Hormuz Strait Reopening News: होर्मुज स्ट्रेट क्या है? यह दुनिया के लिए इतना अहम क्यों माना जाता है? क्या अमेरिका-ईरान पीस डील सच में हो गई है? हॉर्मुज स्ट्रेट कब खुलेगा? इससे भारत को कितना फायदा हो सकता है?

US-Iran Peace Deal Latest Update: लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच चली आ रही तनातनी अब खत्म होने की कगार पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया ट्रूथ पर ऐलान किया है कि ईरान के साथ एक ऐतिहासिक शांति समझौता फाइनल हो चुका है। इसके बाद दुनिया का सबसे अहम तेल सप्लाई मार्ग होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) खोल दिया जाएगा। इसके साथ ही अमेरिका की ओर से लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की भी बात कही गई है। अगर ऐसा होता है, तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक नहीं, बल्कि भारत समेत पूरी दुनिया के तेल बाजार पर दिखाई दे सकता है।

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ईरान-अमेरिका शांति डील को लेकर क्या फाइनल हुआ?

पिछले कुछ महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ था। हालात ऐसे बन गए थे कि दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट पर आवाजाही प्रभावित होने लगी। इस दौरान तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ी और कई देशों को सप्लाई को लेकर चिंता सताने लगी। अब डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि दोनों देशों के बीच समझौते की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और अमेरिकी नौसैनिक प्रतिबंध हटाने की मंजूरी दे दी गई है। इस डील के तहत हॉर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी टैक्स या फीस के तुरंत खोला जा रहा है। अमेरिका अपनी नौसेना को वहां से तुरंत हटा रहा है। इस समझौते के तहत लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाइयां हमेशा के लिए रोक दी गई हैं।

होर्मुज स्ट्रेट क्यों इतना अहम है?

यह समंदर का एक ऐसा संकरा (पतला) रास्ता है, जहां से दुनिया का करीब 20% यानी पांचवां हिस्सा तेल और नेचुरल गैस गुजरती है। जब इस साल 28 फरवरी को जंग शुरू हुई, तो ईरान ने इस रास्ते को बंद कर दिया था। जवाब में अमेरिका ने भी अपनी नौसेना लगाकर ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी कर दी थी। नतीजा यह हुआ कि दुनियाभर में तेल का संकट गहराने लगा। अब पाकिस्तान, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों की मध्यस्थता के बाद दोनों देश पीछे हटने को तैयार हो गए हैं।

होर्मुज स्ट्रेट कब से खुलेगा?

ट्रंप ने बड़ा दावा जरूर किया है, लेकिन समझौते की सभी शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं हुई हैं। दूसरी तरफ ईरान ने भी साफ कहा है कि आगे बढ़ने से पहले अमेरिका को अपने वादों पर भरोसा दिखाना होगा। यानी स्थिति सकारात्मक जरूर दिख रही है, लेकिन फाइनल तस्वीर अभी सामने आना बाकी है। मध्यस्थ देशों की ओर से कहा गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर हो सकते हैं। अगर यह प्रक्रिया सफल रहती है, तो इसके बाद समुद्री आवाजाही और तेल सप्लाई सामान्य होने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ सकते हैं।

ईरान की क्या हैं प्रमुख मांगें?

रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने कुछ प्रमुख मुद्दों पर अपनी शर्तें रखी हैं। ईरान की मांग है कि क्षेत्र में सैन्य तनाव पूरी तरह खत्म किया जाए। आर्थिक और समुद्री प्रतिबंधों में राहत दी जाए और विदेशों में फंसी ईरानी संपत्तियों को जारी किया जाए। ईरान का कहना है कि इन मुद्दों पर ठोस कदम उठने के बाद ही आगे की प्रक्रिया आसान होगी।

भारत के लिए यह खबर क्यों राहत वाली है?

भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल (Crude Oil) दूसरे देशों से खरीदता है। इसमें से एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी हॉर्मुज स्ट्रेट वाले रास्ते से होकर भारत पहुंचता है। ऐसे में इस रास्ते का खुलना भारत के लिए राहत भरा माना जा रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद बढ़ सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि पेट्रोल और डीजल तुरंत सस्ते हो जाएंगे। कीमतों पर कई अन्य ग्लोबल और डोमेस्टिक फैक्टर्स भी असर डालते हैं। लेकिन सप्लाई को लेकर चिंता कम होना निश्चित रूप से सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।