कोझिकोड कोर्ट में एशियानेट न्यूज को बड़ी जीत मिली है। कोर्ट ने कहा कि रिपोर्टिंग के लिए पत्रकारों को जेल में नहीं डाला जा सकता। जज प्रिया के ने कहा कि जिस लोकतांत्रिक देश में प्रेस की आजादी है वहां इस तरह की चीज नहीं हो सकती।

कोझिकोड। केरल के कोझिकोड कोर्ट ने एशियानेट न्यूज को निर्भीक पत्रकारिता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए सराहा है। कोर्ट ने कहा कि पत्रकारों को खबर की रिपोर्टिंग के लिए जेल नहीं भेजा जा सकता।

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मामले की सुनवाई कोझिकोड की एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज प्रिया के की कोर्ट में हुई। एशियानेट न्यूज के कर्मचारियों की अग्रिम जमानत अर्जी पर फैसला सुनाते हुए जज प्रिया के ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है। यहां प्रेस की आजादी है। इस देश में रिपोर्टिंग के लिए पत्रकार को जेल में डालने जैसी चीज नहीं हो सकती।

पहले होनी चाहिए निष्पक्ष जांच
कोर्ट ने एशियानेट न्यूज के कर्मचारियों को अग्रिम जमानत दे दी। अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि एशियानेट न्यूज के कर्मचारियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम) के तहत गंभीर अपराधों के कोई आरोप नहीं हैं। ये सभी न्यूज चैनल के अधिकारी हैं। उन्हें डर है कि खबर दिखाने के लिए जेल में डाल दिया जाएगा। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में प्रेस और मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना गया है। मीडियाकर्मियों को आपराधिक मामलों में आरोपी बनाकर जेल में नहीं डाला जा सकता। अगर इन्होंने ऐसा कोई अपराध किया है तो पहले इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

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कोर्ट ने एशियानेट न्यूज के चार पत्रकारों को अग्रिम जमानत दी है। इनके नाम सिंधु सूर्यकुमार, शाहजहां, नफल बिन यूसुफ और नीली आर नायर हैं। वकील पीवी हरि एशियानेट न्यूज के कर्मचारियों की ओर से कोर्ट में पेश हुए। 

कोर्ट ने कहा कि यदि जांच अधिकारी को जांच के उद्देश्य से याचिकाकर्ताओं की उपस्थिति चाहिए तो इसके लिए अग्रिम जमानत में शर्त लगाई जा सकती है। गौरतलब है कि एशियानेट न्यूज ने 'Narcotics is Dity Business' हेडलाइन से खबरों की सीरिज प्रसारित की थी। इसके चलते विधायक पीवी अनवर की शिकायत पर केरल पुलिस ने केस दर्ज किया था। इसके बाद एशियानेट न्यूज के पत्रकारों ने अग्रिम जमानत के लिए अर्जी लगाई थी।

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