित नहीं

बिलासपुर की फैमिली कोर्ट ने महिला की याचिका को खारिज कर दी थी। कोर्ट ने इस बात पर ध्यान दिया कि पति चाहता था कि वो शादी निभाए। इसी वजह से उसने दांपत्य अधिकारों की बहाली के लिए याचिका दायर की थी। केस खारिज होने पर महिला हाईकोर्ट पहुंची। लेकिन यहां भी उसकी मांग को कोर्ट ने नहीं माना। हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि पत्नी के अलग रहने के पीछे कोई ठोस सबूत या उचित कारण सामने नहीं आया।

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पति ने बुलाया पत्नी नहीं आई, तो भरण-पोषण का कैसा दावा ?

हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि अगर पत्नी बिना वाजिब कारण ससुराल छोड़ती है और पति द्वारा किए गए कानूनी प्रयासों के बावजूद वापस लौटने से इनकार करती है, तो वह भरण-पोषणका दावा नहीं कर सकती। अदालत ने यह भी कहा कि CrPC की धारा 125 ऐसे मामलों में भरण-पोषण पर स्पष्ट रूप से रोक लगाती है, जहां पत्नी बिना उचित कारण अलग रह रही हो।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला इस सिद्धांत को मजबूत करता है कि भरण-पोषण कानून का उद्देश्य वास्तविक उत्पीड़न, परित्याग और क्रूरता के मामलों में महिलाओं की रक्षा करना है, न कि बिना कानूनी और ठोस वजह के अलगाव को बढ़ावा देना। इस तरह के केस पुरुष समाज के लिए आशा की किरण लेकर आते हैं, जो अपनी पत्नी द्वारा सताए गए हैं।

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