ग्वालियर में कार पर बने किस मार्क्स ने गाड़ी मॉडिफिकेशन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानिए काली फिल्म, मॉडिफाइड साइलेंसर, आपत्तिजनक स्टिकर और अन्य बदलावों पर कब ट्रैफिक पुलिस चालान काट सकती है।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर की एक घटना ने गाड़ी मालिकों को एक बार फिर ट्रैफिक नियमों की याद दिला दी है. यहां एक कार पर लगे 'किस मार्क्स' यानी चुंबन के निशान चर्चा का विषय बन गए. इस एक घटना ने ये बहस छेड़ दी है कि गाड़ी में कौन-कौन से बदलाव आपको मुश्किल में डाल सकते हैं, खासकर दिल्ली-NCR जैसे शहरों में जहां ट्रैफिक पुलिस की नज़र हर गाड़ी पर रहती है।
अक्सर लोग शौक में या अपनी गाड़ी को दूसरों से अलग दिखाने के लिए उसमें कई तरह के बदलाव करवा लेते हैं. लेकिन कई बार ये शौक जेब पर बहुत भारी पड़ जाता है. आइए जानते हैं कि वो कौन सी आम गलतियां हैं, जिन पर पुलिस तुरंत चालान काट सकती है।
काली फिल्म का चक्कर
दिल्ली-NCR में ट्रैफिक पुलिस की सबसे पसंदीदा गलतियों में से एक है गाड़ी के शीशों पर लगी काली फिल्म. सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इस पर सख्त पाबंदी है, ताकि गाड़ी के अंदर कौन है और क्या हो रहा है, यह साफ तौर पर देखा जा सके।
नियमों के मुताबिक, गाड़ी के शीशों पर किसी भी तरह की टिंटेड फिल्म लगाना गैर-कानूनी है. इसके बावजूद लोग अक्सर यह गलती कर बैठते हैं और फिर पकड़े जाने पर मोटा जुर्माना भरते हैं. तो अगली बार शीशों पर फिल्म लगवाने का ख्याल आए, तो चालान की रकम ज़रूर याद कर लीजिएगा।
मॉडिफाइड साइलेंसर का शोर
आजकल युवाओं में अपनी बाइक या कार का साइलेंसर बदलवाने का चलन बहुत आम है. कंपनी से लगे साइलेंसर को हटाकर तेज़ आवाज़ वाले या 'पटाखा' निकालने वाले साइलेंसर लगवाना सीधे-सीधे ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन है।
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यह न सिर्फ ध्वनि प्रदूषण फैलाता है, बल्कि गाड़ी के मूल डिज़ाइन में किया गया बदलाव भी माना जाता है. ट्रैफिक पुलिस ऐसे वाहनों को पकड़ने के लिए अक्सर अभियान चलाती है और पकड़े जाने पर भारी जुर्माना लगाया जाता है।
गाड़ी पर 'कलाकारी' पड़ सकती है भारी
अब वापस ग्वालियर वाली घटना पर आते हैं. गाड़ी पर लगे 'किस मार्क्स' देखने में भले ही एक मज़ाक या अनोखी चीज़ लगें, लेकिन कानून की नज़र में यह भी एक गलती हो सकती है. मोटर व्हीकल एक्ट के तहत, गाड़ी पर किसी भी तरह के ऐसे स्टिकर, निशान या पेंट करवाना जो अश्लील लगे या दूसरे ड्राइवरों का ध्यान भटकाए, वो आपको मुश्किल में डाल सकता है।
हालांकि यह पुलिसकर्मी के विवेक पर निर्भर करता है, लेकिन अगर उन्हें यह आपत्तिजनक लगता है तो वे चालान काट सकते हैं. कहने का मतलब साफ है, अपनी गाड़ी को थोड़ा अलग दिखाना अच्छी बात है, लेकिन ये बदलाव कानून के दायरे में ही होने चाहिए, वरना शौक पूरा करने के चक्कर में जेब खाली हो सकती है।
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