पद्मश्री सम्मान का आयोजन तो हर साल होता है लेकिन कई बार ऐसी घटनाएं हो जाती हैं जो दिल को छू जाती हैं। सोमवार को पद्म पुरस्कारों के लिए आयोजित समारोह में भी कुछ ऐसा ही हुआ जिसकी तारीफ किए बिना कोई नहीं रह पा रहा है। 

नई दिल्ली। व्यक्तित्व की पहचान उसके कर्म और विनम्रता से ही होती है। 125 वर्षीय योग चिकित्सक स्वामी शिवांनद (Swami Shivanand) को देखकर कम से कम यह तो कहा ही जा सकता है। वयोवृद्ध योग चिकित्सक (Yoga Guru) ने सोमवार को जिस विनम्रता के साथ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ramnath Kovind) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) का अभिवादन किया, उसे देख हर कोई भाव विभोर है। 

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सबसे उम्रदराज योग चिकित्सक हैं स्वामी शिवानंद

दरअसल, योग के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए 125 वर्षीय योग चिकित्सक और गुरु स्वामी शिवानंद को सोमवार को पद्मश्री से सम्मानित किया गया। शिवानंद शायद देश के इतिहास में सबसे उम्रदराज पद्म पुरस्कार विजेता हैं। पुरस्कार ग्रहण समारोह के दौरान एक वीडियो में, स्वामी शिवानंद को सम्मान के रूप में पुरस्कार प्राप्त करने से पहले राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को नमन कर रहे हैं।

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जमीन को चूमकर पीएम और राष्ट्रपति का अभिवादन

स्वामी शिवानंद एक योग सेवक हैं। वह अपने विनम्र स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। सोमवार को वह पुरस्कार समारोह में पहुंचे तो वहां बैठे पीएम मोदी के सामने पहुंचते ही जमीन पर दंडवत होकर प्रणाम किया। इसके बाद वह राष्ट्रपति के सामने भी उसी तरह से अभिवादन किया। स्वामी शिवानंद के अभिवादन के तरीके से समारोह में मौजूद हर कोई भाव विभोर हो उठा। वयोवृद्ध योग चिकित्सक के इस तरह का अभिवादन देख पीएम मोदी तत्काल उठ खड़े हुए और उनको झुकते हुए प्रणाम किया। स्वामीजी ने इसी तरह राष्ट्रपति कोविंद का भी अभिवादन किया। राष्ट्रपति भी सारे प्रोटोकॉल तोड़ते हुए नीचे आ गए और उनको उठाया और फिर पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा। वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है जिसमें नेटिज़न्स ने शिवानंद के हावभाव को भारत की सच्ची संस्कृति की अभिव्यक्ति बताया है।

काशी के घाटों पर योग गुरु कराते हैं रोज अभ्यास

स्वामी शिवानंद तीन दशकों से अधिक समय से काशी के घाटों पर योग का अभ्यास और शिक्षण कर रहे हैं।

इनको भी मिला सम्मान

कच्छ बाढ़ पीड़ितों के लिए 'क्लॉथ बैंक' का आयोजन करने वाली एक 91 वर्षीय महिला, पोलियो से लड़ने वाले 82 वर्षीय आर्थोपेडिक सर्जन और कश्मीर के बांदीपोरा के एक 33 वर्षीय मार्शल कलाकार उन 'अनसुने और अनोखे' नायकों के समूह में शामिल थे, जिन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया है।