संविधान पीठ के एक जज ने कहा कि 1,000 रुपये और 500 रुपये के नोटों पर प्रतिबंध लगाने का केंद्र सरकार का 8 नवंबर, 2016 का आदेश वैध है और निर्णय लेने की प्रक्रिया को सिर्फ इसलिए गलत नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि केंद्र ने यह कदम उठाया था।

Demonetisation verdict of Supreme court: सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले पर सोमवार को फैसला दिया है। बीजेपी ने कोर्ट के निर्णय को ऐतिहासिक करार दिया है। एपेक्स कोर्ट का फैसला आने के बाद कांग्रेस की आलोचना करते हुए बीजेपी ने पूछा कि क्या राहुल गांधी 'फैसले के बाद माफी मांगेंगे'। बीजेपी ने कहा कि नोटबंदी से देश की आय में वृद्धि हुई और आतंकवाद को झटका लगा है।

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बीजेपी ने राहुल से कर दी यह मांग...

बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि 2016 में की गई नोटबंदी से टेरर फंडिंग पर रोक लगी। नोटबंदी आतंकवाद के लिए "सबसे बड़ा झटका" साबित हुआ। उन्होंने दावा किया कि नोटबंदी से इनकम टैक्स में बढ़ोत्तरी हुई और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली। प्रसाद ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक फैसला है और राष्ट्रहित में है। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रहित में लिए गए फैसले को सही ठहराया है। क्या राहुल गांधी अब नोटबंदी के खिलाफ अपने अभियान के लिए माफी मांगेंगे? रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस नेता पी.चिदंबरम पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वह बहुमत के फैसले की अनदेखी करके लोगों को गुमराह कर रहे हैं। भारत डिजिटल पेमेंट में एक ग्लोबल लीडर बन चुका है। यह सिर्फ नोटबंदी के कारण ही हो सका। देश ने अकेले इस साल अक्टूबर में 12 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन किए। 

सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया नोटबंदी के खिलाफ फैसला

न्यायमूर्ति एसए नज़ीर की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने कहा कि आर्थिक नीति के मामलों में बहुत संयम बरतना होगा और अदालत अपने फैसले की न्यायिक समीक्षा द्वारा कार्यपालिका के ज्ञान की जगह नहीं ले सकती है। संविधान पीठ के एक जज ने कहा कि 1,000 रुपये और 500 रुपये के नोटों पर प्रतिबंध लगाने का केंद्र सरकार का 8 नवंबर, 2016 का आदेश वैध है और निर्णय लेने की प्रक्रिया को सिर्फ इसलिए गलत नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि केंद्र ने यह कदम उठाया था। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना ने एक कड़े असहमतिपूर्ण फैसले में केंद्र द्वारा शुरू की गई नोटबंदी को दूषित और गैरकानूनी बताया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यथास्थिति को अब बहाल नहीं किया जा सकता है। न्यायाधीश ने कहा कि इस कदम को संसद के एक एक्ट के माध्यम से लागू किया जा सकता था।

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