HFSS Food Restrictions: 'पापा मुझे चिप्स चाहिए, मम्मी मुझे लेज़ चाहिए, दादी मुझे जूस दो...' स्कूल जाने वाले बच्चों का ये आम डायलॉग है। आते-जाते जंक फूड खाना उनकी आदत बन गई है। आगे चलकर ये बच्चों की सेहत पर भारी पड़ सकता है। अब लगता है कि हमारे अधिकारी भी इस खतरे को लेकर जाग गए हैं।
Junk Food Ban Near Schools: बच्चे जब स्कूल आते-जाते हैं, तो दुकानों पर टंगे पैकेट उन्हें खूब ललचाते हैं। मम्मी-पापा या दादा-दादी से मिले पॉकेट मनी से वे लेज़, कुरकुरे और जूस जैसी चीजें खरीद लेते हैं। इनमें फैट, नमक और चीनी कूट-कूट कर भरी होती है। बच्चे इन्हें रास्ते में खाते हैं या घर ले आते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि ये चीजें बच्चों की सेहत पर बहुत बुरा असर डाल रही हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक बड़ा प्रस्ताव रखा है।
FSSAI ने स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में ज्यादा फैट, चीनी और नमक वाले फूड आइटम्स की बिक्री पर बैन लगाने का प्रस्ताव दिया है। प्राधिकरण के इस प्रस्ताव के मुताबिक इन चीजों पर बैन लग सकता है:
- चिप्स
- कोल्ड ड्रिंक्स
- चॉकलेट्स
- समोसा
- पिज्जा और बर्गर जैसे फास्ट फूड
इस मामले में FSSAI फूड सेफ्टी को लेकर कुछ नए स्टैंडर्ड्स भी तय करने वाला है। इसके तहत ज्यादा फैट, नमक और मीठे वाले फूड आइटम्स पर लगाम कसी जाएगी। FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रजित पुन्यानी ने बताया कि इस योजना का असली मकसद बच्चों को बचपन से ही अनहेल्दी खाने की आदतों से दूर रखना है। प्रस्ताव का टारगेट बच्चों तक ऐसे जंक फूड की आसान पहुंच को कम करना है। हालांकि, दुकानदार उन चीजों को बेच सकेंगे जो HSS (हाई फैट, सॉल्ट, शुगर) कैटेगरी में नहीं आती हैं।
दुकानदारों की बढ़ी टेंशन
HSS का मतलब है वो खाना जिसमें फैट, नमक और चीनी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। प्राधिकरण का मानना है कि स्कूलों के बाहर बैन लगने से फूड कंपनियों को भी अपनी रेसिपी बदलने पर मजबूर होना पड़ेगा। एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि स्कूलों के आसपास जंक फूड की भरमार बच्चों की सेहत बिगाड़ रही है। ये अच्छी बात है कि अधिकारी अब एक्शन मोड में आ गए हैं। लेकिन, स्कूलों के पास छोटी-मोटी दुकान चलाने वाले लोग इससे काफी टेंशन में हैं। उनका कहना है कि अगर इन चीजों की बिक्री पर रोक लगी, तो उनका धंधा पूरी तरह से चौपट हो जाएगा।
इन सबके बीच, महाराष्ट्र सरकार ने HSS फूड प्रोडक्ट्स को लेकर और भी सख्त नियम लागू कर दिए हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा आयुक्त के नियमों के मुताबिक, स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में आने वाली दुकानों पर ऐसे प्रोडक्ट्स बेचने की सख्त मनाही है। सरकारी आदेश के बावजूद वहां 133 दुकानें नियमों की धज्जियां उड़ाती पाई गईं। इसके बाद 51 दुकानों को बंद करने का आदेश दे दिया गया है।
वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति और भी डराने वाली है। भारत में 5 से 19 साल के ओवरवेट या मोटापे के शिकार बच्चों की संख्या 2015 में 28 मिलियन थी, जो 2025 तक बढ़कर करीब 41 मिलियन हो गई है। अनुमान है कि 2040 तक यह आंकड़ा 56 मिलियन तक पहुंच सकता है।
