DMK MP Kanimozhi: डीएमके सांसद कनिमोझी ने कहा है कि उनकी पार्टी सीजेपी (CJP) नेताओं की गिरफ्तारी के खिलाफ उनके साथ खड़ी है। इसके अलावा डीएमके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग करते हुए प्रस्ताव भी पास किया है।

चेन्नई : डीएमके (DMK) सांसद और पार्टी की उप महासचिव कनिमोझी ने शनिवार को साफ किया कि जब सीजेपी (CJP) नेताओं को गिरफ्तार किया गया था, तब उनकी पार्टी ने उन्हें पूरा समर्थन दिया था। उन्होंने बताया कि पार्टी का समर्थन जताने के लिए वह चेन्नई में हुए एक विरोध प्रदर्शन में भी शामिल हुई थीं। पत्रकारों से बातचीत में कनिमोझी ने कहा, "जब सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी हुई थी, तब हमने उनका समर्थन किया था। कल चेन्नई में हो रहे प्रदर्शन में मैं खुद गई थी। वहां जाकर मैंने उन्हें भरोसा दिलाया कि हमारे नेता और पार्टी पूरी तरह से उनके साथ खड़े हैं।"

ज्ञानेश कुमार और सीजेपी पर क्या है डीएमके का अगला कदम

  • कनिमोझी का यह बयान ऐसे समय आया है जब डीएमके संसदीय दल ने एक अहम प्रस्ताव पास किया है। इस प्रस्ताव में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को तुरंत पद से हटाने और उनके काम की जांच की मांग की गई है।
  • डीएमके का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के जरिए सही वोटरों के नाम जानबूझकर वोटर लिस्ट से कटवाए हैं।
  • यह प्रस्ताव उन चार प्रस्तावों में से एक है, जिन्हें डीएमके सांसदों की बैठक में पास किया गया। यह बैठक पार्टी मुख्यालय 'अन्ना अरिवालयम' के मुरासोली मारन मीटिंग हॉल में हुई। इसकी अध्यक्षता डीएमके अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने की।
  • प्रस्ताव के मुताबिक, बिहार पहला राज्य था जहां स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) लागू किया गया था। जब वहां से बड़ी संख्या में वोटरों के नाम काटे जाने की खबरें आईं, तो डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने विधानसभा चुनाव से पहले जुलाई 2025 में ही इसके खिलाफ आवाज उठाई थी। स्टालिन ने इस प्रक्रिया के विरोध में बिहार में निकाली गई 'वोटर अधिकार यात्रा' में भी हिस्सा लिया था।
  • उस दौरान डीएमके संसदीय दल की नेता और उप महासचिव कनिमोझी करुणानिधि भी उनके साथ थीं। इसके बाद, जब चुनाव आयोग ने 27 अक्टूबर 2025 को ऐलान किया कि तमिलनाडु समेत 12 राज्यों में SIR लागू किया जाएगा, तो एमके स्टालिन ने तुरंत खतरे की घंटी बजा दी। उन्होंने कहा कि बीजेपी अपनी इस कथित साजिश को तमिलनाडु में भी फैलाने की तैयारी कर रही है।
  • डीएमके की बैठक में स्टालिन के इस शुरुआती विरोध को दर्ज किया गया। पार्टी ने कहा कि डीएमके देश की उन चुनिंदा पार्टियों में से है, जिन्होंने SIR का सबसे मुखर होकर विरोध किया है। पार्टी का तर्क है कि नवंबर और दिसंबर के महीने में, जब मानसून और त्योहारों का सीजन होता है, तब यह प्रक्रिया चलाना बिल्कुल अव्यावहारिक है।

प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि राज्य सरकार चलाने के बावजूद स्टालिन ने चुनाव आयोग के फैसलों पर सीधे सवाल उठाए। डीएमके सांसदों ने भी SIR के जरिए वोटरों को उनके अधिकार से वंचित करने के खिलाफ संसद में लगातार अपनी आवाज बुलंद की।

डीएमके ने सीएम विजय की पार्टी पर कही बड़ी बात

अपने दूसरे प्रस्ताव में, डीएमके ने छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शनों को पूरा समर्थन दिया है। वहीं, तीसरे प्रस्ताव में पार्टी ने कांग्रेस और टीवीके (TVK) के दोहरे रवैये की कड़ी निंदा की है।

चौथे प्रस्ताव के तहत, डीएमके ने तय किया है कि स्टालिन के मार्गदर्शन में पार्टी के सांसद भारत की राष्ट्रपति को एक औपचारिक याचिका सौंपेंगे। इस याचिका में दो बड़े चुनाव सुधारों की मांग की जाएगी। (एएनआई)