Hormuz Strait Crisis: होर्मुज स्ट्रेट पर एक बार फिर बंद होने का खतरा मंडरा रहा है, दुनियाभर की टेंशन बढ़ गई है, लेकिन भारत इस बार बेफिक्र है? जानिए क्यों...
India New Oil Strategy: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच टकराव फिर शुरू हो गया है। रविवार को ईरान पर अमेरिकी हमले हुए, सोमवार को ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की और अब फिर धमकी दी जा रही है कि होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया जाएगा। इससे दुनिया टेंशन में आ गई है, लेकिन इस बार भारत बेफिक्र है, क्योंकि अब हालत मार्च वाले संकट से बिल्कुल अलग है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर पिछले 3 महीने में नई दिल्ली ने बैकस्टेज ऐसा क्या गेम प्लान तैयार किया है, जिसने हॉर्मुज के खतरे को बेअसर कर दिया? आइए जानते हैं इनसाइड स्टोरी...
होर्मुज संकट से भारत इस बार बेफिक्र क्यों है?
पिछले 90 दिनों में भारत ने अपनी तेल खरीदने की पूरी रणनीति बदल दी है। न सिर्फ नए देशों से तेल मंगाना शुरू किया, बल्कि लंबे कॉन्ट्रैक्ट्स पर निर्भरता भी कम कर दी। यही वजह है कि आज भारत मार्च के मुकाबले कहीं ज्यादा मजबूत स्थिति में खड़ा है।
मार्च में क्या हुआ था?
मार्च में जब खाड़ी देशों से तेल सप्लाई में दिक्कत आई थी, तो भारत को इसका सीधा झटका लगा था। वजह साफ थी, भारत अपनी जरूरत का करीब 90% कच्चा तेल बाहर से मंगाता है, यानी रोजाना लगभग 5 मिलियन बैरल बाहर से ही सप्लाई होती है। इसमें से ज्यादातर हिस्सा सऊदी अरब और इराक जैसे मिडिल ईस्ट के देशों से लंबे कॉन्ट्रैक्ट के जरिए आता था। जब सप्लाई में रुकावट आई, तो भारत के पास कोई प्लान B नहीं था। इसका नतीजा ये हुआ कि सरकार को इमरजेंसी में विदेश मंत्री एस जयशंकर को यूएई भेजना पड़ा, फिर खुद पीएम मोदी को भी दौरा करना पड़ा। NSA अजित डोभाल सऊदी अरब गए और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी को कतर जाना पड़ा।
अब भारत ने क्या बदल दिया?
मार्च के झटके के बाद भारत ने चुपचाप अपनी पूरी स्ट्रैटेजी पलट दी। सरकारी तेल कंपनियों ने सिर्फ खाड़ी देशों पर भरोसा करना बंद कर दिया और तीन बड़े बदलाव किए।
पहला बदलाव
भारत अब रूस, अमेरिका और वेस्ट अफ्रीका जैसे देशों से भी तेल मंगा रहा है। अप्रैल में तो भारत ने वेनेजुएला से भी करीब साढ़े 12 मिलियन बैरल तेल मंगाया, जो फरवरी 2020 के बाद सबसे ज्यादा था। मतलब अब भारत सिर्फ खाड़ी देशों पर ही नहीं, बल्कि रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका, ब्राजील, गुयाना और दूसरे सप्लायरों से भी कच्चा तेल खरीदने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इससे किसी एक इलाके में संकट आने पर पूरी सप्लाई प्रभावित होने का खतरा कम हो सकता है।
दूसरा बदलाव
पहले भारत लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट पर निर्भर रहता था, जिसमें सालों पहले तय कीमत पर तेल मिलता था। अब भारत स्पॉट मार्केट से भी ज्यादा खरीदारी कर रहा है, यानी जो तेल पहले से जहाज में लदा हुआ है, उसे सीधे मार्केट रेट पर खरीद लिया जाता है। इससे फायदा ये होता है कि जरूरत पड़ने पर तुरंत तेल मिल जाता है, किसी एक सप्लायर के भरोसे नहीं रहना पड़ता।
तीसरा बदलाव
भारत ने अब सीधे विदेशी सप्लायर से डील करने के बजाय बड़ी इंटरनेशनल ट्रेडिंग कंपनियों से हाथ मिलाना शुरू कर दिया है। रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी ने ट्रैफिगुरा और विटोल जैसी कंपनियों से वेनेजुएला का तेल खरीदा। भारत पेट्रोलियम ने भी ट्रैफिगुरा के साथ डील की, और इंडियन ऑयल ने विटोल ग्रुप के साथ मिलकर अपना ट्रेडिंग डेस्क तक बना लिया। ये ट्रेडिंग कंपनियां दुनियाभर से तेल जमा करके रखती हैं, इसलिए संकट के समय तुरंत सप्लाई कर सकती हैं।
रूस को पेट्रोल दे रहा भारत
2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत रूस से भी काफी तेल खरीद रहा है, क्योंकि रूस सस्ते दाम पर तेल दे रहा था। जुलाई में भारत ने रूस से रोजाना करीब 2.7 मिलियन बैरल तेल मंगाया, जो मई के मुकाबले काफी ज्यादा है। लेकिन दिलचस्प बात ये है कि अब रूस खुद मुश्किल में है। यूक्रेन लगातार रूस की रिफाइनरियों और तेल टर्मिनल्स पर ड्रोन हमले कर रहा है, जिससे रूस में ही पेट्रोल की किल्लत हो गई है। यहां तक कि भारत ने ही रूस को 60 से 70 हजार टन पेट्रोल बेचा है। इसी वजह से भारत सिर्फ रूस के भरोसे नहीं बैठा, बल्कि दूसरे रास्ते भी खोल लिए।
तो क्या पेट्रोल-डीजल के दाम अब नहीं बढ़ेंगे
एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय के लिए पूरी तरह बंद हो जाए, तो दुनियाभर में तेल के दाम फिर भी बढ़ सकते हैं, क्योंकि ये रास्ता आज भी ग्लोबल एनर्जी ट्रेड के लिए बेहद अहम है। लेकिन भारत के पास अब पहले जैसी बेबसी नहीं है। कई सप्लायर, कई रास्ते और फ्लेक्सिबल खरीदारी की वजह से भारत झटका झेलने की बेहतर स्थिति में है।
भारत के लिए अब आगे क्या?
भारत की एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत करने की ये कोशिश अभी भी जारी है। हाल ही में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल स्पेन, बेल्जियम और फिनलैंड के दौरे पर गए हैं, ताकि रिन्यूएबल एनर्जी और सप्लाई चेन को लेकर नई पार्टनरशिप बनाई जा सके। यानी सिर्फ तेल ही नहीं, भारत अपनी पूरी एनर्जी स्ट्रैटेजी को मजबूत बनाने में जुटा है।


