CBS-YouGov सर्वे के अनुसार, 78% अमेरिकी ईरान के साथ जंग खत्म करना चाहते हैं। अधिकांश लोग इसे एक खराब डील और रणनीतिक नाकामी मानते हैं, जिससे ईरान को ज़्यादा फायदा होगा। यह समझौता ट्रंप के लिए एक एग्जिट प्लान के तौर पर देखा जा रहा है।
वाशिंगटनः ट्रंप प्रशासन के ईरान के साथ शुरुआती समझौते पर दस्तखत करने के बाद आए 'CBS न्यूज़-YouGov' सर्वे के नतीजे डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका हैं। सर्वे के मुताबिक, 78% अमेरिकी चाहते हैं कि ट्रंप अब इस जंग को खत्म कर दें, बजाय इसके कि ईरान पर और रियायतों के लिए दबाव डाला जाए। लेकिन CNN की रिपोर्ट के अनुसार, लोग ट्रंप प्रशासन के इस समझौते का समर्थन इसलिए नहीं कर रहे कि यह कोई बहुत अच्छी डील है, बल्कि इसलिए क्योंकि वे मानते हैं कि यह जंग एक बड़ी नाकामी साबित हुई है। अमेरिकी जनता बस यही चाहती है कि किसी भी तरह यह संकट खत्म हो।

ज़्यादातर लोग इसे 'खराब डील' मान रहे हैं
सर्वे में शामिल सिर्फ 22% लोगों ने ही यह माना कि "जब तक ईरान और रियायतें नहीं देता, तब तक जंग जारी रहनी चाहिए।" हालांकि ट्रंप के सलाहकार इन आंकड़ों को ट्रंप और उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस (JD Vance) के लिए बड़े जनसमर्थन के तौर पर पेश कर रहे हैं, लेकिन सच्चाई कुछ और ही है।
किसे हो रहा है फायदा?: सिर्फ 22% लोग मानते हैं कि इस समझौते से अमेरिका को फायदा होगा। वहीं, 37% लोगों का मानना है कि इससे ईरान को ज़्यादा फायदा होगा।
अपनी ही पार्टी में असंतोष: रिपब्लिकन पार्टी के भी केवल 39% लोग ही मानते हैं कि यह डील अमेरिका के हक में है। यानी, ट्रंप की अपनी पार्टी के 10 में से सिर्फ 4 लोग ही इसे एक कामयाबी के तौर पर देख रहे हैं।
रणनीतिक नाकामी: 45% लोग मानते हैं कि यह जंग रणनीतिक तौर पर एक बड़ी नाकामी थी, जबकि सिर्फ 29% लोग ही इसे एक कामयाबी मानते हैं।
रणनीतिक लक्ष्य हुए फेल, परमाणु कार्यक्रम भी नहीं रुका
डोनाल्ड ट्रंप का सबसे बड़ा मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Issue) को हमेशा के लिए रोकना था। लेकिन *69% अमेरिकी और 45% रिपब्लिकन* मानते हैं कि यह समझौता लागू होने के बाद भी ऐसा नहीं हो पाएगा। इससे पहले हुए एक फॉक्स न्यूज़ (Fox News) पोल में भी यह बात सामने आई थी कि शांति समझौते के बाद भी ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना मुश्किल होगा।
सर्वे के कुछ और अहम नतीजे
68% लोगों का मानना है कि यह डील ईरान को दूसरे देशों को धमकाने से नहीं रोक पाएगी।
79% लोगों के मुताबिक, इस जंग से ईरान के शासक अमेरिका के प्रति ज़्यादा नरम नहीं हुए हैं।
74% लोग मानते हैं कि ईरान के लोगों को सुरक्षित और आज़ाद बनाने का ट्रंप का लक्ष्य इस जंग से पूरा नहीं हो पाया।
जंग का हुआ उल्टा असर
ट्रंप के इन दावों को भी लोग खारिज कर रहे हैं कि जंग ने ईरान की सैन्य क्षमता को खत्म कर दिया है। सिर्फ 37% अमेरिकी मानते हैं कि ईरान अब जंग से पहले के मुकाबले कमज़ोर हुआ है। वहीं, 60% से ज़्यादा लोग मानते हैं कि ईरान या तो अभी भी उतना ही ताकतवर है (38%) या पहले से भी ज़्यादा ताकतवर हो गया है (25%)।
होरमुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने और दुनिया की अर्थव्यवस्था को खतरे में डालने की अपनी क्षमता दिखाकर ईरान ने वैश्विक बाज़ार में अपना दबदबा साबित किया है। 57% की बहुमत का मानना है कि इस जंग ने "समस्याएं सुलझाने से ज़्यादा समस्याएं पैदा की हैं।"
ट्रंप के अनुमान गलत साबित हुए, आखिर में पीछे हटे
64% लोग, जिनमें 54% रिपब्लिकन भी शामिल हैं, मानते हैं कि इस जंग ने विश्व अर्थव्यवस्था को उम्मीद से कहीं ज़्यादा नुकसान पहुंचाया है। CNN ने पहले भी रिपोर्ट किया था कि प्रशासन ने इस बात को बहुत हल्के में लिया था कि ईरान होरमुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने में नहीं हिचकिचाएगा।
प्रशासन ने शुरू में कहा था कि यह जंग सिर्फ चार से छह हफ्ते चलेगी, लेकिन अब इसे लगभग चार महीने हो चुके हैं। दो-तिहाई अमेरिकी मानते हैं कि ट्रंप प्रशासन यह समझौता इसलिए कर रहा है क्योंकि वह किसी भी तरह इस संघर्ष को खत्म करना चाहता है, न कि इसलिए कि उसने अपने सभी लक्ष्य हासिल कर लिए हैं। दुनिया इस नए समझौते को एक लक्ष्यहीन जंग से फजीहत बचाने के लिए ट्रंप के एग्जिट प्लान के तौर पर देख रही है।
