Karwa Chauth Emotional Story : करवा चौथ पर सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखेंगी, पति भी तोहफा देकर उनका व्रत को पूरा करेंगे। लेकिन भरतपुर में 200 से ज्यादा महिलाएं भी अपने सुहाग की सलामती की दुआ मांगेंगी। पर ये पति अपनी पत्नियों के पास नहीं आएंगे। आखिर क्या है इन महिलाओं की दर्दभरी कहानी?
कल्पना कीजिए, एक महिला हाथों में मेहंदी लगाए, माथे पर सिंदूर सजाए और छलनी से चांद को देख रही है। वह अपने पति की लंबी उम्र की दुआ मांग रही है। लेकिन जब व्रत खोलने का समय आएगा, तो उसके सामने पति नहीं होगा। न कोई पानी पिलाने वाला होगा और न ही उसके साथ चांद देखने वाला। इसके बावजूद उसकी आस नहीं टूटेगी। वह इस बार भी अपने सुहाग की सलामती के लिए करवा चौथ का व्रत रखेगी।
यह भावुक कर देने वाली कहानी राजस्थान के भरतपुर स्थित अपना घर आश्रम की उन महिलाओं की है, जिन्हें उनके घरवाले और पति लेने नहीं आए। करवा चौथ के मौके पर ये महिलाएं अपने पुराने रिश्तों को याद करेंगी। किसी को पति के लौटने की उम्मीद है, तो कोई अपने बीते हुए दिनों को याद करके ही खुश है।
212 महिलाएं स्वस्थ, फिर भी घर नहीं लौट पाईं
- भरतपुर का अपना घर आश्रम दुनिया के सबसे बड़े महिला आश्रय स्थलों में शामिल है। यहां कुल 3,643 महिलाएं रह रही हैं। इनमें 212 महिलाएं ऐसी हैं, जो मानसिक रूप से स्वस्थ हो चुकी हैं। उनके घर-परिवार और पतियों को भी इसकी जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद वे उन्हें लेने नहीं आए।
- इन महिलाओं के लिए करवा चौथ सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि अपने रिश्ते से जुड़ी उम्मीद को जिंदा रखने का मौका है। वे आज भी अपने पति को याद करती हैं। उन्हें उम्मीद है कि शायद किसी दिन उनका परिवार उन्हें लेने आ जाए। इसी उम्मीद के साथ वे हर साल करवा चौथ का व्रत रखती हैं।
याददाश्त नहीं लौटी, फिर भी जानती हैं करवा चौथ का महत्व
- आश्रम में करीब 426 महिलाएं ऐसी भी हैं, जो अभी तक पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पाई हैं। उनकी याददाश्त वापस नहीं लौटी है और वे अपने घर-परिवार का पता भी नहीं बता पातीं। इसके बावजूद वे करवा चौथ का महत्व समझती हैं और इस आयोजन में शामिल होती हैं।
- उनके लिए यह दिन सजने-संवरने, मेहंदी लगाने और दूसरी महिलाओं के साथ त्योहार मनाने का मौका भी है। आश्रम में कोशिश की जाती है कि कोई महिला खुद को अकेला महसूस न करे और त्योहार की खुशियों से दूर न रहे।
कुमकुम की घर वापसी, कई महिलाओं के लिए उम्मीद
- इन महिलाओं के बीच कुछ ऐसी कहानियां भी हैं, जो उम्मीद जगाती हैं। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के कोकड़ी गांव की कुमकुम उनमें से एक हैं। प्रशासनिक अधिकारी बबीता के मुताबिक, करीब नौ महीने पहले कुमकुम कोटा से रेस्क्यू करके आश्रम लाई गई थीं।
- स्वस्थ होने के बाद जब उन्होंने अपने घर का पता बताया, तो उनके पति प्रमोद चौहान उन्हें वापस घर ले गए। अब कुमकुम अपने परिवार के साथ करवा चौथ मना सकेंगी।
- आश्रम के मुताबिक, हर साल औसतन 500 लोगों को उनके परिवारों से मिलाने में सफलता मिलती है। इस साल अब तक 448 लोगों का पुनर्वास किया जा चुका है। इनमें 338 महिलाएं हैं, जबकि 105 सुहागिनें हैं। ये महिलाएं अब अपने घरों में परिवार के साथ करवा चौथ मना सकेंगी।
सजने-संवरने की खुशी, लेकिन मन में अपनों का इंतजार
- दिल्ली की रजनी, कोलकाता की राधा और भागलपुर की रोशनी जैसी महिलाओं के लिए करवा चौथ का दिन कई भावनाएं लेकर आता है। वे अपने पति को याद करती हैं और मन में यही उम्मीद रखती हैं कि शायद इस बार वे उन्हें लेने आ जाएं।
- अपना घर आश्रम की संस्थापिका डॉ. माधुरी भारद्वाज के मुताबिक, किसी महिला को अपने पति का चेहरा याद है, किसी को घर का आंगन और किसी को शायद अपने बीते जीवन की कुछ धुंधली यादें ही बाकी हैं। लेकिन करवा चौथ का त्योहार उनके मन में कई अरमान जगा देता है।
40 ब्यूटीशियन करेंगी महिलाओं का श्रृंगार
- करवा चौथ को लेकर आश्रम में दो दिन से तैयारियां चल रही हैं। करीब 40 ब्यूटीशियन की टीम 638 महिलाओं को सजाने-संवारने में जुटी है। उनके बाल बनाए जा रहे हैं, हाथों में मेहंदी लगाई जा रही है और नेल पेंट, फेशियल, हेयर कट व महावर से उनका श्रृंगार किया जा रहा है। महिलाओं के लिए खास व्यंजन भी तैयार किए जा रहे हैं, ताकि वे त्योहार को खुशी के साथ मना सकें।
- इस करवा चौथ पर इन महिलाओं के हाथों में मेहंदी होगी, माथे पर सिंदूर सजेगा और आंखें चांद का इंतजार करेंगी। फर्क सिर्फ इतना होगा कि कई महिलाओं के पास व्रत खुलवाने के लिए उनका पति नहीं होगा। फिर भी उनकी दुआ वही रहेगी—जिसके नाम का व्रत रखा है, वह जहां भी हो, सलामत रहे।






