मणिपुर में हिंसा (Manipur Violence) के दौरान 6,000 केस दर्ज किए गए हैं। इनमें अधिकांश आगजनी और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित हैं। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने इन मामलों की जांच तेज कर दी है। 

इंफाल। मणिपुर में दो महिलाओं को नग्न कर घुमाने का वीडियो (Manipur video) सामने आने के बाद देश में आक्रोश है। 3 मई से मणिपुर जातीय हिंसा की आग में जल रहा है। इस दौरान 160 से अधिक लोग मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं। सैड़कों घरों को जलाया गया है। मणिपुर में हिंसा को लेकर 6,000 केस दर्ज हुए हैं। इनमें से अधिकांश आगजनी और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित हैं।

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सरकारी एजेंसियों और सुरक्षा बलों ने सभी घटनाओं की जांच तेज कर दी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निगरानी कड़ी की गई है। इस संबंध में एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि कहा हमने निगरानी बढ़ाई है। इसके चलते कई फर्जी और भड़काऊ दावों को फैलने से पहले ही रोकने में सफल रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि समय रहते गलत सूचना फैलाए जाने से रोका जा सके। सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही जानकारियों और वीडियो फुटेज की जांच की जा रही है। इसके बाद जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

सीनियर अधिकारी ने कहा कि एक ओर जहां राज्य में अशांति है। वहीं, स्थानीय पुलिस स्टेशनों में संसाधनों की कमी है। इसके चलते हत्या और हमले जैसे गंभीर अपराधों की जांच में बाधा आ रही है। पुलिस के जवानों की कमी है। पुलिस का मुख्य फोकस अभी कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।

केंद्र ने मणिपुर भेजी हैं 135 कंपनियां
मणिपुर में शांति स्थापित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रहने में राज्य पुलिस की मदद के लिए केंद्र सरकार ने सुरक्षाबलों की 135 कंपनियां भेजी हैं। राज्य में धीरे-धीरे स्थिति में सुधार हो रहा है। हालांकि छिटपुट घटनाएं अभी भी हो रही हैं। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि मणिपुर के 16 जिलों में से आधे अभी भी समस्याग्रस्त हैं।

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3 मई से जातीय हिंसा की आग में जल रहा मणिपुर

गौरतलब है कि मणिपुर तीन मई से जातीय हिंसा की आग में जल रहा है। कुकी आदिवासी समूह और मैतेई समुदाय के लोगों के बीच हिंसक संघर्ष हो रहा है। इसके चलते 40,000 से अधिक लोगों को विस्थापित होना पड़ा है। केंद्र सरकार ने राज्य में अर्धसैनिक बलों और सेना के जवानों को तैनात किया है।

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