दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे में DU छात्र अक्षत सिंह यादव की मौत हो गई। UPSC की तैयारी कर रहे अक्षत सिंह यादव के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
Delhi Satya Niketan Tragedy: दिल्ली यूनिवर्सिटी के PGDAV कॉलेज के सेकंड ईयर के छात्र अक्षत सिंह यादव उन 7 लोगों में शामिल हैं, जिनकी रविवार को दिल्ली के सत्य निकेतन में बिल्डिंग गिरने की घटना में मौत हो गई। अक्षत की मौत की खबर मिलने के बाद उनका परिवार सोमवार सुबह नई दिल्ली स्थित AIIMS ट्रॉमा सेंटर पहुंचा। बेटे का शव देखकर अक्षत के माता-पिता बुरी तरह टूट गए। वहीं उनकी बहन सदमे में है और कुछ बोल नहीं पा रही है।
कटनी में रहता है अक्षत का परिवार
अक्षत का परिवार मध्य प्रदेश के कटनी की दुबे कॉलोनी में रहता है। उनके पिता राजस्थान के कोटा में काम करते हैं, जबकि उनकी मां घर संभालती हैं। अक्षत ने घटना से ठीक दो दिन पहले अपनी मां से वीडियो कॉल पर बात की थी। उस समय परिवार ने कभी नहीं सोचा था कि यह उनकी आखिरी बातचीत होगी।
आखिरी वीडियो कॉल याद कर रो पड़ीं मां
अक्षत की मां अपने फोन में बेटे की तस्वीर देखकर अपने आंसू नहीं रोक पा रही थीं। उन्हें बार-बार वह वीडियो कॉल याद आ रही थी, जो हादसे से सिर्फ दो दिन पहले हुई थी। उन्होंने कहा, "जिस बच्चे को मैंने 9 महीने अपनी कोख में पाला, जिसे मैंने अपनी गोद में बड़ा किया, आज मैं उसका शव देख रही हूं।" अक्षत के परिवार में उनके माता-पिता और बहन हैं। दुखी मां ने कहा, "पहले हम चार थे, अब हम सिर्फ तीन बचे हैं।"
रक्षाबंधन पर घर आया था अक्षत
परिवार के मुताबिक, अक्षत हाल ही में रक्षाबंधन के मौके पर घर आया था। उसके पिता ने उसे कुछ और दिन घर पर रुकने के लिए मनाने की कोशिश की थी। लेकिन अक्षत ने दिल्ली लौटने की जिद की, क्योंकि उसका टिकट पहले से बुक था। परिवार को क्या पता था कि दिल्ली लौटने के कुछ ही समय बाद उनका बेटा उनसे हमेशा के लिए दूर हो जाएगा।
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तलवारों का शौक था अक्षत को
अक्षत को तलवारों का बहुत शौक था। उसकी मां ने बताया कि हाल ही में उनके घर 2,500 रुपये की एक तलवार आई थी। परिवार ने जब वीडियो कॉल पर अक्षत को वह तलवार दिखाई, तो वह काफी खुश हुआ था। उसने परिवार से कहा था कि तलवार को रखने से पहले उसकी बहन लिची को जरूर दिखाया जाए। आज परिवार के पास उस तलवार से जुड़ी यही याद बची है।
किताबें पढ़ने और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का शौक
परिवार वाले अक्षत को एक होनहार छात्र बताते हैं। उसे किताबें पढ़ने का बहुत शौक था। जब भी उसके पास कुछ पैसे बचते थे, वह किताबें खरीद लेता था। अक्षत पढ़ाई के साथ-साथ प्रतियोगिताओं और क्विज कॉन्टेस्ट में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था। परिवार के मुताबिक, वह पढ़ाई को लेकर काफी गंभीर था और आगे कुछ बड़ा करने का सपना देखता था।
UPSC की तैयारी कर रहा था अक्षत
अक्षत के पिता ने बताया कि उसके टीचर अक्सर उसकी पढ़ाई की तारीफ करते थे। अक्षत अपने पिता से कहा करता था, "पापा, एक दिन मैं अफसर बनूंगा और आपको गर्व महसूस कराऊंगा।" वह UPSC की तैयारी कर रहा था और परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं। करीब डेढ़ महीने की छुट्टी के दौरान भी उसने ज्यादातर समय अपने परिवार के साथ बिताया।
अक्षत के पिता ने की जांच की मांग
बेटे की मौत के बाद अक्षत के पिता ने इस हादसे को लेकर प्रशासन से सवाल किए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी इमारतों की नियमित जांच होनी चाहिए, ताकि वहां रहने या पढ़ने वाले छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा, "लोग यह मानकर अपने बच्चों को इन इमारतों में भेजते हैं कि वे सुरक्षित हैं। हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारा बेटा वहां असुरक्षित होगा।" अक्षत के पिता ने कहा कि अब परिवार के पास अपने बेटे की यादों के अलावा कुछ नहीं बचा है।
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बेटे को खोने का दर्द बयां नहीं कर पा रहे पिता
अक्षत के पिता ने नेपाल में हाल ही में हुई दुखद घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब तक कोई व्यक्ति खुद किसी अपने को खोने का दर्द नहीं झेलता, तब तक दूसरे परिवार के दुख को पूरी तरह समझ पाना मुश्किल होता है। उन्होंने कहा, "अपने बेटे को खोने के बाद ही मैं किसी अपने को खोने का दर्द सच में समझ पाया हूं।"
अधूरे रह गए अक्षत के सपने
परिवार के मुताबिक, अक्षत की पढ़ाई, प्रतियोगिताओं और UPSC की तैयारी से जुड़े कई सपने थे। वह आगे चलकर अफसर बनना चाहता था और अपने पिता को गर्व महसूस कराना चाहता था। लेकिन दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए इस दर्दनाक हादसे ने उसके सभी सपनों को अधूरा छोड़ दिया। इस घटना ने अक्षत के परिवार से एक युवा बेटे और बहन से उसका भाई हमेशा के लिए छीन लिया।


