भारत में कोरोना के खिलाड़ लड़ाई में बीसीजी का टीका बहुत कारगर साबित हो रहा है? यह सवाल कई लोगों के दिमाग में होगा। जवाब भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर के वैज्ञानिक डॉक्टर रमन आर गंगाखेड़कर ने दिया।

नई दिल्ली. भारत में कोरोना के खिलाड़ लड़ाई में बीसीजी का टीका बहुत कारगर साबित हो रहा है? यह सवाल कई लोगों के दिमाग में होगा। जवाब भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर के वैज्ञानिक डॉक्टर रमन आर गंगाखेड़कर ने दिया। उन्होंने कहा, इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं है। लेकिन व्यक्तिगत आकलन यही कहता है कि ऐसा संभव नहीं है। दरअसल सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि भारत में कोरोना से कम मौत इसलिए हो रही है क्योंकि यहां पैदा होते ही बीसीजी का टीका लगा दिया जाता है। अब वही टीका कोरोना से रक्षा कर रहा है। 

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- बीसीजी टीके पर गंगाखेड़कर ने कहा, बीसीजी की वैक्सीन पैदा होते ही दी जाती है। कुछ स्टडीज हैं कि कैंसर पीड़ित कुछ लोगों को बीसीजी टीका देने से उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। हालांकि कोरोना के मामले में अभी तक कोई स्टडी सामने नहीं आई है। 

15 साल तक ही रहता है बीसीजी का असर
गंगाखेंड़कर ने बताया कि कोरोना के मामले में बीसीजी का टीम ज्यादा कारगर साबित नहीं हो सकता है क्योंकि इसका असर 15 साल तक ही रहता है। 

देश में डबलिंग रेट में कमी आई
देश में कोरोना के कुल 13,387 केस सामने आ चुके हैं। 1749 लोग ठीक हो चुकी है। पिछले 24 घंटे की बात की जाए तो एक दिन में 1007 नए मामले सामने आए हैं, 23 नई मौंत भी हुई हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया, लॉकडाउन से पहले कोरोना मामलों की डबलिंग रेट लगभग 3 दिन लग रहे थे, पिछले 7 दिनों के आंकड़ों के अनुसार मामलों को डबलिंग रेट अब 6.2 दिनों की है। 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तो डबलिंग रेट देश की डबलींग रेट से भी कम है।

19 राज्यों में कोरोना का प्रभाव कम
लव अग्रवला ने बताया, जिन 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में डबलिंग रेट देश की डबलिंग से कम है उसमें, केरल, उत्तराखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, लद्दाख, पुड्डुचेरी, दिल्ली, बिहार, ओडिशा, तेलंगाना, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, यूपी, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, असम और त्रिपुरा शामिल हैं।