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Iran: 'घमंडी ट्रंप को सत्ता से बेदखल करने का वक्त', ईरानियों के खून से सने हैं अमेरिका के हाथ
Iran Protest: ईरान में महंगाई, गिरती मुद्रा और खराब आर्थिक हालातों को लेकर पिछले 13 दिनों से जनता सड़कों पर प्रदर्शन कर रही है। इस दौरान ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने जनता को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति टंप को निशाना बनाया।

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को निशाना बनाते हुए कहा, घमंडी ट्रंप को अब सत्ता से हटाने का समय आ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके हाथ ईरानियों के खून से सने हुए हैं।
इतना ही नहीं, खामेनेई ने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति को जल्द हटा दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने अमेरिका से अपने देश की समस्याओं पर ध्यान देने को कहा। ईरान के सुप्रीम लीडर ने कहा कि प्रदर्शनकारी दूसरे देश के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए अपनी ही सड़कों को बर्बाद कर रहे हैं"।
बता दें कि ट्रंप ने ईरान में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर ईरान सरकार को धमकी दी थी। ट्रंप ने साफ कहा था कि अगर आप शांतिपूर्वक विरोध करने वालों पर हिंसा करेंगे तो हमें सख्ती बरतनी पड़ेगी। इसके लिए ईरा को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया था कि खामेनेई खुद ईरान छोड़कर कहीं बाहर जाने की सोच रहे हैं और देश में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। बता दें कि ईरान में आर्थिक परेशानियों को लेकर शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब गिरती अर्थव्यवस्था और ईरानी रियाल के कमजोर होने के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का रूप ले चुके हैं।
गुरुवार 8 जनवरी को ईरान का जन आंदोलन सबसे बड़े सरकार विरोधी प्रदर्शन में बदल गया, जो दो हफ्तों से चल रहा है। शुक्रवार को भी विरोध प्रदर्शन जारी है और देशभर के 100 से ज्यादा शहरों और ग्रामीण कस्बों में प्रदर्शन हो रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान में हो रहे विरोध-प्रदर्शन से उपजी हिंसा में कम से कम 42 लोगों की मौत हो चुकी है। 28 दिसंबर को तेहरान में बाजार बंद के साथ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन ईरान के सभी 31 प्रांतों में फैल गए हैं। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, आंदोलन के सिलसिले में 2270 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।
ईरान सरकार ने देश में इंटरनेट बंद कर दिया। साथ ही इंटरनेशनल फोन कॉल भी काट दिए। यह तब हुआ जब प्रदर्शनकारियों ने निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी की बात मानी। रजा पहलवी वही हैं, जिन्होंने जनता से सड़कों पर उतरने का आह्वान किया था।

