ईरान शांति डील की जानकारी छिपाने पर JD वेंस के बयान से क्यों मचा विवाद? क्या अमेरिका ने कोई बड़ा राज छुपाया? अमेरिका-ईरान समझौते के पीछे क्या है असली रणनीति? होर्मुज संकट से लेकर ईरान डील तक, क्या पश्चिम एशिया में बदलने वाला है शक्ति संतुलन? JD वेंस के बयान ने पाकिस्तान और कतर पर क्यों खड़े किए सवाल? क्या प्रेस आज़ादी बनी बहस का नया मुद्दा?

वॉशिंगटन/इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक और गोपनीय शांति समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नया और बेहद चौंकाने वाला सस्पेंस खड़ा हो गया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने इस बेहद संवेदनशील समझौते की शर्तों को सार्वजनिक करने में हुई देरी पर एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसने न केवल वॉशिंगटन बल्कि इस्लामाबाद तक हड़कंप मचा दिया है। उपराष्ट्रपति वेंस ने ईरान डील की जानकारी छिपाने के पीछे का राज खोलते हुए सीधे तौर पर पाकिस्तान और कतर की व्यवस्था पर तीखा तंज कसा है।

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ईरान डील छिपाने का रहस्य: वेंस का वो 'फर्स्ट अमेंडमेंट' वाला तीखा वार!

इस पूरे कूटनीतिक ड्रामे की शुरुआत तब हुई जब मीडिया ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से सवाल किया कि आखिर अमेरिका ने इस महा-समझौते के पब्लिकेशन (प्रकाशन) के समय को लेकर इतनी गोपनीयता क्यों बरती? इस पर वेंस ने मज़ाकिया लेकिन बेहद तल्ख अंदाज़ में पाकिस्तान में प्रेस की आज़ादी का मज़ाक उड़ाते हुए कहा, "पाकिस्तान और कतर के सिस्टम में 'फर्स्ट अमेंडमेंट' (अभिव्यक्ति की आज़ादी) और प्रेस की आज़ादी जैसी कोई चीज़ नहीं है।" वेंस ने साफ किया कि जब अमेरिका इस बेहद नाजुक जानकारी को सार्वजनिक करने की कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं पर काम कर रहा था, तब दूसरे देशों की तरह इसे तुरंत लीक नहीं किया जा सकता था।

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स्विट्जरलैंड जा रहे अमेरिकी दूत: परमाणु समझौते पर आखिरी दौर का सस्पेंस

इस बयानबाजी के बीच, परदे के पीछे एक और बड़ी वैश्विक हलचल शुरू हो चुकी है। समाचार एजेंसी 'एक्सियोस' (Axios) ने एक शीर्ष अमेरिकी अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट दी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ (Steve Witkoff) बहुत जल्दबाजी में स्विट्जरलैंड के लिए रवाना हो रहे हैं। विटकॉफ वहां ईरान के साथ एक और संभावित और बेहद खुफिया 'परमाणु समझौते' पर बातचीत के शुरुआती दौर का नेतृत्व करेंगे। यह कदम इसलिए भी सस्पेंस से भरा है क्योंकि इससे ठीक एक दिन पहले खुद जेडी वेंस ने लेबनान में अचानक भड़की लड़ाई के कारण इस बातचीत में शामिल होने का अपना दौरा रद्द कर दिया था।

वर्साय के महल में सीक्रेट डिनर: क्या है 14-सूत्रीय अमेरिका-ईरान समझौता?

जिस मुख्य समझौते को लेकर यह पूरा विवाद खड़ा हुआ है, उसकी कहानी फ्रांस के पेरिस से जुड़ी है। G7 शिखर सम्मेलन के तुरंत बाद वर्साय के महल में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ एक डिनर मीटिंग के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने इस 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे।

इस समझौते की मुख्य और बेहद गुप्त शर्तें निम्नलिखित हैं:

  • यूरेनियम की कटौती: तेहरान व्यापक आर्थिक प्रतिबंधों से राहत पाने के बदले अपने संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) की मात्रा को कम करने पर सहमत है।
  • 60 दिनों का सीज़फायर: लेबनान समेत पूरे पश्चिम एशिया में लड़ाई को "तुरंत" रोका जाएगा और युद्धविराम को 60 दिनों तक बढ़ाया जाएगा।
  • $300 अरब डॉलर का फंड: वॉशिंगटन इस समझौते के तहत तेहरान को $300 अरब डॉलर का भारी-भरकम पुनर्निर्माण फंड उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हुआ है।
  • होर्मुज जलमार्ग: अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा और होर्मुज जलडमरूमध्य से कमर्शियल ट्रैफिक के लिए सुरक्षित रास्ता बहाल किया जाएगा।

28 फरवरी का वो खूनी फ्लैशबैक: जब थम गई थी वैश्विक अर्थव्यवस्था

पश्चिम एशिया में इस विनाशकारी महायुद्ध की शुरुआत इसी साल 28 फरवरी को हुई थी, जब तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत रुकने के बाद अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर एक साथ भीषण हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया और दुनिया की जीवनरेखा माने जाने वाले 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को पूरी तरह बंद कर दिया था। अब जबकि कूटनीतिक बातचीत दोबारा पटरी पर लौट रही है, लेबनान में फिर से शुरू हुए तनाव ने इस शांति समझौते पर नए सिरे से काले बादल मंडरा दिए हैं। क्या स्टीव विटकॉफ की स्विट्जरलैंड यात्रा इस कूटनीतिक सस्पेंस का अंत कर पाएगी, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।