बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है। यूपी से कई नेताओं को अहम जिम्मेदारी मिली है। OBC और अल्पसंख्यक मोर्चे से लेकर उत्तराखंड और हिमाचल तक की नियुक्तियों में 2027 चुनाव की रणनीति के संकेत दिख रहे हैं।

भारतीय जनता पार्टी ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है और इसके साथ ही 2027 के विधानसभा चुनावों की तस्वीर को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन की नई टीम में उत्तर प्रदेश को खास तवज्जो मिली है। कई ऐसे चेहरों को राष्ट्रीय जिम्मेदारी दी गई है, जिनका सीधा संबंध यूपी की राजनीति और सामाजिक समीकरणों से है।

खास बात यह है कि अगले साल उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश में भी 2027 के अंत में चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में बीजेपी की नई टीम को सिर्फ संगठनात्मक फेरबदल नहीं, बल्कि आने वाले चुनावों के लिए सामाजिक समीकरण, संगठन और राजनीतिक नैरेटिव को साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

यूपी में इन चेहरों को मिली बड़ी जिम्मेदारी

नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश से प्रो. तारिक मंसूर और रेखा वर्मा को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी मिली है। इसके अलावा डॉ. भोला सिंह और संगीता यादव राष्ट्रीय मंत्री बनाए गए हैं।

संगठन में सामाजिक पहुंच बढ़ाने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण नियुक्तियां हुई हैं। अमरपाल मौर्य को ओबीसी मोर्चा और कुंवर बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चे की कमान दी गई है।

यूपी की राजनीति में इन नियुक्तियों का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि 2027 में भाजपा के सामने सिर्फ सत्ता बचाने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि अलग-अलग सामाजिक वर्गों में अपनी पकड़ बनाए रखने की भी परीक्षा होगी।

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2024 के बाद BJP के सामने सबसे बड़ा सवाल-सामाजिक समीकरण

2024 के लोकसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में भाजपा के लिए जातीय और सामाजिक समीकरण पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं। खासकर OBC और दलित वोटों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला तेज हुआ है। ऐसे में अमरपाल मौर्य को OBC मोर्चे की जिम्मेदारी और कुंवर बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चे की कमान देना पार्टी की सामाजिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश का संकेत माना जा सकता है।

बताया जाता है कि नई टीम की घोषणा से पहले नितिन नबीन ने यूपी के करीब 20 सांसदों से वन-टू-वन बातचीत की थी। इन चर्चाओं में जातीय समीकरण और कार्यकर्ताओं के मनोबल जैसे मुद्दे भी सामने आए। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी 2027 की रणनीति में संगठन के साथ-साथ जमीनी फीडबैक को भी महत्व दे रही है।

स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी की जोड़ी क्यों अहम?

स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाए जाने का यूपी के लिहाज से खास राजनीतिक महत्व है। अमेठी से उनका पुराना जुड़ाव रहा है और महिला मतदाताओं के बीच पार्टी की पहुंच मजबूत करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। दूसरी ओर, हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी मिलने से पूर्वी उत्तर प्रदेश के संगठनात्मक अनुभव को केंद्रीय स्तर पर जगह मिली है। आने वाले चुनावों में दोनों नेताओं की भूमिका सिर्फ दिल्ली स्थित संगठन तक सीमित रहने के बजाय चुनावी राज्यों में पार्टी की रणनीति को जमीन तक पहुंचाने में भी हो सकती है।

उत्तराखंड में धामी के साथ पुराने चेहरे का भरोसा

उत्तराखंड में भाजपा ने अलग तरह का संतुलन बनाने की कोशिश की है। पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा महेंद्र पांडे को राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री, अनिल बलूनी को मीडिया संयोजक और आलोक भट्ट को सोशल मीडिया सह संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है।

उत्तराखंड में 2027 का चुनाव भाजपा के लिए लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने की बड़ी परीक्षा होगा। पार्टी नेतृत्व पहले ही संकेत दे चुका है कि चुनाव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व और 'धामी मॉडल' को प्रमुखता दी जाएगी। ऐसे में तीरथ सिंह रावत की राष्ट्रीय संगठन में वापसी को अनुभवी नेतृत्व को केंद्रीय भूमिका देने के तौर पर देखा जा सकता है। वहीं अनिल बलूनी को मीडिया की जिम्मेदारी मिलना राज्य से जुड़े राजनीतिक नैरेटिव को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती देने की कोशिश माना जा सकता है।

हिमाचल की टीम में नाम नहीं, फिर भी तैयारी पर नजर

हिमाचल प्रदेश का मामला इस पूरी तस्वीर में थोड़ा अलग है। 2027 के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भी घोषित राष्ट्रीय टीम में हिमाचल से किसी नेता को राष्ट्रीय पदाधिकारी के तौर पर जगह नहीं मिली है। हालांकि, इसे सीधे तौर पर राज्य की अनदेखी मानना जल्दबाजी होगी। भाजपा पहले ही प्रदेश स्तर पर संगठन को चुनावी मोड में ला चुकी है। प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल के नेतृत्व में 2027 की तैयारियां तेज की गई हैं और पार्टी की बैठकों में चुनावी रणनीति पर मंथन भी हो चुका है।

इसका एक मतलब यह भी हो सकता है कि भाजपा हिमाचल के लिए केंद्रीय संगठन में नए चेहरों को जोड़ने के बजाय फिलहाल मौजूदा प्रदेश नेतृत्व और स्थानीय संगठनात्मक ढांचे पर भरोसा कर रही है।

2027 के लिए BJP का संदेश क्या है?

नितिन नबीन की नई टीम को देखें तो तीन बातें साफ नजर आती हैं- सामाजिक प्रतिनिधित्व, मजबूत संगठन और चुनावी राज्यों पर फोकस। यूपी में OBC और अल्पसंख्यक मोर्चे के जरिए सामाजिक विस्तार की कोशिश दिखाई देती है, जबकि स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी जैसे नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में अहम जिम्मेदारी देकर चुनावी अनुभव का इस्तेमाल करने का संकेत मिलता है।

उत्तराखंड में धामी के नेतृत्व को आगे रखते हुए अनुभवी नेताओं को संगठन में जगह दी गई है। हिमाचल में राष्ट्रीय पदों पर प्रतिनिधित्व भले नहीं दिखा, लेकिन प्रदेश संगठन को चुनावी तैयारी में सक्रिय किया जा चुका है। यानी नई टीम को केवल पदों की सूची के तौर पर देखना अधूरा होगा। 2027 के चुनावी मैदान में BJP संगठन, सामाजिक समीकरण और राजनीतिक नैरेटिव—तीनों को एक साथ साधने की तैयारी करती दिखाई दे रही है।

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