India-UN Row में भारत ने युवाओं और CJP से जुड़ी UN रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं। अनुज स्वरूप ने गुमनाम सबमिशन को आधार बनाने की आलोचना की और रिपोर्ट में अधिक सत्यापन व निष्पक्षता की मांग की।
नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र में भारत ने एक बार फिर अपना कड़ा रुख दिखाते हुए मानवाधिकार एक्सपर्ट की रिपोर्ट को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। यूएन की स्पेशल रिपोर्टर जीना रोमेरो ने भारत में युवाओं और उनके अधिकारों को लेकर एक रिपोर्ट पेश की थी, जिसे भारत ने बिना जांचे-परखे तैयार की गई 'अफवाह' करार दिया। भारतीय राजनयिक अनुज स्वरूप ने साफ शब्दों में कहा कि बिना नाम वाले और बिना किसी पुख्ता सबूत के दावों पर रिपोर्ट तैयार करना संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। आइए समझते हैं कि संयुक्त राष्ट्र में भारत ने किस तरह से इस रिपोर्ट की धज्जियां उड़ाईं और क्या-क्या मुख्य बिंदु रखे।
यूएन की रिपोर्ट को भारत ने बताया अफवाह: बिना सबूत के आरोप
संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति के 81वें सत्र के दौरान भारतीय राजनयिक अनुज स्वरूप ने यूएन की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला।
- गुमनाम दावों पर आधारित: भारत का कहना है कि रिपोर्ट में 1.4 अरब की आबादी वाले देश के लिए बिना नाम वाले इनपुट (Anonymous Submissions) का इस्तेमाल किया गया है।
- गंभीरता की कमी: भारत ने स्पष्ट किया कि दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले देश पर इस तरह के बिना वेरिफाई किए गए आरोप लगाना किसी अफवाह से कम नहीं है।
- विश्वसनीयता पर असर: भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि इस तरह की मनमानी रिपोर्टिंग के कारण ही संयुक्त राष्ट्र और उसकी संस्थाएं वैश्विक स्तर पर अपना भरोसा खो रही हैं।
CJP और युवा आंदोलन पर भारत का मुंहतोड़ जवाब
रिपोर्ट में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) जैसे मज़ाकिया राजनीतिक आंदोलनों और युवाओं पर दबाव की बात कही गई थी, जिसे भारत ने बेबुनियाद बताया।
- दबाव की बात गलत: रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मेंटल हेल्थ और जेंडर जस्टिस पर बात करने वाले युवाओं के खिलाफ बदले की कार्रवाई होती है, जिसे भारत ने खारिज किया।
- संवैधानिक स्वतंत्रता: भारत ने कहा कि देश का संविधान (आर्टिकल 19), स्वतंत्र न्यायपालिका और मीडिया नागरिकों के अभिव्यक्ति की आजादी की पूरी सुरक्षा करते हैं।
- लोकतांत्रिक माहौल: भारत ने सवाल उठाया कि जिस देश में एक सटायरिकल यूथ ग्रुप सरकार से सवाल करता है, मार्च निकालता है और बड़े नेताओं के साथ बैठता है, उसे दबाने वाला राज्य कैसे कहा जा सकता है।
छात्रों के विरोध और युवा भागीदारी पर सरकार का कदम
- भारत ने रिपोर्ट के दावों के विपरीत यह साबित किया कि सरकार युवाओं की चिंताओं को लेकर कितनी गंभीर और संवेदनशील है।
- परीक्षा धांधली पर सख्त एक्शन: प्रतियोगी परीक्षाओं के लीक और विरोध पर सरकार ने तेजी से काम करते हुए पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट में बदलाव किए और पेपर लीक पर सजा दोगुनी की।
- फास्ट-ट्रैक कोर्ट: एग्जाम में धांधली और धोखाधड़ी के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए हर राज्य में फास्ट-ट्रैक अदालतें बनाई गईं।
- विकसित भारत डायलॉग: राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में युवाओं की भूमिका तय करने के लिए 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग' में 50 लाख से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया।








