दिल्ली में आज बड़ा सियासी घमासान देखने को मिलेगा। एक तरफ INDIA गठबंधन चुनाव आयोग के खिलाफ 'चलो दिल्ली' मार्च निकाल रहा है, तो दूसरी तरफ BJP 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर कांग्रेस के खिलाफ सड़क पर उतर रही है।
नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली आज एक बड़े सियासी अखाड़े में तब्दील हो गई है। यहां दो बड़े राजनीतिक मोर्चे एक साथ आमने-सामने हैं। विपक्षी INDIA गठबंधन रामलीला मैदान में अपना बड़ा 'चलो दिल्ली रामलीला मार्च' निकाल रहा है। ये लोग वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। सुबह 11 बजे INDIA गठबंधन के सभी सांसद कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में जुटेंगे। इसके बाद दोपहर 12 बजे मिंटो रोड-कनॉट प्लेस जंक्शन से रामलीला मैदान की तरफ मार्च शुरू होगा।
ममता से लेकर तेजस्वी तक ये नेता पहुंचे दिल्ली
इस मार्च में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, हेमंत सोरेन, रेवंत रेड्डी, तेजस्वी यादव और अखिलेश यादव जैसे विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। वहीं दूसरी तरफ, सत्ताधारी BJP भी पलटवार के मूड में है। BJP पश्चिमी दिल्ली में 1984 के सिख विरोधी दंगों की याद में एक मार्च निकाल रही है। उनका आरोप है कि कांग्रेस दंगों की बरसी के दिन राजनीतिक रैली कर रही है।
बीजेपी के यह दिग्गज नेता निकाल रहे मार्च
BJP का यह मार्च सुबह 11:30 बजे पश्चिमी दिल्ली के हरि नगर बस डिपो से शुरू होकर तिलक नगर मेट्रो स्टेशन तक जाएगा। इस मार्च की अगुवाई केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली BJP अध्यक्ष, केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, सरदार एचएस फूलका, मनजिंदर सिंह सिरसा और सांसद बांसुरी स्वराज करेंगे। उनके साथ सिख समुदाय के लोग भी मौजूद रहेंगे। इससे पहले सुबह 10:30 बजे, BJP सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी गुरुद्वारा शहीद गंज साहिब में 1984 दंगों के पीड़ितों के साथ मीडिया से बात करेंगे।

चप्पे चप्पे पर तैनात दिल्ली पुलिस
- रामलीला मैदान के बाहर भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया है और रैली की तैयारियां जोरों पर हैं। यह विरोध प्रदर्शन INDIA गठबंधन के उस 'सार्वजनिक महाभियोग' कार्यक्रम के ठीक बाद हो रहा है, जो उन्होंने 31 अक्टूबर को राजधानी में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित किया था।
- विपक्ष ने एक 'मॉक संसद' (प्रतीकात्मक संसद) का आयोजन किया था। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने CEC के खिलाफ छह आरोपों वाला एक प्रस्ताव पेश किया। इन आरोपों में चुनाव चुराने की साजिश रचना, वोटर लिस्ट से 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम काटना, संसद की मंजूरी के बिना फॉर्म 6 में बदलाव करना, ECINET के जरिए वोटर लिस्ट पर कंट्रोल करना, बाकी दो चुनाव आयुक्तों को अहम फैसलों से दूर रखना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर काम करना शामिल है।
- इस प्रतीकात्मक प्रस्ताव ने विपक्ष और BJP के बीच सियासी जंग छेड़ दी है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चेतावनी दी कि विपक्ष CEC को "बचने" नहीं देगा। वहीं, BJP नेताओं ने इस पूरी कवायद को "नौटंकी" करार दिया और देश के शीर्ष संवैधानिक पदों को मिले संवैधानिक संरक्षण का बचाव किया।
- कई विपक्षी नेताओं ने अपनी इस 'मॉक संसद' का बचाव भी किया। उनका कहना था कि संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे को उठाने की उनकी कोशिशें नाकाम रहीं, जिसके बाद उन्हें इस सार्वजनिक कार्यक्रम का सहारा लेना पड़ा。
इस बीच, BJP बड़ी संख्या में लोगों को जुटा रही है, खासकर सिख समुदाय के लोगों को। 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों और उनके परिवारों के भी इस मार्च में शामिल होने की उम्मीद है। इसके जरिए पार्टी दंगों में कांग्रेस नेताओं की कथित भूमिका को उजागर करना चाहती है। - ये दोनों विरोधी प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं, जब SIR की प्रक्रिया और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर पहले से ही सियासी घमासान मचा हुआ है। इससे पहले 10 अक्टूबर को भी नई दिल्ली में छात्र गुटों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) जैसे राजनीतिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया था। हालांकि प्रशासन ने जंतर-मंतर पर भीड़ जुटाने की इजाजत नहीं दी थी, फिर भी प्रदर्शनकारियों ने वहां इकट्ठा होने की कोशिश की थी。
INDIA गठबंधन की इस 1 नवंबर की रैली का ऐलान कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने 5 अक्टूबर को ही कर दिया था।






