बीते 6 दिसंबर को लोकसभा में जम्मू-कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक 2023 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2023 को पास किया गया था।

Jammu and Kashmir Reservation (Amendment) Bill 2023: राज्यसभा में सोमवार को जम्मू-कश्मीर से संबंधित दो महत्वपूर्ण विधेयक पास कर दिए गए। राज्यसभा में बिल पास होने के बाद कश्मीरी पंडितों विस्थापितों और पीओके से विस्थापित लोगों के लिए विधानसभा में रिजर्वेशन का रास्ता साफ हो गया है। अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन जाएगा। बीते 6 दिसंबर को लोकसभा में जम्मू-कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक 2023 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2023 को पास किया गया था।

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जम्मू-कश्मीर में कहां कितनी सीटें?

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में राज्य विधानसभा और लोकसभा की सीटों का पुनर्गठन डिलिमिटेशन कमीशन ने किया है। कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू क्षेत्र में 43 सीटें होंगी जबकि पूर्व में 37 सीटें थीं। इसी तरह कश्मीर में विधानसभा की 47 सीटें होंगी। पूर्व में कश्मीर में 46 सीटें थीं। परिसीमन के बाद जम्मू में छह सीटें और कश्मीर में एक सीट बढ़ाई गई है। कमीशन ने PoK क्षेत्र के लिए 24 सीटें निर्धारित की है।

आरक्षण का प्रावधान

जम्मू-कश्मीर में विधानसभा सीटों के आरक्षण का भी प्रावधान किया गया है। विधेयक पास होने के बाद केंद्र शासित प्रदेश में सात सीटें अनुसूचित जाति और 9 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए रिजर्व की गई है। नई विधेयक के अनुसार, अधिकतम दो सीटें कश्मीरी पंडितों और PoK क्षेत्र के विस्थापित लोगों के लिए रिजर्व की गई है। इस दो में एक सीट महिला के लिए होगी।

अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर मामले की ली पूरी जिम्मेदारी

अमित शाह ने वादा किया कि अगर जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लेना गलत साबित हुआ तो वह, प्रधानमंत्री मोदी, सरकार और कैबिनेट इसकी पूरी जिम्मेदारी लेगी। उन्होंने कहा कि गलत नीतियों की वजह से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को खोया गया। अगर गलत समय पर सीजफायर नहीं किया गया होता तो पीओके को नहीं खोया होता। कांग्रेस पार्टी बताए कि जवाहरलाल नेहरू कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में क्यों ले गए। पढ़िए पूरी खबर…