Donald Trump China visit: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो दिन के दौरे पर चीन पहुंचे, लेकिन शी जिनपिंग उन्हें लेने एयरपोर्ट नहीं गए। ट्रंप और चीन के बीच AI, टैरिफ, ताइवान और ईरान जैसे बड़े मुद्दों पर अहम बातचीत हो सकती है। जानिए इस दौरे का वैश्विक महत्व।
Trump-Xi Jinping Meeting: दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतें जब आमने-सामने होती हैं, तो हर तस्वीर और हर प्रोटोकॉल का अपना राजनीतिक मतलब होता है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे के दौरान भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला. ट्रंप दो दिन के सरकारी दौरे पर बीजिंग पहुंचे, लेकिन चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग उन्हें रिसीव करने एयरपोर्ट नहीं पहुंचे. इसके बजाय उन्होंने अपने उपराष्ट्रपति हान झेंग को स्वागत के लिए भेजा.

बीजिंग एयरपोर्ट की यह तस्वीर अब वैश्विक राजनीति में चर्चा का विषय बन गई है. खासकर इसलिए, क्योंकि हाल के महीनों में ट्रंप जिन देशों के दौरे पर गए थे, वहां उनके स्वागत के लिए खुद राष्ट्राध्यक्ष एयरपोर्ट तक पहुंचे थे. ऐसे में चीन का यह कदम सिर्फ प्रोटोकॉल माना जाए या इसके पीछे कोई कूटनीतिक संदेश छिपा है, इस पर बहस तेज हो गई है.
ट्रंप के स्वागत के लिए उपराष्ट्रपति पहुंचे
चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, बीजिंग एयरपोर्ट पर ट्रंप का स्वागत चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग ने किया. उनके साथ बीजिंग में अमेरिकी राजदूत डेविड पर्ड्यू, अमेरिका में चीन के राजदूत शी फेंग और चीन के विदेश मामलों के कार्यकारी उप मंत्री मा झाओक्सू भी मौजूद रहे. स्वागत को भव्य बनाने के लिए एयरपोर्ट पर सफेद और नीली वर्दी पहने करीब 300 युवाओं को तैनात किया गया था. एक बैंड पार्टी भी मौजूद रही, जिसने औपचारिक स्वागत समारोह को और आकर्षक बनाया. हालांकि, चर्चा इस बात की ज्यादा रही कि खुद राष्ट्रपति शी जिनपिंग एयरपोर्ट क्यों नहीं पहुंचे.
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क्या यह ट्रंप के लिए कूटनीतिक संकेत था?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में स्वागत का तरीका भी कई बार संदेश देने का माध्यम बन जाता है. ट्रंप ने चीन रवाना होने से पहले शी जिनपिंग की जमकर तारीफ की थी और दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर बनाने की बात कही थी. ऐसे में जिनपिंग का एयरपोर्ट न जाना कई लोगों को असामान्य लगा. हालांकि, साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, चीन में राष्ट्रपति आमतौर पर किसी विदेशी नेता का स्वागत करने खुद एयरपोर्ट नहीं जाते. प्रोटोकॉल के तहत यह जिम्मेदारी विदेश मंत्री या वरिष्ठ अधिकारियों की होती है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि 2017 में जब ट्रंप पहली बार राष्ट्रपति रहते हुए चीन गए थे, तब भी उनका स्वागत विदेश विभाग के अधिकारियों ने किया था. इस बार उपराष्ट्रपति को भेजना दरअसल प्रोटोकॉल से एक कदम ऊपर का संकेत माना जा रहा है.
पुतिन और किम जोंग उन के साथ भी ऐसा ही हुआ था
विशेषज्ञों का कहना है कि शी जिनपिंग का यह रवैया नया नहीं है. इससे पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के चीन दौरे के दौरान भी जिनपिंग एयरपोर्ट नहीं गए थे. बताया जाता है कि आखिरी बार 2009 में शी जिनपिंग किसी अमेरिकी राष्ट्रपति को एयरपोर्ट रिसीव करने पहुंचे थे. उस समय वह चीन के उपराष्ट्रपति थे और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के स्वागत के लिए गए थे.
ट्रंप का चीन दौरा क्यों है बेहद अहम?
डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में यह उनका पहला चीन दौरा है और इसे कई मायनों में बेहद अहम माना जा रहा है. अमेरिका और चीन के बीच इस समय व्यापार, टैरिफ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रेयर अर्थ मिनरल्स जैसे मुद्दों पर तनाव और प्रतिस्पर्धा बनी हुई है. सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप और जिनपिंग के बीच इन मुद्दों पर अहम बातचीत हो सकती है. खासकर रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर अमेरिका चीन पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है, जबकि AI सेक्टर में दोनों देशों के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है.
ताइवान और ईरान पर भी हो सकती है चर्चा
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब चीन और ताइवान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. अमेरिका ताइवान को अपना महत्वपूर्ण सहयोगी मानता है और अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि चीन 2027 तक ताइवान पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है. ऐसे में माना जा रहा है कि ट्रंप इस मुद्दे पर चीन का रुख समझने की कोशिश करेंगे. इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी ईरान संकट भी बातचीत का अहम हिस्सा हो सकता है. चीन को ईरान का करीबी साझेदार माना जाता है और अमेरिका इस समय क्षेत्रीय तनाव को कम करने के विकल्प तलाश रहा है.
ट्रंप के साथ कौन-कौन बीजिंग पहुंचा?
डोनाल्ड ट्रंप अपने इस हाई-प्रोफाइल दौरे पर अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और कई बड़े अमेरिकी उद्योगपतियों को भी साथ लेकर पहुंचे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ राजनीतिक दौरा नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े कई अहम फैसलों की भूमिका भी तैयार कर सकता है.
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