Amit Shah Kishau Dam Meeting: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किशाऊ मल्टीपर्पज डैम प्रोजेक्ट को फाइनल करने के लिए दिल्ली और हरियाणा समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक बड़ी बैठक की। इस प्रोजेक्ट का मकसद यमुना नदी में नई जान डालना और पानी, बिजली व सिंचाई की व्यवस्था करना है।
Delhi Haryana water issue: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मंगलवार को किशाऊ मल्टीपर्पज डैम प्रोजेक्ट को लेकर अहम बैठक हुई। नई दिल्ली में हुई इस बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल समेत कई वरिष्ठ नेता और अधिकारी शामिल हुए। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री भी बैठक में मौजूद रहे।
किशाऊ डैम पर फिर मंथन, जल्द कैबिनेट में जा सकता है प्रस्ताव
बैठक गृह मंत्रालय के कार्यालय में हाइब्रिड मोड में आयोजित की गई। इसमें केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल, जल शक्ति मंत्रालय के अधिकारी, केंद्रीय जल संसाधन सचिव, प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारी और अन्य वरिष्ठ अफसर शामिल हुए। यह बैठक 16 जून को हुई पिछली बैठक के करीब तीन महीने बाद हुई है। उस बैठक में लंबे समय से अटके किशाऊ मल्टीपर्पज डैम प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित राज्यों के बीच सहमति बनी थी। अब इस परियोजना को जल्द ही मंजूरी के लिए केंद्रीय कैबिनेट के सामने रखे जाने की तैयारी है।
6 राज्यों ने प्रोजेक्ट को लेकर जताई थी सहमति
किशाऊ परियोजना को लेकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के बीच सहमति बनी थी। गृह मंत्री की पहल के बाद इन राज्यों ने परियोजना को लागू करने के लिए समझौता ज्ञापन यानी MoU पर हस्ताक्षर करने पर सहमति जताई थी। इस प्रोजेक्ट का मकसद सिर्फ पानी का भंडारण करना नहीं है, बल्कि यमुना नदी के प्रवाह को बेहतर करने के साथ सिंचाई, बिजली और पेयजल की जरूरतों को भी पूरा करना है।
केंद्र उठाएगा पानी वाले हिस्से का 90 फीसदी खर्च
पिछली बैठक में प्रोजेक्ट की वित्तीय व्यवस्था को लेकर भी अहम फैसला हुआ था। इसके तहत किशाऊ परियोजना के पानी वाले हिस्से की लागत का 90 फीसदी खर्च केंद्र सरकार उठाएगी। बाकी 10 फीसदी वित्तीय बोझ परियोजना में शामिल छह राज्य मिलकर उठाएंगे। इस व्यवस्था से लंबे समय से अटकी परियोजना को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
हिमाचल के पानी से दिल्ली और राजस्थान को होगा फायदा
बैठक में यह भी सहमति बनी थी कि हिमाचल प्रदेश के हिस्से में आने वाले पानी को दिल्ली और राजस्थान को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बदले दिल्ली और राजस्थान हिमाचल प्रदेश के हिस्से में आने वाले बिजली घटक की लागत वहन करेंगे। इस व्यवस्था को राज्यों के बीच जल और ऊर्जा संसाधनों के बेहतर बंटवारे की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
टोंस नदी पर बनेगा मल्टीपर्पज डैम
किशाऊ डैम प्रोजेक्ट यमुना की प्रमुख सहायक नदी टोंस पर प्रस्तावित एक बहुउद्देश्यीय जल भंडारण और जलविद्युत परियोजना है। इसके जलाशय में पानी का भंडारण किया जाएगा, जिसका इस्तेमाल अलग-अलग जरूरतों के लिए किया जा सकेगा।
प्रोजेक्ट से मुख्य तौर पर ये फायदे मिलने की उम्मीद है:
- सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी
- जलविद्युत उत्पादन में मदद मिलेगी
- पेयजल आपूर्ति को मजबूत किया जा सकेगा
- यमुना में पानी का प्रवाह बेहतर हो सकता है
- नदी को पुनर्जीवित करने के प्रयासों को गति मिल सकती है
यमुना को साफ और जीवंत बनाने की दिशा में बड़ा कदम
किशाऊ डैम परियोजना को यमुना के पुनर्जीवन की दिशा में अहम माना जा रहा है। जलाशय में पानी के भंडारण और नियंत्रित जल प्रवाह से यमुना में साफ पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। अगर परियोजना को केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिलती है, तो लंबे समय से लंबित इस योजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो सकता है और इससे कई राज्यों की पानी, सिंचाई और बिजली से जुड़ी जरूरतों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
