अक्षय उर्जा के क्षेत्र में भारत नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। देश ने अक्षय उर्जा में 100 गीगावाट की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है। सन् 2030 तक 450 गीगावाट का लक्ष्य हासिल किया जाएगा।
नई दिल्ली। अक्षय उर्जा के क्षेत्र में भारत नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। देश ने अक्षय उर्जा में 100 गीगावाट की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है। सन् 2030 तक 450 गीगावाट का लक्ष्य हासिल किया जाएगा।
सीआईआई के वार्षिक अधिवेशन में उद्योगपतियों ने कहा कि दुनिया अक्षय उर्जा के क्षेत्र पर फोकस कर रही है। भारत भी इस ओर बेहतरीन ढंग से आगे बढ़ रहा है। 100 गीगावाट के लक्ष्य को हासिल करना ऐतिहासिक उपलब्धि है। पीएम मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत के तहत देश आगे बढ़ते हुए सन् 2030 तक 450 गीगावाट के टारगेट को भी पूरा कर लेगा।
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चीन से होड़ को छोड़ना होगा
नीति आयोग के चीफ अमिताभ कांत ने एक दिन पहले ही अक्षय उर्जा क्षेत्र की ओर फोकस करने की सलाह दी थी। कांत के मुताबिक चीन जिन क्षेत्रों में पहले से लीडर की भूमिका में है उन क्षेत्रों में भारत आगे नहीं बढ़ सकता। अमिताभ कांत ने कहा कि भारत के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मजबूत अग्रणी कंपनियां मौजूद हैं। ये (हाइड्रोजन, हाई एंड बैट्रीज और एडवांस सोलर प्लांट) वो क्षेत्र हैं जहां तकनीकि विकास हैं। उन्होंने कहा कि भारत ग्रीन हाइड्रोजन (green hydrogen) और ग्रीन अमोनिया (green Ammonia) दोनों का ही निर्यातक बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगले पांच सालों में सोलर एनर्जी के दाम गिरकर 1 रूपया प्रति यूनिट हो जाना चाहिए। और इसलिए इससे ऐसे हालात बनेंगे कि भारत के ग्रीन उत्पाद भारत के हाई कार्बन उत्पादों से ज्यादा सस्ते हो जाएंगे।
ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया के एक्सपोर्ट का रखें लक्ष्य
अमिताभ कांत ने कहा कि यूरोप और अमेरिका एक साथ मिलकर लगभग 550 गीगावाट्स ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया इम्पोर्ट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य होना चाहिए कि वो कम से कम 200 गीगावाट ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया साल 2030 तक एक्सपोर्ट करे। उन्होंने कहा कि भारतीय उद्योगों को डिजीटल होने के साथ-साथ स्किल में इन्वेस्ट और प्रतियोगी होने की जरुरत है।
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