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मिट्टी बचाओ अभियान में शामिल होने वाला 9वां भारतीय राज्य बना गोवा, CM और सद्गुरु ने किया MOU का आदान-प्रदान

ईशा आउटरीच के मिट्टी बताओ आंदोलन में गोवा शामिल हो गया है। इसके लिए गोवा सरकार और ईशा आउटरीच के बीच समझौता ज्ञापन पर साइन किया गया। गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत और सद्गुरु ने MOU का आदान-प्रदान किया।
 

Goa becomes the 9th Indian state to join the Save Soil campaign vva
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First Published Aug 24, 2022, 3:55 PM IST

पणजी। गोवा ने मंगलवार को राज्य में मिट्टी के संरक्षण के लिए ईशा आउटरीच के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया। इसके साथ ही गोवा आधिकारिक तौर पर मिट्टी बचाने के लिए वैश्विक आंदोलन में शामिल होने वाला 9वां भारतीय राज्य बन गया है। 

गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत और सद्गुरु ने गोवा में मिट्टी बचाओ अभियान के कार्यक्रम में समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया। सद्गुरु ने मुख्यमंत्री को मिट्टी बचाओ नीति पुस्तिका भी सौंपी। इस दौरान भारत के संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्रीपद नाइक, गोवा के पर्यावरण मंत्री नीलेश कैबराल और गोवा के कृषि मंत्री रवि नाइक  उपस्थित रहे। यह व्यावहारिक और वैज्ञानिक समाधान प्रदान करती है, जिसे सरकारें किसी देश की मिट्टी के प्रकार, अक्षांशीय स्थिति और कृषि परंपराओं के आधार पर क्रियान्वित कर सकती हैं।

भूमि क्षरण से खाद्य सुरक्षा को होगा खतरा
मिट्टी बचाओ अभियान के लिए 27 देशों से होकर 30,000 किलोमीटर की बाइक यात्रा के लिए सद्गुरु की सराहना करते हुए डॉ. प्रमोद सावंत ने कहा, "मैं वास्तव में इस तथ्य से प्रभावित हूं कि सद्गुरु ने मिट्टी की उर्वरता को ठीक से देखा है। भूमि क्षरण से हमारी वैश्विक खाद्य सुरक्षा को खतरा होगा। इसलिए गोवा सद्गुरु के मिट्टी बचाओ आंदोलन का समर्थन करने के लिए आगे आया है।" 

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मुख्यमंत्री ने सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) में सुधार के लिए गोवा सरकार द्वारा किए गए उपायों पर प्रकाश डाला और विश्वास व्यक्त किया कि गोवा सरकार और ईशा आउटरीच के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के साथ स्थानीय किसान, इकॉलजी और मिट्टी के संरक्षण में विचारों और तकनीकों के आदान-प्रदान से अर्थव्यवस्था को काफी फायदा होगा।

अर्थव्यवस्था का आधार है मिट्टी
इस अवसर पर सद्गुरु ने मिट्टी को बचाने की तत्काल जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि इस धरती पर पारिस्थितिकी हर अर्थव्यवस्था का आधार है। इसे बचाने की जरूरत है। सद्गुरु ने 'पारिस्थितिकी बनाम अर्थव्यवस्था' बहस के आधार के बारे में विचार व्यक्त किया। सद्गुरु ने सवाल किया, "आप जो शरीर धारण करते हैं वह मिट्टी है, जो कपड़े आप पहनते हैं वह मिट्टी है...मुझे एक बात बताइए जो मिट्टी नहीं है।" 

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मिट्टी और मां के हमें पोषण प्रदान करने की गुणवत्ता के बीच समानताएं चित्रित करते हुए, सद्गुरु ने पूछा क्या हम अपनी मां को एक संसाधन के रूप में मानते हैं। अभी हम जो कुछ भी उपयोग कर रहे हैं वह मिट्टी से आता है और हम भूल गए हैं कि मिट्टी जीवन का स्रोत है और हम इसे एक संसाधन की तरह मान रहे हैं।

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