वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने अडानी ग्रुप के खिलाफ अमेरिकी DOJ द्वारा आरोप हटाने के फैसले पर कोर्ट के आदेश को 'सामान्य प्रक्रिया' बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कानूनी प्रणाली में केस वापस लेने का फैसला अभियोजन एजेंसी का होता है।
हरीश साल्वे ने बताई अमेरिकी कानूनी प्रक्रिया
वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज निकोलस गारौफिस के उस आदेश को 'एक बहुत ही सामान्य प्रक्रिया' बताया है, जिसमें अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी और अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सागर अडानी के खिलाफ आरोप हटाने के अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) के फैसले का कारण मांगा गया है। साल्वे ने कहा कि अमेरिकी कानूनी प्रणाली किसी मामले को जारी रखने या न रखने का प्राथमिक नियंत्रण अभियोजन एजेंसी को देती है।

लंदन से ANI के साथ एक विशेष जूम इंटरव्यू में बात करते हुए साल्वे ने कहा कि DOJ, जिसने मुकदमा शुरू किया था, ने अब मामले को खारिज करने के लिए अदालत का रुख किया है और उसे केवल अपने फैसले के कारणों को समझाने की जरूरत है।
साल्वे ने कहा, "यह एक बहुत ही सामान्य प्रक्रिया है। DOJ अभियोजन एजेंसी है। उन्होंने मुकदमा चलाया और अब मामले को खारिज करने के लिए आवेदन किया है। चूंकि मामला अदालत के सामने है, इसलिए अदालत कारण पूछ सकती है। यहां ठीक यही हुआ है।"
उन्होंने समझाया कि हालांकि अदालत आदेश पारित करने से पहले स्पष्टीकरण मांगने की हकदार है, लेकिन अमेरिकी कानूनी ढांचा न्याय विभाग को यह तय करने में महत्वपूर्ण विवेक देता है कि मुकदमा जारी रखना है या बंद करना है। उन्होंने कहा, "भारतीय अदालतों के विपरीत, जो किसी मुकदमे को वापस लेने के फैसलों पर बहुत अधिक नियंत्रण रखती हैं, अमेरिकी प्रणाली अलग है। DOJ के नियंत्रण में मामले होते हैं। वे तय करते हैं कि मुकदमा चलाना है या नहीं।"
साल्वे के अनुसार, अदालत द्वारा अतिरिक्त कारण मांगने को एक असाधारण घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "उनसे कारण पूछा जाएगा, वे कारण बताएंगे, और मामला वहीं खत्म हो जाएगा।"
क्या है पूरा मामला?
जज निकोलस गारौफिस ने हाल ही में न्याय विभाग को निर्देश दिया था कि वह गौतम अडानी और सागर अडानी के खिलाफ आरोपों को खारिज करने के अपने अनुरोध के समर्थन में कारण बताए, जिसके बाद ही आवेदन पर कोई फैसला लिया जाएगा। मामला अब आगे की कार्यवाही के लिए सूचीबद्ध है। (ANI)
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