पाकिस्तान की ओर गलती से ब्रह्मोस मिसाइल फायर (BrahMos accidental firing) होने के मामले में भारतीय वायु सेना ने जांच पूरी कर ली है। घटना के लिए एक से अधिक अधिकारियों को जिम्मेदार पाया गया है। इन्हें जल्द कड़ी सजा मिल सकती है।

नई दिल्ली। 9 मार्च 2022 को भारत की एक ब्रह्मोस मिसाइल (BrahMos missile) पाकिस्तान की ओर दुर्घटनावश फायर हो गई थी। एक महीने से भी कम समय में भारतीय वायु सेना (IAF) ने इस मामले में अपनी जांच पूरी कर ली है। मिसाइल स्क्वाड्रन के एक से अधिक अधिकारियों को इस घटना के लिए दोषी ठहराया गया है। दोषी अधिकारियों को कड़ी सजा दी जाएगी।

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घटना की जांच सहायक वायुसेनाध्यक्ष संचालन (आक्रामक) एयर वाइस मार्शल आरके सिन्हा द्वारा की गई थी। 9 मार्च को नियमित रखरखाव और निरीक्षण के दौरान गलती से ब्रह्मोस मिसाइल फायर हो गई थी। यह पाकिस्तान के मियां चन्नू इलाके में गिरी थी। सरकारी सूत्रों के हवाले से एक न्यूज एजेंसी ने जानकारी दी है कि एक से अधिक अधिकारी उस घटना के लिए दोषी पाए गए हैं। इसे टाला जा सकता था। दोषी अधिकारियों को त्वरित और कड़ी सजा दी जाएगी।

मानक संचालन प्रक्रियाओं का हुआ था उल्लंघन 
सूत्रों ने कहा कि कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी ने संबंधित अधिकारियों द्वारा मानक संचालन प्रक्रियाओं का स्पष्ट उल्लंघन भी पाया। सरकार और भारतीय वायु सेना के शीर्ष अधिकारियों का विचार है कि सजा शीघ्र होनी चाहिए। जांच में गलती से मिसाइल के लॉन्च होने के बाद स्थिति को नियंत्रित करने में एक अधिकारी की भूमिका भी सामने आई है।

अगले कुछ हफ्तों में हो सकती है कार्रवाई
घटना की जांच कर रहे वायुसेना अधिकारी को घटना की जांच जल्द से जल्द पूरी करने को कहा गया था। दुर्घटना के लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी थी। इस घटना के कारण बहुत अधिक नुकसान हो सकता था। भारतीय वायु सेना ने इस घटना को बहुत गंभीरता से लिया है और यह सुनिश्चित करने के लिए आंतरिक रूप से हर कदम उठा रही है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं हों। विभिन्न मानक संचालन प्रक्रियाओं की समीक्षा की जा रही है। यह देखा जा रहा है कि क्या चीजों को आसान बनाने के लिए किसी बदलाव की जरूरत है। रक्षा मंत्रालय को भी जांच समिति की रिपोर्ट से अवगत करा दिया गया है और अगले कुछ हफ्तों में आगे की कार्रवाई की उम्मीद है।

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घटना के बाद पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद को आश्वासन दिया था कि मिसाइल प्रणाली बहुत विश्वसनीय और सुरक्षित है। उन्होंने कहा था कि हमारी सुरक्षा प्रक्रियाएं और प्रोटोकॉल उच्चतम क्रम के हैं और समय-समय पर समीक्षा की जाती है। हमारे सशस्त्र बल अच्छी तरह से प्रशिक्षित और अनुशासित हैं और ऐसी प्रणालियों को संभालने में अच्छी तरह से अनुभवी हैं।

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