बेंगलुरु में एक इंजीनियरिंग छात्र ने दोस्त का बैंक अकाउंट साइबर ठगों को बेच दिया। इस अकाउंट के जरिए करीब 7 करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया। पुलिस ने आरोपी छात्र को गिरफ्तार कर लिया है।
बेंगलुरु: सिलिकॉन सिटी बेंगलुरु से एक चौंकाने वाला साइबर फ्रॉड का मामला सामने आया है। यहां एक प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज के स्टूडेंट को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उस पर आरोप है कि उसने अपने ही दोस्त का बैंक अकाउंट साइबर ठगों को बेच दिया, जिसके जरिए करीब 7 करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया। नॉर्थ डिवीजन की साइबर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान विजयपुर जिले के होसपेटे के रहने वाले ई. आयुष के तौर पर हुई है। इस धोखाधड़ी का शिकार बना छात्र बागलगुंटे के पास एक नामी प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ता है। मामला तब खुला जब पीड़ित छात्र के बैंक अकाउंट में अचानक करोड़ों रुपये के ट्रांजैक्शन होने लगे।
बैंक की जांच में हुआ खुलासा
जब पीड़ित छात्र के बैंक अकाउंट में बहुत बड़े अमाउंट में लेनदेन हुआ, तो बैंक अधिकारियों को शक हुआ। उन्होंने अकाउंट होल्डर यानी उस छात्र को बुलाकर पूछताछ की। इसी दौरान पता चला कि उसके अकाउंट का गलत इस्तेमाल हो रहा है। बैंक ने तुरंत छात्र को इसकी जानकारी दी। अपने अकाउंट से करीब 7 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन की बात जानकर छात्र के होश उड़ गए।
इसके बाद हुई जांच में पता चला कि यह पैसा साइबर फ्रॉड से जुड़ा है। पीड़ित छात्र ने फौरन साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। अधिकारियों ने बताया कि इसी शिकायत पर एक्शन लेते हुए पुलिस ने आरोपी आयुष को गिरफ्तार कर लिया।
कैसे हुआ ये पूरा फ्रॉड?
जांच में सामने आया कि करीब एक साल पहले पीड़ित छात्र की दोस्ती आरोपी आयुष से हुई थी, जो उसी के कॉलेज में पढ़ता था। धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती गहरी हो गई। इसी दोस्ती का फायदा उठाकर आयुष ने अपने दोस्त से कहा, "मेरे बैंक अकाउंट में बैलेंस कम होने की वजह से वह बंद हो गया है। कुछ दिनों के लिए मुझे पैसों के लेनदेन के लिए तुम्हारा बैंक अकाउंट इस्तेमाल करना है।"
दोस्त की बात पर भरोसा करके पीड़ित छात्र ने पिछले साल नवंबर में अपने कर्नाटक बैंक अकाउंट की पासबुक, एटीएम कार्ड और ऑनलाइन बैंकिंग की डिटेल्स आरोपी को दे दीं। इतना ही नहीं, उसने उस बैंक अकाउंट से लिंक अपना एयरटेल सिम कार्ड भी दोस्त को सौंप दिया। इसी भरोसे का फायदा उठाकर आरोपी ने उस बैंक अकाउंट को साइबर फ्रॉड के पैसों के ट्रांसफर के लिए इस्तेमाल कर लिया।
टेलीग्राम पर अकाउंट बेचकर कमीशनखोरी
पुलिस की जांच में एक और बड़ी बात सामने आई है। आरोपी आयुष ने टेलीग्राम ऐप पर एक्टिव साइबर ठगों के एक नेटवर्क को अपने दोस्त का बैंक अकाउंट बेच दिया था। सोशल मीडिया पर साइबर अपराधी 'बैंक अकाउंट किराए पर चाहिए' जैसे विज्ञापन देकर लोगों को फंसाते हैं। पैसों के लालच में आकर आयुष ने दोस्त का अकाउंट इसी नेटवर्क को सौंप दिया और बदले में कमीशन लिया।
पुलिस अब यह पता लगा रही है कि उसे कमीशन के तौर पर कितने पैसे मिले। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस अकाउंट का लिंक पहले हुए दूसरे साइबर फ्रॉड केस से भी है। यह मामला सभी के लिए एक बड़ी चेतावनी है। कोई कितना भी करीबी दोस्त या रिश्तेदार क्यों न हो, उसके साथ कभी भी अपने बैंक अकाउंट की डिटेल्स, एटीएम कार्ड, ओटीपी या सिम कार्ड शेयर न करें। यह आपको किसी बड़े अपराध में फंसा सकता है।
