इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज पंकज भाटिया ने पिछले 3 महीनों में दहेज हत्या के 510 में से 508 मामलों में आरोपियों को जमानत दी। सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे ही मामले में उन्हें फटकार लगाई थी, जिसके बाद उन्होंने जमानत अर्जियों की सुनवाई से हटने का अनुरोध किया।

नई दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज पंकज भाटिया एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें दहेज हत्या के एक मामले में आरोपी को जमानत देने पर कड़ी फटकार लगाई थी। अब पता चला है कि पिछले 3 महीनों में जस्टिस भाटिया ने ऐसे ही 508 मामलों में आरोपियों को जमानत दे दी थी। यह खुलासा वाकई हैरान करने वाला है।

जस्टिस भाटिया के हालिया फैसलों की जांच

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद एक अंग्रेजी मीडिया संस्थान ने जस्टिस भाटिया के हालिया फैसलों की पड़ताल की। इस जांच में सामने आया कि पिछले साल अक्टूबर से दिसंबर के बीच जस्टिस भाटिया ने दहेज हत्या से जुड़े कुल 510 मामलों की सुनवाई की थी। इनमें से सिर्फ 2 मामलों को छोड़कर, उन्होंने बाकी सभी 508 केस में आरोपियों को जमानत दे दी।

हैरानी की बात यह भी है कि जमानत देते वक्त उनके आदेश की भाषा और 20,000 रुपये की बॉन्ड राशि लगभग सभी मामलों में एक जैसी थी। यही नहीं, छह मामलों में तो मृतक महिला गर्भवती थी, फिर भी आरोपियों को जमानत मिल गई।

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी फटकार

इसी साल 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस पंकज भाटिया को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने दहेज हत्या के एक आरोपी को जमानत देने के उनके फैसले पर चिंता जताते हुए इसे 'बेहद चौंकाने वाला और निराशाजनक' बताया था। सुप्रीम कोर्ट ने उस आरोपी की जमानत रद्द भी कर दी थी। इस घटना के बाद जस्टिस पंकज भाटिया ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से अनुरोध किया था कि उन्हें जमानत अर्जियों की सुनवाई से जुड़े मामलों से अलग रखा जाए।