पश्चिम बंगाल में 5 बार विधायक रहे और ममता बनर्जी सरकार के पूर्व मंत्री आशीष बनर्जी ने टीएमसी कार्यालय मेंफांसी लगकर जान दे दी। अब उनकी मौत की वजह सामने आई है। सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा कि आखिर वह क्यों इतने बेबस हो गए कि आत्महत्या करनी पड़ी।

बीरभूम (पश्चिम बंगाल) : तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सीनियर नेता और विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से बंगाल की सियासत के गलियारों में सन्नाटा पसरा हुआ है। अब खुलासा हो गया है कि बनर्जी ने किस बात से दुखी होकर इतना बड़ा कदम उठाया। आखिर क्यों पार्टी के दफ्तर में ही फांसी लगाकर जान जे दी।

बदनामी से टूटे तो बनर्जी ने चुना मौत का रास्ता

आशीष बनर्जी ने रविवार सुबह आत्महत्या करने से पहले एक सुसाइड नोट लिखा, जिसमें वह आगे लिखते हैं कि उन्होंने कोई भ्रष्टाचार नहीं किया, उन्हें सिर्फ बदनाम करने की कोशिश की गई। वह इस घटना से बेहद दुखी हैं। इसलिए मजबूर होकर इतना बड़ा कदम उठा रहे हैं। बता दें कि उन्होंने नोट में किसी रेत के टेंडर का जिक्र किया है। आशीष ने लिखा कि मैंने किसी काम के बदले किसी से कोई पैसे नहीं लिए। TRDA (तारापीठ-रामपुरहाट डेवलपमेंट अथॉरिटी) के टेंडर, प्लान पास करने, NOC और चेक से जुड़े मामलों में उनकी कोई भूमिका नहीं है। लेकिन फिर भी मुझे झूठे केस बनाकर बदनाम किया जा रहा है।

आशीष बनर्जी की मौत पर BJP और TMC आमने-सामने

  • बता दें कि आशीष बनर्जी की मौत के बाद अब बंगाल की सिसायत गरमा गई है। एक तरफ जहां टीएमसी ने शुवेंद्र अधिकारी सरकार पर जमकर हमला बोला है। TMC सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा आशीष दा ने जीवनभर शिक्षक और जनसेवक रहे, लेकिन कुछ लोगों ने उन्हें बदनाम की करने की कोशिश की। बीजेपी को सोचना चाहिए की किसी को बेवजह बदनाम करोगे तो वह इतना टूट जाएगा की जिंदगी से ही चला जाएगी। वहीं
  • दूसरी तरफ बंगाल की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा- 'यह आत्महत्या है या हत्या, इसकी जांच पुलिस करेगी। अभी भी तृणमूल कांग्रेस में सभी लोग खराब नहीं हैं। कुछ अच्छे लोग भी हैं, लेकिन वह बोल नहीं पा रहे हैं।

कौन थे 5 बार के विधायक आशीष

बता दें कि आशीष बनर्जी की गिनती टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं में होती थी। उन्हें ममता बनर्जी का सबसे करीबी और भोरसेमंद साथी का जाता था। वह 2001, 2006, 2011, 2016 और 2021 में रामपुरहाट सीट से लगातार पांच बार विधायक चुने गए थे। पश्चिम बंगाल में टीएमसी सरकार बनने के बाद उन्होंने सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी संभाली थीं। बनर्जी रामपुरहाट कॉलेज में प्रोफेसर थे और पांच बार विधायक चुने गए थे। उन्होंने पहले मंत्री के तौर पर भी काम किया था और आयुष और कृषि जैसे कई मंत्रालय संभाले थे।

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