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क्या विदेश जाने पर लगने वाला था नया टैक्स? PM मोदी की एंट्री से पलटा पूरा मामला! जानिए पूरा सच
विदेश यात्रा टैक्स पर अचानक फैली अफवाह ने देशभर में सनसनी फैला दी। PM मोदी को खुद सामने आकर सफाई देनी पड़ी। West Asia संकट, बढ़ती तेल कीमतें, Forex दबाव और UAE डील के बीच सवाल-क्या भारत पर आर्थिक खतरे के बादल मंडरा रहे हैं?

PM Modi Foreign Travel Tax: देश के मध्यम वर्ग और बार-बार विदेश यात्रा करने वाले कॉर्पोरेट जगत के बीच पिछले 24 घंटों से एक ऐसी खबर हवा की तरह फैल रही थी, जिसने हर किसी की धड़कनें बढ़ा दी थीं। दावा किया जा रहा था कि सरकार देश के राजकोषीय घाटे की भरपाई के लिए विदेश यात्राओं पर एक नया सेस या सरचार्ज लगाने जा रही है। लेकिन शुक्रवार रात इस पूरे विवाद पर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शीर्ष सरकारी सूत्रों ने सामने आकर स्थिति साफ की। आइए जानते हैं क्या है इस पूरे मामले का सच और क्यों उड़ी यह अफवाह।

आधी रात का वो ट्वीट: जब PM मोदी को खुद संभालनी पड़ी कमान
आम तौर पर नीतिगत मामलों पर मंत्रालय स्तर से स्पष्टीकरण आता है, लेकिन इस बार मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दखल देना पड़ा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (ट्विटर) पर एक दुर्लभ और बेहद कड़ा कदम उठाते हुए पीएम मोदी ने एक मीडिया रिपोर्ट का सीधा खंडन किया।
Its not accurate, its totally false and Prime Minister Modiji himself had to fact check it. https://t.co/QepczmeKtSpic.twitter.com/aW5VkYROjx
— Aryan (@chinchat09) May 16, 2026
प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में लिखा: "यह पूरी तरह से झूठा है। इसमें ज़रा भी सच्चाई नहीं है। विदेश यात्रा पर इस तरह की पाबंदियाँ लगाने का कोई सवाल ही नहीं उठता। हम अपने लोगों के लिए 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस' और 'ईज़ ऑफ़ लिविंग' को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।" पीएम के इस बयान ने उन लाखों भारतीय यात्रियों को बड़ी राहत दी है जो इस तरह की किसी पाबंदी या अतिरिक्त टैक्स के डर से सहमे हुए थे।
कहां से शुरू हुई अफवाह? वो टीवी रिपोर्ट जिसे वापस लेना पड़ा
इस पूरे विवाद की जड़ में CNBC-TV18 की एक खोजी रिपोर्ट थी। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहे तनाव और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के कारण भारत के राजकोषीय मोर्चे पर भारी दबाव है। इसी वित्तीय तनाव को कम करने के लिए सरकार विदेश यात्राओं पर एक 'अस्थायी सेस या सरचार्ज' लगाने पर मंथन कर रही है। हालांकि, जैसे ही पीएम मोदी का कड़ा रुख सामने आया, संबंधित मीडिया संस्थान ने तुरंत अपनी इस रिपोर्ट को वापस ले लिया।
दिलचस्प बात यह है कि यह अफवाह ऐसे समय पर उड़ी जब पीएम मोदी ने हाल ही में देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए नागरिकों से स्वेच्छा से एक साल तक अनावश्यक विदेशी यात्राओं से बचने की अपील की थी। अफवाहबाजों ने प्रधानमंत्री की इस नैतिक अपील को एक 'अनिवार्य टैक्स' के रूप में पेश कर दिया।
"टैक्स कैसे वसूलोगे?"सरकारी सूत्रों ने उठाए बुनियादी कूटनीतिक सवाल
प्रधानमंत्री के खंडन के बाद वित्त मंत्रालय और सरकार के शीर्ष सूत्रों ने इस रिपोर्ट को 'कोरी अटकलबाज़ी' और 'तथ्यों से कोसों दूर' करार दिया। सूत्रों ने इस बात पर हैरानी जताई कि बिना किसी तकनीकी समझ के ऐसी खबरें कैसे चलाई जा सकती हैं।
सरकारी सूत्रों ने मीडिया की थ्योरी को खारिज करते हुए कई तीखे सवाल दागे:
- टैक्सेबल इवेंट क्या होगा?: विदेशी यात्रा को कोई 'टैक्स योग्य घटना' कैसे माना जा सकता है? क्या टैक्स टिकट बुकिंग पर लगेगा, फॉरेक्स (विदेशी मुद्रा) बदलने पर लगेगा या इमिग्रेशन काउंटर पर वसूला जाएगा?
- खर्च की अनिश्चितता: आज के दौर में हर यात्री नकद विदेशी मुद्रा नहीं खरीदता। लोग क्रेडिट कार्ड, इंटरनेशनल डेबिट कार्ड या फॉरेक्स कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। कई लोग विदेशी वेबसाइटों से सीधे टिकट बुक करते हैं। ऐसे में इस टैक्स का हिसाब-किताब रखना तकनीकी और कानूनी रूप से असंभव है।
- पड़ोसी देशों का सफर: भारत के कई नागरिक सड़क या रेल मार्ग से भी पड़ोसी देशों की यात्रा करते हैं, उन पर यह नियम कैसे लागू हो सकता था?
वैश्विक संकट के बीच UAE से 'एनर्जी सिक्योरिटी' की पक्की गारंटी
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है। वर्तमान में पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भारी उथल-पुथल मची है। पांच देशों के अपने रणनीतिक दौरे के तहत संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुंचे पीएम मोदी ने इस संकट का तोड़ निकाल लिया है।
भारत और UAE ने 'रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार' (Strategic Petroleum Reserves) को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) भारत के भूमिगत रणनीतिक भंडारों में कच्चा तेल जमा करेगी। यह कदम विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव और ईंधन की महंगाई को कम करने के लिए उठाया गया एक ईमानदार प्रयास है। सूत्रों का कहना है कि सरकार जब खुद मोर्चे पर रहकर नागरिकों को राहत दे रही है, तो ऐसे संवेदनशील समय में टैक्स जैसी भ्रामक अफवाहें फैलाना देश के आर्थिक हितों के साथ अन्याय है।
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