स्वीडन में लोग सुबह 7 बजे बच्चों को स्कूल छोड़कर सीधे ऑफिस पहुंच जाते हैं। यहां 'जल्दी आओ, जल्दी जाओ' का नियम चलता है। लोग सुबह जल्दी काम शुरू करते हैं ताकि शाम को समय पर घर जाकर परिवार के साथ वक्त बिता सकें।

विदेश जाने वाले लोग अक्सर वहां के वर्क कल्चर की तारीफ करते हैं। भारतीय कंपनियों में कर्मचारियों को कई बार बिना किसी तय समय के काम करना पड़ता है। लेकिन विदेशों में लोग सिर्फ अपने वर्किंग आवर्स में काम करते हैं और बाकी समय अपनी पर्सनल लाइफ को देते हैं। स्वीडन शिफ्ट हुई एक भारतीय महिला स्वाति ने भी कुछ ऐसा ही अनुभव शेयर किया है। इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में उन्होंने बताया कि स्वीडन के ऑफिस की टाइमिंग देखकर वो कितनी हैरान रह गईं।

स्वाति बताती हैं कि भारत के उलट स्वीडन में लोग बहुत सुबह ही ऑफिस पहुंच जाते हैं। जब वह सुबह 7:45 बजे ऑफिस पहुंचीं, तो पार्किंग 70 प्रतिशत तक भर चुकी थी। जबकि भारत में आमतौर पर सुबह 9 बजे से पहले कोई ऑफिस नहीं पहुंचता।

उन्होंने बताया कि अगर वह किसी दिन सुबह 8:15 बजे भी ऑफिस पहुंचती हैं, तो उनकी कार पार्किंग में आखिरी तीन या चार कारों में से एक होती है। खासकर सोमवार और मंगलवार को काफी भीड़ होती है। लोग सुबह 7 बजे के आसपास बच्चों को स्कूल छोड़कर सीधे ऑफिस आ जाते हैं। यहां 'जल्दी आओ, जल्दी जाओ' का कल्चर है। जल्दी काम शुरू करने का मतलब है कि आप जल्दी घर जाकर अपने परिवार के साथ समय बिता सकते हैं।

View post on Instagram
 

स्वाति ने साफ किया कि वह डेस्क और ऑफिस जॉब्स के बारे में बात कर रही हैं। उनके इस पोस्ट पर कई लोगों ने रिएक्शन दिए हैं। ज्यादातर लोगों का कहना है कि जल्दी काम खत्म करके घर जाना एक बहुत अच्छी बात है। वहीं, भारत में ज्यादातर कंपनियों का हाल यह है कि आप चाहे कितनी भी जल्दी ऑफिस चले जाएं, लेकिन आपको घर लौटने में देर हो ही जाती है, है ना?