US-Iran Conflict: अमेरिका ने होर्मुज के पास ईरान के मिसाइल सिस्टम पर हमला किया। जवाब में ईरान ने कई खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया।

US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव एक बार फिर बढ़ गया है। रविवार को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। इसके कुछ ही समय बाद ही ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका से जुड़े कई ठिकानों और सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाने का दावा किया। लगातार हो रहे हमलों और जवाबी हमलों ने मिडिल ईस्ट (Middle East) में तनाव फिर से बढ़ा दिया है।

अमेरिका ने ईरान के किन ठिकानों को निशाना बनाया?

अमेरिकी मीडिया आउटलेट Axios ने एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने के मकसद से कई ठिकानों पर कार्रवाई की गई। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों में ईरान के मिसाइल सिस्टम, एयर डिफेंस साइट्स, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की स्पीड बोट्स को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि इस ऑपरेशन का उद्देश्य कमर्शियल जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना और होर्मुज में किसी भी तरह के सैन्य खतरे को कम करना है।

ईरान के दक्षिणी बंदरगाह शहर पर भी हमले

ईरान के दक्षिणी बंदरगाह शहर बंदर अब्बास (Bandar Abbas) और पास के केशम द्वीप (Qeshm Island) पर 10 से 11 रॉकेट गिरने की पुष्टि हुई है। केशम के गवर्नर हुसैन अमीर तैमूरी के अनुसार, सभी निशाने सैन्य ठिकाने थे और किसी भी नागरिक के हताहत होने की खबर नहीं है। हालांकि, ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, होर्मोज़गान प्रांत में एक मेंटेनेंस कर्मचारी की मौत हुई है और दो अन्य घायल हुए हैं।

डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद शुरू हुई कार्रवाई

CENTCOM के अनुसार, यह सैन्य अभियान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर शुरू किया गया। अमेरिका का कहना है कि ईरानी गतिविधियों के कारण दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा खतरे में पड़ रही थी। अमेरिकी सेना ने दावा किया कि वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई कर रही है।

ईरान का पलटवार, खाड़ी देशों को बनाया निशाना

अमेरिकी कार्रवाई के कुछ ही समय बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के अनुसार, उसने अमेरिका से जुड़े कई सैन्य ठिकानों और सुविधाओं को निशाना बनाया, जिनमें जॉर्डन में कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, कुवैत में HIMARS मिसाइल सिस्टम और सैन्य सुविधाएं, ओमान में विमानवाहक पोत से जुड़ी सपोर्ट सुविधाएं, कतर में विमान रखरखाव केंद्र और ड्रोन संचालन से जुड़े ठिकाने शामिल हैं। हालांकि, इन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है।

ईरानी हमले में किन खाड़ी देशों को नुकसान

कुवैत

ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, कुवैत में अमेरिकी HIMARS मिसाइल लॉन्चर और गोला-बारूद डिपो को निशाना बनाया गया। कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि उनके तीन बॉर्डर सेंटर और एक ऑफशोर ऑयल ड्रिलिंग प्लेटफॉर्म को नुकसान पहुंचा है।

कतर

यहां एक जेट मेंटेनेंस सेंटर और कमांड फैसिलिटी पर मिसाइल का मलबा गिरने से एक बच्चे सहित तीन लोग घायल हो गए। कतर ने इस हमले के लिए ईरान को पूरी तरह कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया है।

जॉर्डन, ओमान UAE और बहरीन

जॉर्डन में अमेरिकी रडार साइट और ड्रोन हैंगर्स को निशाना बनाया गया, जबकि ओमान में एयरक्राफ्ट कैरियर सपोर्ट और रीफ्यूलिंग प्लेटफॉर्म्स पर ड्रोन हमले हुए। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन ने दावा किया है कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने अपनी सीमाओं के बाहर ही कई ईरानी मिसाइलों और हवाई खतरों को मार गिराया।

होर्मुज क्यों बना जंग का केंद्र?

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) दुनिया के सबसे बिजी और अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक कच्चे तेल (Crude Oil) का एक बड़ा हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान ने इस साल की शुरुआत में 'परेशियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' का गठन किया था। अमेरिकी हमलों के बाद इस अथॉरिटी ने घोषणा कर दी है कि अमेरिकी सेना की 'अवैध हरकतों' के कारण अब किसी भी जहाज को इस जलमार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। जब तक क्षेत्र में स्थिरता नहीं आती, इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं होगा। दूसरी ओर, अमेरिका ने ईरान के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। CENTCOM ने बयान जारी कर कहा, 'ईरान का इस जलडमरूमध्य पर कोई कंट्रोल नहीं है। जहाजों की आवाजाही जारी है और अमेरिकी सेना अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत फ्रीडम ऑफ नेविगेशन की रक्षा के लिए मुस्तैद है।'

ट्रंप ने कहा, 'सीजफायर खत्म'

इस सैन्य टकराव ने दोनों देशों के बीच चल रहे 60 दिनों के अंतरिम शांति समझौते को पटरी से उतार दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अब इस सीजफायर को प्रभावी रूप से खत्म मानते हैं, हालांकि उन्होंने भविष्य में बातचीत के रास्ते खुले रखने की बात कही है। यह हमला ठीक उस बैठक के एक दिन बाद हुआ, जब ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने मस्कट में ओमानी विदेश मंत्री से होर्मुज के मुद्दे पर बात की थी। लेकिन ईरान का आधिकारिक रुख अब भी सख्त है। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर चेतावनी देते हुए लिखा, ‘एकतरफा समझौतों का दौर अब खत्म हो चुका है। हमने आपसे कहा था अपनी बात पर कायम रहें या कीमत चुकाएं। हकीकत अब आपके सामने है।’